कोरोना ने जो सिखाया, 9 सितंबर को दिखेगी उसकी बानगी, हिमालय दिवस पर थीम होगा 'हिमालय और प्रकृति'

What COVID taught us, will be seen on 9 September on Himalayan Day - Sakshi Samachar

हम इस बार हिमालय दिवस पर मिलेंगे

सुनियोजित ढंग से लिखें नया अध्याय

2010 से मनाया जा रहा है हिमालय दिवस

नई दिल्ली: हर साल की तरह इस बार का हिमालय दिवस मानव संसाधन एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से 9 सितम्बर को आयोजित किया जाएगा। ये जानकारी खुद शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने दी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस साल कोरोना महामारी ने सभी को प्रकृति के मूल स्वरूप से परिचित कराया है और सभी ने प्रकृति के हमारे जीवन पर होने वाले प्रभावों को इतने सकारत्मक ढंग से समझा है। इस साल हिमालय दिवस का थीम 'हिमालय और प्रकृति' होगा।

हम इस बार हिमालय दिवस पर मिलेंगे

उन्होंने कहा कि वो उन सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस निमंत्रण को स्वीकार किया। "मुझे लगता है कि प्रकृति को अपने मूल स्वरूप में बचाये रखना मानव जाति का कर्तव्य है और इसी संकल्प को लेकर, हम इस बार हिमालय दिवस पर मिलेंगे। हिमालय से आने वाला हर एक शख्स इस बात को भलीभांति समझ सकता है, कि अगर हिमालय से जरा भी छेड़छाड़ हुई, तो प्रकृति हमें माफ नहीं करेगी।"

सुनियोजित ढंग से लिखें नया अध्याय

"हमें इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि हम सब सामुदायिक भागेदारी और विकास के लक्ष्यों के प्रति, सुनियोजित ढंग से नया अध्याय लिखें, कि हिमालय हमारी वैश्विक धरोहर है और 130 करोड़ से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से हिमालय पर निर्भर हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ और संयोग रहा कि जन्मभूमि के साथ कर्मभूमि भी यही क्षेत्र रहा और मेरा बचपन से ही हिमालय के प्रति जबरदस्त आकर्षण रहा है।"

2010 से मनाया जा रहा है हिमालय दिवस

वैसे तो हर साल 2010 से हिमालय दिवस मनाया जा रहा है, परन्तु 2013 में केदारनाथ में किस कदर तबाही मची थी, ये सारी दुनिया ने देखा था। उसके बाद हर साल नौ सितंबर को हिमायल दिवस मनाने की अधिकारिक घोषणा की गई। उस समय सभी लोगों ने इस घोषणा का स्वागत किया था। इसी क्रम में 2019 में हिमालयी राज्यों का कॉन्क्लेव मसूरी में हुआ और 11 हिमालयी राज्यों ने एक मंच साझा किया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और हिमालय को बचाना ही सुखद भविष्य के लिए जरूरी है।

हिमालय को बचाने की चुनौती हिमालयी राज्यों तक ही सीमित न रहे

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि, "मैं मीडिया के माध्यम से समस्त लोगों से अपील करना चाहता हूं कि हिमालय को बचाने की चुनौती सिर्फ हिमालयी राज्यों तक ही सीमित न रहे, इसमें सभी का सहयोग अनिवार्य है। सभी लोगों को हिमालय संरक्षण के लिए चलाए जा रहे इस विशेष अभियान की शपथ भी दिलाएंगे।"

उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, अनुराग ठाकुर, चीफ ऑफ स्टाफ विपिन रावत, पद्मभूषण डॉ अनिल जोशी के अलावा कई पर्यावरण प्रेमी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
-आईएएनएस

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