...तो मुख्यमंत्री बन सकते हैं तेजस्वी यादव, अगर ये गणित फिट बैठ जाता है

Possibility of Tejashwi Yadav to become Bihar CM - Sakshi Samachar

बिहार में तेजस्वी के सीएम बनने का गणित

एनडीए को फोड़ने की जुगत में राजद

जानिए कैसे बन सकता है समीकरण 

पटना: बिहार में एनडीए को जनता ने सरकार बनाने के लिए स्पष्ट जनादेश दिया है। बावजूद इसके राजद नेता तेजस्वी यादव एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं कि उनकी पार्टी की ही सरकार बने। तेजस्वी और उनके सहयोगियों ने इस दिशा में कोशिश भी करनी शुरू कर दी है। राजद नेता तेजस्वी इसके लिए एनडीए के दो छोटे घटक दलों को आकर्षक ऑफर दे रहे हैं। यहां तक कि डिप्टी सीएम बनाने का लालच भी दिया जा रहा है वो भी खुल्लमखुल्ला।

राजद सूत्रों के मुताबिक उनकी पार्टी ने विकासशील इनसान पार्टी के मुकेश सहनी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी से संपर्क किया है। इनमें मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम और एक मंत्री पद देने का ऑफर किया गया है। वहीं जीतन राम मांझी को भी कुछ इसी तरह की पेशकश की गई है। हालांकि दोनों ही छोटी पार्टियों की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। राजद को लगता है कि अगर इन दोनों पार्टियों का समर्थन हासिल हो जाता है तो ओवैसी के AIMIM पार्टी विधायकों को अपने पाले में लाना आसान होगा। राजद नेताओं का दावा है कि AIMIM की तरफ से उन्हें इस बाबत आश्वासन भी मिल चुका है। 

बता दें कि महागठबंधन ने इस चुनाव में 110 सीटें जीती हैं। तोजस्वी को सरकार बनाने के लिए 12 और विधायकों की दरकार है। अगर एनडीए के दोनों छोटे घटक दल और ओवैसी की पार्टी का समर्थन मिल जाता है तो आसानी से महागठबंधन की सरकार बन सकती है। वीआईपी और हम पार्टियों को समझाने की कोशिश की जा रही है कि वे एनडीए की बनिस्पत महागठबंधन में अधिक फायदे में रहेंगे। जबकि दोनों ही पार्टियों की अपनी शिकायतें हैं, इनका कहना है कि चुनाव के ऐन पहले राजद ने हमें दुत्कार दिया था। जिसके चलते इन्हें एनडीए के पाले में जाना पड़ा। अब ये एनडीए में अधिक सम्मानित महसूस कर रहे हैं भले फायदा कुछ कम मिले। पाला बदलने में इ्न्हें इस बात का भी डर सता रहा है कि इनके काडर को गलत संदेश जाएगा, जिसका खामियाजा इन्हें पांच साल बाद भुगतना पड़ सकता है। हम पार्टी के एक नेता ने कहा कि राजद के अपमान को वे भूले नहीं हैं लिहाजा किसी भी हालत में तेजस्वी से हाथ मिलाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। अब देखना है कि तेजस्वी यादव की मशक्कत क्या रंग लाती है, और बिहार में खुल्लमखुल्ला हॉर्स ट्रेडिंग का खेल फलता फूलता है या नहीं?

कांग्रेस को सता रहा टूट का डर 

जानकार बताते हैं कि बिहार में एनडीए की सरकार तो बन जाएगी। वहीं कांग्रेस पार्टी को हमेशा टूट का खतरा बना रहेगा। अगर हम और वीआईपी जैसी छोटी पार्टियां एनडीए से अलग होती है तो फिर कांग्रेसी नेताओं की तोड़ने की कोशिश हो सकती है। ठीक उसी तर्ज पर जैसे गुजरात और मध्य प्रदेश में किया गया। अब पूरे पांच सालों तक कांग्रेस पार्टी को टूट की आशंकाओं के मद्देनजर सतर्क रहना होगा। 
 

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