पुण्यतिथि विशेष : सरल स्वभाव राजीव गांधी की मौत को याद कर आज भी दहल उठता है देश

 Death anniversary special: Simple nature remembers the death of Rajiv Gandhi, the country still shivers - Sakshi Samachar

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बहुत कम उम्र में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले भारत के युवा प्रधानमंत्री और भारत में कंप्यूटर क्रांति का जनक भी माना जाता है। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर आइए जानते हैं, उनकी जिंदगी के 16 रोचक तथ्य—

1. राजीव गांधी को भारत के सातवें और 40 की उम्र में बनने वाले सबसे युवा प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया जाता है। स्वभाव से काफी सहनशील राजीव का पूरा नाम राजीव रत्न गांधी था। कहा जाता है कि इनका नाम राजीव इसलिए रखा गया क्योंकि जवाहरलाल नेहरू की पत्नी का नाम कमला था और राजीव का मतलब कमल होता है। कमला की याद को ताजा बनाए रखने के लिए नेहरू जी ने इनका नाम राजीव रखा था। साल 1980 में मां इंदिरा की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था।

2. क्या आप जानते हैं कि देश में पीढ़ीगत बदलाव के अग्रदूत श्री गांधी को देश के इतिहास में सबसे बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ था। राजीव गांधी, इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी के बड़े पुत्र थे। इंदिरा गांधी की मृत्यु के शोक से उबरने के बाद उन्होंने लोकसभा का चुनाव कराने का आदेश दिया। इसमें कांग्रेस को पिछले सात चुनावों की तुलना में लोकप्रिय वोट अधिक अनुपात में मिले और पार्टी ने 508 में से रिकॉर्ड 401 सीटें हासिल कीं।

3. 1984 में वह अपनी मां की हत्या के बाद भारत के सातवें और सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने कैम्ब्रिज इंपीरियल कॉलेज लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज में अध्ययन किया। उन्होंने राजनीति में प्रवेश 1980 में अपने भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना से हुई मृत्यु के बाद किया था। 

4. राजीव गाँधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। वे सिर्फ तीन वर्ष के थे, जब भारत स्वतंत्र हुआ और उनके दादा जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी ने अपना बचपन तीन मूर्ति हाउस में अपने दादा के साथ बिताया, जहां इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की परिचारिका के रूप में कार्य किया था।

5. राजीव गांधी कुछ समय के लिए देहरादून के वेल्हम स्कूल गए, लेकिन जल्द ही उन्हें हिमालय की तलहटी में स्थित आवासीय दून स्कूल भेज दिया गया था। बाद में उनके छोटे भाई संजय गांधी को भी इसी स्कूल में भेजा गया, जहां दोनों साथ रहे। स्कूल से निकलने के बाद राजीव गांधी कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए, लेकिन जल्द ही वे वहां से हटकर लंदन के इम्पीरियल कॉलेज चले गए। उन्होंने वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की लेकिन किसी कारणवश उसे वह पूरा नहीं कर पाए।

6. साल 1966 में राजीव गांधी भारत आ गए। उस समय तक उनकी मां इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन चुकी थीं। राजीव गांधी को संगीत में काफी रूचि थी। उन्हें पश्चिमी और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और आधुनिक संगीत पसंद था। उन्हें फोटोग्राफी और रेडियो सुनने का भी शौक था।

7. इन सबके साथ—साथ हवाई जहाज उड़ाना उनका सबसे बड़ा जुनून था इसलिए उन्होंने दिल्ली जाकर फ्लाइंग क्लब से पायलट की ट्रेनिंग ली और 1970 में एक पायलट के तौर पर इंडियन एयरलाइंस में काम करने लगे। इससे पता चलता है कि उन्हें राजनीति में बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं थी। अब तक तो उनके भाई संजय गांधी अपनी मां के साथ राजनीति में उतर चुके थे।

8. लंदन में राजीव गांधी की मुलाकात एडविज एंटोनियो एल्बीना मैनो (Edvige Antonio Albina Maino) से हुई। 1968 में राजीव गांधी ने नई दिल्ली में Edvige Antonio Albina Maino से शादी कर ली और उनका नाम बदलकर सोनिया गांधी रखा गया। उनके दो बच्चे हुए राहुल और प्रियंका गांधी, जो कि नई दिल्ली में इंदिरा गांधी के निवास पर रहे।

9. राजीव गांधी की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी, लेकिन जब उनके छोटे भाई की मृत्यु 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में हो गई तब उन्हें राजनीति में अपनी मां के दबाव बनाने के बाद आना ही पड़ा। 1981 में राजीव को भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया था।

