कृषि विधेयक आज राज्यसभा से पास करा पाएगी सरकार? समझें उच्च सदन का अंकगणित

Passing Of Farm Bills In Rajya Sabha Not Easy For Modi Government - Sakshi Samachar

नई दिल्ली :  कृषि विधायकों को लोकसभा से पास कराने के बाद अब राज्यसभा की बारी है। यहां बिल पास कराना केंद्र सरकार के लिए एक चुनौती है। इन विधेयकों को लेकर एनडीए गठबंधन की सबसे पुरानी सहयोगी अकाली दल के विरोध की वजह से सरकार के लिए सदन के अंदर और बाहर मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। 

राज्यसभा में आज विवादास्पद फार्म बिलों पर चर्चा होनी है। ऐसे में कांग्रेस और कई विपक्षी दल इन प्रस्तावित विधेयकों का विरोध करने के लिए एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। वे उन्हें किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक बताते हैं। वही सत्तारूढ़ भाजपा और कई क्षेत्रीय संगठन इसका समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, राज्यसभा से इन विधेयकों को पारित करवाने के लिए संख्या सत्तारूढ़ के पक्ष में प्रतीत होती है, जबकि निचले सदन ने एनडीए के एक प्रमुख सदस्य शिरोमणि अकाली दल के विरोध के बावजूद पहले ही उन्हें मंजूरी दे दी है।

विधेयक को किसान विरोधी बताते हुए केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार रात मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, लोकसभा में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य, संवर्द्धन और सुविधा विधेयक-2020; कृषक सशक्तिकरण एवं संरक्षण, कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 साढ़े पांच घंटे की चर्चा के बाद पारित हो गया। इस दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। वहीं, इससे संबंधित आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल मंगलवार को ही पास हो चुका है। 

भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल अध्यादेश के समय से ही इसका विरोध कर रही है। गुरुवार को जब विधेयक लोकसभा में पेश किया गया तो अकाली दल के सांसद सुखबीर सिंह बादल ने विरोध करते हुए कहा कि हरसिमरत कौर बादल मंत्री पद से इस्तीफा देंगी। हरसिमरत केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री है। अकाली दल भाजपा नीत एनडीए का हिस्सा है। 

भाजपा को इन दलों का साथ मिलने की उम्मीद

राज्यसभा में  भाजपा के पास बहुमत नहीं है। राजसभा में संख्याबल पर अगर ध्यान दें तो 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में इस समय 2 सीटें खाली हैं। ऐसे में राज्यसभा में इन बिलों को पास करवाने के लिए सरकार को कम से कम 122 वोट की जरूरत पड़ेगी। यहां भाजपा 86 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। एनडीए की सहयोगी अकाली दल के विरोध के बावजूद सरकार को भरोसा है कि बीजू जनता दल के 9, एआईएडीएमके के 9, टीआरएस के 7 और वाईएसआर कांग्रेस के 6, टीडीपी के 1 तथा कुछ निर्दलीय सांसद भी इस विधेयक का समर्थन कर सकते हैं। सरकार को भरोसा है कि इस विधेयक के समर्थन में कम से कम 130 से ज्यादा वोट पड़ेंगे। 

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