जन्मदिन पर विशेष : कुछ ऐसा ही है श्री श्री का तेज, खुद ही नहीं, दुनिया को देखने का नजरिया भी बदल देता है

Sri Sri Ravi Shankar had already made this prediction regarding Corona - Sakshi Samachar

कोरोना को लेकर की थी भविष्यवाणी

निश्चित ही विजेता बनकर उभरेगा भारत

अपने सवालों के जवाब जानने की कोशिश

हैदराबाद : पूरी ​दुनिया आज कोरोना वायरस की जद में है। ऐसे हालात में भी भारत से पूरी दुनिया को उम्मीदें हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने तो बाकायदा अपनी इस आशा को दुनिया के सामने बहुत पहले ही रख दिया था। मंगलवार रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुनिया की उन उम्मीदों को सच करने की ओर पहला कदम बढा दिया है। जबकि आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने बहुत पहले ही इस ओर इशारा कर दिया था।

कोरोना को लेकर की थी भविष्यवाणी

19 अप्रैल को फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिकल एंड गायनोकोलॉजिकल सोसायटी और इंडिया (FOGSI) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के साथ वेबिनार का आयोजन किया था। आगरा के कई जाने-माने डॉक्टरों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की थी। ये सब लोग श्री श्री के साथ लाइव थे और दुनिया भर में डॉक्टरों और नागरिकों की ओर से उनसे प्रश्न पूछ रहे थे।

निश्चित ही विजेता बनकर उभरेगा भारत

FOGSI और आगरा के डॉक्टरों समेत तकरीबन 140 देशों के 1 लाख 50 हजार लोग भी इस आनलाइन कार्यक्रम का हिस्सा थे। ज्यादातर लोगों का सवाल था— कोरोना को लेकर आने वाले समय में देश और दुनिया का क्या हाल होने वाला है। श्री श्री ने त​ब अपने मनमोहक अंदाज में जवाब दिया था— दुनिया ने पहले भी महामारियों से युद्ध किया है। भारत आध्यात्म और विज्ञान के समन्वय से कोविड-19 के विरुद्ध मैदान में है और निश्चित ही विजेता बनकर उभरेगा। यकीनन ताजा हालात बहुत बेहतर तो नहीं कहे जा सकते, इसके बावजूद यह कहना गलत न होगा कि पूरी दुनिया के मुकाबले कोविड-19 संक्रमण की संख्या को लेकर भारत को विजेता कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

अपने सवालों के जवाब जानने की कोशिश

कुछ ऐसा ही है आध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर का तेज। गूढ से गूढ बातों को भी इतनी सहजता और सरलता से कह जाते हैं कि लोग उनकी इस अदा के कायल होते जाते हैं। तभी तो पूरी दुनिया में उनके चाहने वालों और प्रशंसकों की एक बडी संख्या मौजूद है। आम लोग ही नहीं, बॉलीवुड से जुडी कई हस्तियां भी ऐसी हैं, जो अक्सर अपनी समस्याओं का समाधान उनसे पूछकर करते हैं। पिछले दिनों 'सीरियल क्वीन' एकता कपूर और 'कॉमेडी किंग' कपिल शर्मा ने 'हार्ट टू हार्ट' कार्यक्रम के दौरान उनसे बातचीत की और अपने सवालों के जवाब जानने की कोशिश की।

एकता ने पूछा, क्या है कर्म की भूमिका

टेलीविजन इंडस्ट्री की मशहूर निर्माता एकता कपूर को 8 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लाइव स्ट्रीम में देखा गया था, जहां वह ग्लोबल ह्यूमेनिटेरियन और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के साथ बातचीत करती हुई नजर आई थीं। इस दौरान एकता ने गुरुदेव से बेहद व्यावहारिक सवाल पूछे थे। एकता ने पूछा, "कर्म की क्या भूमिका है? अगर हर कोई अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है तो कर्म का जन्म कहां से हो रहा है? क्या कर्म संयोग से परे है या यह वही है, जो हम करते हैं?"

यहां कुछ च्वाइस है और कुछ नसीब

इस पर श्री श्री रविशंकर ने जवाब दिया, "सही कहा। अतीत में जो कुछ भी हुआ है, वह कर्म का नतीजा ही है। जिस क्षण आप यह समझ जाते हैं कि यह कर्म का नतीजा ही है, बस उसी पल से आप स्वतंत्र हो जाते हैं। यह न भूलें कि आपके लिए यहां कुछ च्वाइस है तो कुछ आपकी किस्मत। यानि आपका भाग्य।"

विश्वास उसमें करना पडता है जिसे जानते नहीं

जब एकता ने गुरुदेव से पूछा कि क्या वे जीवन के बाद वाले जीवन में विश्वास करते हैं तो उन्होंने उत्तर दिया, "विश्वास नहीं बल्कि मैं जानता हूं। विश्वास उसमें करना पड़ता है जिसके बारे में हम जानते नहीं।"

कपिल ने पूछा, आखिर कहां हैं भगवान

इसी कार्यक्रम के दौरान  7 मई को कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने अपने चुटीले अंदाज में श्री श्री से कुछ सवाल किए। कपिल ने पूछा— भगवान आखिर कहां हैं? कोई कहता है मंदिर में, कोई मस्जिद तो कोई गुरुद्वारा और कोई चर्च में बताता है। पर असल में वे कहां हैं? श्री श्री ने इस सवाल का बडे ही रोचक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, ईश्वर प्रेम है और वह तुम्हारे दिल में बसा हुआ है। पूरी प्रकृति में ईश्वर ही है। लोगों के हिसाब से भगवान दिखाई नहीं देते पर मैं कहता हूं कि उनके सिवाय कुछ है ही नहीं।

