कोरोना : ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बनाया खास इन्हेलर, फेफड़ों पर वायरस का असर करेगा कम

UK scientists made special inhaler reduce effect of Corona virus on lungs - Sakshi Samachar

कोरोना वायरस का कहर जारी है 

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बनाया इन्हेलर

ये इन्हेलर वायरस से लड़ेगा 

कोरोना वायरस ने लगभग पूरे विश्व में तबाही मचा रखी है और हर दिन इसके न सिर्फ नए मामले सामने आ रहे हैं बल्कि कई लोगों की मौत भी हो रही है। इस वायरस की वैक्सीन बनाने में कई देश के वैज्ञानिक लगे हैं पर अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। 

वहीं दूसरी ओर इसकी दवा बनाने में भी वैज्ञानिक लगे हैं।  पहले से उपलब्ध दवाओं से कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है जिससे लोग ठीक भी हो रहे हैं। इस बीच ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा इन्हेलर तैयार किया है जो कोरोना संक्रमित मरीजों को वायरस से लड़ने में मदद करेगा। बताया जा रहा है कि इस इन्हेलर में खास तरह का प्रोटीन है, जो वायरस से लड़ता है और कोरोना के मरीजों को राहत पहुंचाता है। 

आइये जानते हैं इस इन्हेलर में क्या कुछ है खास ...

- इस इन्हेलर को ब्रिटेन की साउथैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। उनका कहना है कि इस इन्हेलर में ऐसे ड्रग का इस्तेमाल किया गया है जो कोरोना संक्रमण के बाद फेफड़ों पर वायरस के दुष्प्रभाव को कम करता है। इस ड्रग का कोड SNG001 बताया गया है। 

- शोधकर्ताओं का कहना है कि इस इन्हेलर में मौजूद ड्रग में एक खास तरह का प्रोटीन है। इस प्रोटीन को इंटरफेरान बीटा कहा जाता है। शरीर में जब वायरस पहुंचता है तब यह प्राकृतिक रूप से शरीर में ही तैयार होता है। कोरोना मरीजों के शरीर में इसे पहुंचाकर वायरस से लड़ने में उनकी मदद की जा सकेगी।

- शोधकर्ताओं के मुताबिक कोरोना वायरस के 120 मरीजों पर इसका ट्रायल शुरू किया गया है। मल्टीपल स्केलेरोसिस में इस तरह के इलाज का प्रयोग किया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि रिसर्च के दौरान जब हांगकांग में अन्य दवाओं के साथ इस ड्रग का प्रयोग कोरोना मरीजों पर किया गया तो उनमें कोरोना के लक्षणों में कमी आई।

- मरीजों पर इस इन्हेलर का ट्रायल पूरा होने पर जो परिणाम आएंगे, उन्हें जुलाई में जारी किया जाएगा। शोधकर्ता निक फ्रेंसिस के मुताबिक, कोरोना मरीजों को फिलहाल बेहतर इलाज की जरूरत है जो इस बीमारी की अवधि को कम करे, लक्षणों को गंभीर होने से रोके और कम समय में मरीजों की रिकवरी हो सके।

- इस ट्रायल में ज्यादातर 50 से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शामिल किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों को लक्षण दिखने के तीन दिन के अंदर इन्हेलर दिया जाएगा। एक दिन में इसकी एक डोज दी जाएगी और उनके शरीर में ऑक्सीजन के स्तर और उनके शरीर के तापमान पर नजर रखी जाएगी। 14 दिन तक इसके असर को डॉक्टर देखेंगे। 

- शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मरीज इन्हेलर से इस ड्रग को खींचते हैं तो यह फेफड़ों तक पहुंचती है और वायरस के दुष्प्रभाव को कम करती है। बताया जा रहा है कि यह मरीजों की हालत गंभीर होने से रोकेगी। अगर इसका ट्रायल सफल होता है तो साल के अंत तक इसके लाखों डोज तैयार किए जाएंगे। 

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