10. राजीव गांधी की मां इंदिरा गांधी को 31 अक्टूबर 1984 को उनके अपने ही एक सिख बॉडीगार्ड ने मार दिया था। उसके बाद 1984 में कांग्रेस ने राजीव गांधी के नेतृत्व में अमेठी से लोकसभा का चुनाव लड़ा और कांग्रेस को 533 में से 404 सीटें मिलीं, जो कि इतिहास की सबसे बड़ी जीत मानी गई। इस प्रकार राजीव गांधी भारत के सातवें और 40 साल की कम उम्र में सबसे युवा प्रधानमंत्री बने।

11. राजीव गांधी ने देश की उन्नति के लिए काफी योगदान दिया। उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देते हुए देश में जवाहर नवोदय स्कूलों की स्थापना की। आधुनिकता को बढ़ावा देते हुए संचार, कंप्यूटर क्षेत्र जैसे विज्ञान को भारत में आरम्भ किया। साइंस और टेक्नॉलोजी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी बजट बढ़ाए। इन्हीं के कार्यकाल में MTNL का गठन हुआ था। इतना ही नहीं 18 वर्ष से मताधिकार शुरू किया गया और पंचायती राज को शामिल किया गया। कई अहम निर्णय भी राजीव गाँधी ने लिए, जिसमें श्रीलंका में शांति सेना भेजना, असम, मिजोरम एवं पंजाब समझौता आदि शामिल हैं। राजीव गाँधी ने कश्मीर और पंजाब में हो रही आतंरिक लड़ाई को भी काबू करने की भरपूर कोशिशें की थीं।

12. उन्होंने युवा शक्ति को अत्यधिक बढ़ावा दिया और कहा था कि देश का विकास देश के युवाओं में जागरूकता लाने पर ही होगा इसलिए युवाओं को रोजगार देने के लिए जवाहर रोजगार योजना शुरू किया।

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13. 1980 और 1990 के बीच में कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगाया गया था। उस वक्त राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। राजीव गाँधी पर “बोफोर्स तोपों” की खरीददारी में लिए गए घूस कमीशन का आरोप था। इन चीजों का असर आगामी चुनावों में दिखाई दिया। 1989 में राजीव गांधी को आम चुनावों में हार का सामना करना पड़ा और प्रधानमंत्री के पद से हटना पड़ा। उन्होंने दो साल तक विपक्ष में रहकर कार्य किया। उनका राजनैतिक जीवन काफी कष्टदायक था, लेकिन अपने धैर्यवान स्वभाव के कारण वे उसके साथ न्याय कर पाए।

14. श्रीलंका में हो रहे आतंकी मामलों को सुलझाने के लिए राजीव गाँधी ने अहम कदम उठाए, जिसके चलते कई लोग उनके दोस्त और दुश्मन बन गए। उस समय श्रीलंका में गृहयुद्ध चल रहा था, जिसे खत्म करने के लिए राजीव गांधी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने के साथ एक समझौता किया था। उसके अनुसार उन्होंने युद्ध को रोकने के लिए भारतीय सेना को श्रीलंका में तैनात कर दिया, लेकिन LTTE नहीं चाहता था कि भारत की शांति सेना को श्रीलंका भेजा जाए। शांति सेना भेजे जाने से पहले LTTE प्रमुख वी प्रभाकरन दिल्ली में राजीव गांधी से मिलने आया था। राजीव गांधी उसके साथ सख्ती से पेश आए थे। तभी से वह इस ताक में था कि कब मौका मिले और राजीव गांधी का काम तमाम कर दिया जाए।

15. 21 मई, 1991 को राजीव गांधी एक रैली को संबोधित करने के लिए चेन्नई से 30 किलोमीटर दूर श्रीपेरंबुदूर पहुंचे थे। इन्हीं में एक LTTE की मेंबर धनु भी थी। राजीव गांधी के आसपास काफी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, परन्तु धनु उनके पास जाने में कामयाब हो गई और जैसे ही धनु ने राजीव गाँधी के पैर छूए, एक तेज बम धमाके के साथ सबकुछ खत्म हो जाता है। असल में, उसने अपने कपड़ों में बम छुपाया हुआ था। इस हृदयविदारक घटना के कारण राजीव गाँधी समेत 17 अन्य लोगों की भी 21 मई 1991 को मौत हो गई।

16. राजीव गांधी का स्वभाव सहनशील और सरल था। वह कोई भी अहम फैसला लेने से पहले अपनी पार्टी के साथ विचार किया करते थे। उन्होंने देश को आधुनिकता की तरफ अग्रसर किया। वे देश को उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे। देश में एकता बनाए रखना चाहते थे और उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक था— इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण। 21 मई, 1991 में उनकी मृत्यु हो गई लेकिन बाद में उन्हें "भारत रत्न" से सम्मानि​त किया गया।

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