'धरती पुत्र' मुलायम सिंह यादव ने ऐसे रखा था राजनीति में कदम, पिता बनाना चाहते थे पहलवान

Know Untold Story About Mulayam Singh Yadav On His Birthday - Sakshi Samachar

28 साल की उम्र में पहली बार बने विधायक

1989 में पली बार बने सीएम मुलायम

समाजवादी पार्टी की स्थापना

हैदराबाद : समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) किसी परिचय के मोहताज नहीं है। करीब छह दशक की सक्रिय राजनीतिक पारी खेल चुके मुलायम सिंह यादव के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए लेकिन यूपी की सियासत में उनका रूतबा हमेशा बरकरार रहा। तीन बार यूपी के सीएम रहे मुलायम सिंह यादव आज अपना 82वां जन्मदिन मना रहे हैं। आईए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी खास बातें........ 

मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई में हुआ था। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुलायम सिंह के पिता का नाम सुघर सिंह और माता का नाम मूर्ति देवी है। मुलायम सिंह को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे। इसके लिए मुलायम सिंह को अखाड़े में उतार दिया गया, लेकिन उनकी किस्मत में तो किसी और ही अखाड़ें में अपना दमखम दिखाना चाहते थे।

वह अपने पांच भाई-बहनों में रतनसिंह यादव से छोटे व अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल सिंह यादव और कमला देवी से बड़े हैं। मुलायम सिंह की पहली शादी मालती देवी से हुई थी, जिनका मई 2003 में देहांत हो गया था। अखिलेश यादव मालती देवी के ही बेटे हैं। बाद में मुलायम सिंह यादव ने साधना यादव से दूसरी शादी की। प्रतीक यादव उनके दूसरे बेटे हैं।

28 साल की उम्र में पहली बार बने विधायक

'धरती पुत्र' उपनाम से मशहूर मुलायम सिंह ने गुरु नत्थूसिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से हीअपना राजनीतिक सफर शुरू किया। उन्होंने साल 1967 में अपने गृह जनपद इटावा की जसवंतनगर सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। मुलायम सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर अपने गृह जनपद इटावा की जसवंतनगर सीट से आरपीआई के उम्मीदवार को हराकर विजयी हुए थे। मुलायम को पहली बार मंत्री बनने के लिए 1977 तक इंतजार करना पड़ा। उस वक्त कांग्रेस विरोधी लहर में उत्तर प्रदेश में भी जनता सरकार बनी थी।

1989 में पहली बार सीएम बने मुलायम सिंह यादव 

मुलायम सिंह यादव साल 1980 के आखिर में उत्तर प्रदेश में लोक दल के अध्यक्ष बने थे जो बाद में जनता दल का हिस्सा बन गया। मुलायम 1989 में पहली बार उत्तर प्रदेश के सीएम बने। नवंबर 1989 में केंद्र में वीपी सिंह की सरकार गिर गई तो मुलायम सिंह चंद्रशेखर की जनता दल (समाजवादी) में शामिल हो गए और कांग्रेस के समर्थन से सीएम की कुर्सी पर विराजमान रहे। अप्रैल 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो मुलायम सिंह की सरकार गिर गई। 1991 में यूपी में मध्यावधि चुनाव हुए जिसमें मुलायम सिंह की पार्टी हार गई और भाजपा सूबे में सत्ता में आई।

समाजवादी पार्टी की स्थापना

4 अक्टूबर, 1992 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बनाने की घोषणा की। समाजवादी पार्टी की कहानी मुलायम सिंह के सियासी सफर के साथ-साथ चलती रही। मुलायम सिंह यादव ने जब अपनी पार्टी खड़ी की तो उनके पास बड़ा जनाधार नहीं था। नवंबर 1993 में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने थे। सपा मुखिया ने भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए बहुजन समाज पार्टी से गठजोड़ कर लिया। समाजवादी पार्टी का यह अपना पहला बड़ा प्रयोग था। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पैदा हुए सियासी माहौल में मुलायम का यह प्रयोग सफल भी रहा। कांग्रेस और जनता दल के समर्थन से मुलायम सिंह फिर सत्ता में आए और सीएम बने।

इस वजह से पीएम बनते- बनते रह गए 

कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के इरादे से उन्होंने केंद्र की राजनीति का रुख किया। 1996 में मुलायम सिंह यादव 11वीं लोकसभा के लिए मैनपुरी सीट से चुने गए। उस समय केंद्र में संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी तो उसमें मुलायम भी शामिल थे। उस वक्त मुलायम सिंह यादव रक्षामंत्री बने थे। 

हालांकि, यह सरकार बहुत लंबे समय तक चली नहीं। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की भी बात चली थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वे सबसे आगे खड़े थे, लेकिन लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया। इसके बाद चुनाव हुए तो मुलायम सिंह संभल से लोकसभा में वापस लौटे। असल में वे कन्नौज भी जीते थे, लेकिन वहां से उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सांसद बनाया।

अखिलेश यादव को सौंप दी कमान

साल 2012 के चुनाव से पहले नेताजी ने अपने बेटे अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश सपा की कमान सौंपी। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के पक्ष में अप्रत्याशित नतीजे आए। नेताजी ने बेटे अखि‍लेश को सूबे के सीएम की कुर्सी सौंप दी और समाजवादी पार्टी में दूसरी पीढ़ी ने दस्तक दी। 

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