भगवान का विरोध करने वाले इस नेता को जनता ने बना दिया 'देवता'

M Karunanidhi Birthday : Know About DMK President M Karunanidhi - Sakshi Samachar

एम करूणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को हुआ था

60 साल के राजनीतिक सफर में 5 बार बने मुख्यमंत्री

हिंदी विरोधी आंदोलन से राजनीति में बनाई थी खास पहचान

एक ऐसा शख्स जो खुद नास्तिक था, लेकिन उसके प्रशंसकों ने उसे 'भगवान' बना दिया। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री, तमिल सिनेमा जगत का सबसे बड़ा नाम मुत्तुवेल करूणानिधि ऐसी ही प्रतिभा के धनी थे। करूणानिधि के फैंस उन्हें 'कलाईनार' कहकर पुकारते थे। तमिल शब्द 'कलाईनार' का मतलब 'कला का विद्वान' होता है। एम करूणानिधि का आज जन्मदिन है। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) पार्टी के अध्यक्ष एम करूणानिधि की लोकप्रियता ऐसी थी कि उनकी मृत्यु की खबर सुनकर पूरा प्रदेश थम गया था। करूणानिधि के राजनीतिक कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी उनके आखिरी समय में मिलने घर गए थे।

करुणानिधि का राजनीति सफर

एम करूणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को चेन्नई के तिरुक्कुवलई में हुआ था। जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी का भाषण उन्हें इतना पसंद आया कि महज 14 साल की उम्र में ही उन्होंने राजनीति में आने का फैसला कर लिया था। उन्होंने जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति की शुरुआत की थी।

5 बार बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री 

करूणानिधि अपने तल्ख बयान के कारण चर्चा में बने रहते थे, लेकिन राज्य की जनता के बीच उनकी ऐसी शख्सियत थी कि 60 साल के राजनीतिक सफर में वह पांच बार मुख्यमंत्री बने। वह पहली बार साल 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए थे और वर्ष 1969 में तत्कालीन डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अन्नादुरई की मौत के बाद मुख्यमंत्री बने थे। 

इसके बाद साल 1971, 1989, 1996 और 2006 में भी वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। अपने पूरे राजनीतिक काल में उन्होंने अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। ऐसा करने वाले वह देश के इकलौते नेता हैं। 

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हिंदी भाषा के थे जबरदस्त विरोधी 

करूणानिधि ने अपने राजनीति की शुरुआत हिंदी विरोधी आंदोलन से की थी। हिंदी विरोधी आंदोलन से वह अचानक चर्चा में आ गए और उनकी राज्य में राजनीतिक पहचान बनने लगी थी। कल्लाकुडी में हिंदी विरोधी प्रदर्शन में भागीदारी उनके राजनीतिक सफर के लिए काफी अहम साबित हुआ। विरोध प्रदर्शन में करुणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया था और रेलगाड़ियों के मार्ग को रोकने के लिए पटरी पर लेट गए थे। इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद करुणानिधि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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