बिहार के एकमात्र मुस्लिम सीएम अब्दुल गफूर, अपनों की ही साजिश के हुए थे शिकार !

Know About Bihar First Muslim CM Abdul Ghafoor On His Death anniversary - Sakshi Samachar

अब्दुल गफूर का राजनीतिक सफर

पार्टी के साजिश का शिकर हुए गफूर 

आजादी के बाद से अब तक बिहार में सिर्फ एक ही मुस्लीम सीएम बने हैं। इनका नाम अब्दुल गफूर है। इनके बाद से कोई भी अल्पसंख्यक समाज का नेता सीएम पद तक नहीं पहुंचा है, जबकि बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय का जनाधार काफी है। पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफ़ूर ने पूरा जीवन गरीबों के उत्थान और साम्प्रदायिक सद्भाव में लगा दिया लेकिन सच्चाई यह भी है कि वह अपनी ही पार्टी कांग्रेस के नेताओं की साजिश के शिकार हुए, और दो साल के बाद ही उनकी कुर्सी छीन गई।आज उनकी पुण्यतिथि है। इस मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी बातें.... 

अब्दुल गफूर का राजनीतिक सफर

18 मार्च 1918 को गोपालगंज जिला के सराए अखतेयार मे पैदा हुए अब्दुल गफूर बचपन से ही अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे। गोपालगंज से ही इबतदाई तालीम हासिल की फिर आगे पढ़ने के लिए पटना चले आए। पढ़ने मे तेज तो थे ही इसलिए घर वालों ने अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी भेज दिया जहां से उनका सियासी सफर शुरु हुआ। यहीं से देश को आज़ाद कराने का जज़्बा लिए गफूर जंगे आज़ादी मे कूद पड़े, जिसके कारण वह कई सालों तक जेल मे रहे। इस दौरना अब्दुल गफूर ने जिन्ना की टु नेशन थेयोरी को ठुकरा दिया और अखंड भारत की तरफदारी की। 

पार्टी के साजिश का शिकर हुए गफूर 

पहली बार 1952 में बिहार विधान चुनाव में जीत कर विधायक बने और फिर बिहार के सीएम बने। अब्दुल गफूर भले ही सीएम बन गए, लेकिन उन्हें भी मुख्यमंत्री की कुर्सी 2 साल के लिए ही नसीब हुई थी। वह जुलाई 1973 से अप्रैल 1975 तक राज्य के सीएम रहे। 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया। उनका कार्यकाल कई मायने में राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्हीं के कार्यकाल में संपूर्ण क्रांति की शुरुआत हुई थी।

कहा जाता है कि गफूर के खिलाफ उनके ही दल में बड़ी साजिश की गयी जिसका उन्हें बखूबी एहसास था। केदार पाण्डे और जगन्नाथ मिश्र के बीच अब्दुल गफूर पीस कर रह गए पर उन्होने हार नही माना। 1984 मे कांग्रेस के टिकट पर सिवान से जीत कर सांसद बने। लेकिन 1984 के राजीव गांधी सरकार से उनका अलग खेमा था। 1996 में गोपालगंज से समता पार्टी के टिकट पर जीत कर संसद पहुचे थे। 

अब्दुल गफूर के काल हुई कई महत्वपूर्ण घटनाएं

अब्दुल गफूर के शासन में बिहार की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। लोकनायक जेपी नारायण के नेतृत्व में 4 नवंबर 1974 को पटना में युवाओं ने मार्च निकाला था, जिस पर पुलिस ने पटना गोलंबर के पास लाठी चार्ज किया था। इस घटना में जेपी भी घायल हो गए थे। इतना ही नहीं, अब्दुल गफूर के सीएम रहते हुए 1975 में समस्तीपुर में ललित नारायण मिश्र की हत्या हुई थी। इन सब घटनाओं के बाद उन्हें सीएम की कुर्सी से हटा दिया गया और जगन्नाथ मिश्र को सीएम बना दिया गया।

समता पार्टी के गठन में सक्रिय भूमिका  

बिहार में अब्दुल गफूर की पहचान एक ईमानदार राजनेता के तौर पर होती थी। बताया जाता है कि नीतीश कुमार ने राजद से अलग होकर जब नई समता पार्टी बनाई तो पार्टी के गठन में अब्दुल गफूर की सक्रीय भूमिका रही तथा वे समता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे । साल 1996 में समता पार्टी कि टिकट पर वो गोपालगंज से संसद निर्वाचित हुए। कटिहार मेडिकल कॉलेज की स्थापना में भी इनका सक्रिय सहयोग रहा। फिर लम्बी बिमारी से लड़ते हुए 10 जुलाई 2004 को पटना में इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। 

अब्दुल गफूर को उनके गांव सराए अखतेयार मे दफनाया गया। बिहार के एक मात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनके नाम पर ना कोई कॉलेज दिखता है और ना ही कोई स्कूल , यहां तक के एक सड़क भी नहीं है।

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