बाबा लोग क्यों नहीं करते शादी

कपिल ने अगला सवाल किया— बाबा लोग शादी क्यों नहीं करते? क्या वे बीवियों के तर्क से डरते हैं? या फिर गृहस्थ जीवन से?इस पर श्री श्री का जवाब आया— देखो, चार तरह के लोग संन्यासी बनते हैं। पहले वो, जो बहुत दुखी होते हैं। दूसरे वो, जिन्हें जानने की इच्छा होती है यानि जिज्ञासु प्रवृत्ति वाले। तीसरे वो, जो ज्ञानी होते हैं और चौथे वे, जिन्हें जीवन में सिर्फ उनके मतलब का कुछ चाहिए होता है। संन्यासी और गृहस्थ जीवन जीने वालों में फर्क बताते हुए श्रीश्री कहते हैं, एक संन्यासी के लिए ये दुनिया एक परिवार है लेकिन गृहस्थ के लिए उनका परिवार ही सबकुछ है।

पत्नी हमेशा तारीफ करे, इसका क्या है तरीका

कपिल ने श्री श्री से पूछा— गुरुदेव, क्या ऐसा कोई तरीका है जिससे उनकी पत्नी हमेशा उनकी तारीफ करे। इस पर श्री श्री जोर से हंस पडे। थोडी देर रुक कर उन्होंने जवाब दिया— ऐसा तभी संभव है जब सूर्य पश्चिम से निकलने लगेगा। कपिल ने जवाब सुनकर कहा— मैं आपका मतलब समझ गया। तब श्री श्री ने अपनी बात को आगे बढाते हुए कहा— कहावत है कि हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत होती है। और यह वही औरत होती है, जो हमेशा कहती है कि ये गलत कर रहा है।

 

तमिलनाडु के पापनाशम में जन्मे श्रीश्री

ऐसे ही कई सवालों के जबरदस्त जवाब देने वाले आध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर का आज जन्म दिन है। 13 मई 1956 को तमिलनाडु के पापनाशम इलाके में इनका जन्म हुआ था। उनका हमेशा से कहना है कि मैं एक तनाव और हिंसामुक्त समाज चाहता हूं। उनके पिता का नाम व वेंकट रत्नम् था, जो भाषाकोविद् थे। उनकी माता विशालाक्षी एक सुशील महिला थीं। आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए उनके पिता ने उनका नाम रखा था— ‘रविशंकर’।

हमेशा से ही थे आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले

रविशंकर शुरू से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। मात्र चार साल की उम्र में वे श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ कर लेते थे। बचपन में ही उन्होंने ध्यान करना शुरू कर दिया था। उनके शिष्य बताते हैं कि फीजिक्स में डिग्री उन्होंने 17 वर्ष की आयु में ही ले ली थी।

महर्षि महेश योगी के थे शिष्य

रविशंकर पहले महर्षि महेश योगी के शिष्य थे। उनके पिता ने उन्हें महेश योगी को सौंप दिया था। अपनी विद्वता के कारण रविशंकर महेश योगी के प्रिय शिष्य बन गये। जब प्रख्यात सितार वादक रवि शंकर ने उन पर आरोप लगाया कि वे उनके नाम की कीर्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं तब उन्होंने अपने नाम रविशंकर के आगे ‘श्री श्री’ जोड़ लिया।

सशुल्क सिखाते हैं सुदर्शन प्रक्रिया 

श्री श्री रविशंकर लोगों को सुदर्शन क्रिया सशुल्क सिखाते हैं। इसके बारे में वो कहते हैं कि 1982 में दस दिवसीय मौन के दौरान कर्नाटक के भद्रा नदी के तीरे लयबद्ध सांस लेने की क्रिया एक कविता या एक प्रेरणा की तरह उनके जेहन में उत्पन्न हुई। उन्होंने इसे सीखा और दूसरों को सिखाना शुरू किया। श्री श्री रविशंकर ने 'आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन' की स्थापना वर्ष 1982 में की। यह शिक्षा और मानवता के प्रचार-प्रसार के लिए सशुल्क कार्य करती है। श्री श्री ने 1997 में ‘इंटरनेशनल एसोसियेशन फार ह्यूमन वैल्यू’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उन मूल्यों को फैलाना है, जो लोगों को आपस में जोड़ती है।

शरीर और मन के बीच की कडी है सांस

श्री श्री रविशंकर कहते हैं, शरीर और मन के बीच की एक कड़ी की तरह है— सांस। शरीर और मन, दोनों को जोड़ती है— सांसें। मन को शांत करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि जितना जरूरी है कि आप ध्यान लगाएं, उतना ही जरूरी है कि आप दूसरों की सेवा भी करें।  विज्ञान और आध्यात्म को श्री श्री एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक मानते हैं।

न्यूयार्क के लोगों को निःशुल्क तनाव दूर करने के लिए करवाया कोर्स 

श्री श्री एक ऐसी दुनिया बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं जिसमें रहने वाले लोग ज्ञान से परिपूर्ण हों, ताकि वे तनाव और हिंसा से दूर रह सकें। 2001 में 26/11 को जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादियों ने हमला किया तो आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पूरे न्यूयार्क के लोगों का तनाव दूर करने के लिए निःशुल्क कोर्स करवाया। इस संस्था ने कोसोवो में युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए सहायता कैंप भी लगाया।

इराक में भी बताए उपाय

श्री श्री की इस संस्था ने इराक में 2003 में युद्ध प्रभावित लोगों को भी तनाव मुक्ति के उपाय बताए। इराक के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर श्री श्री रविशंकर ने इराक का दौरा किया और वहां के शिया, सुन्नी तथा कुरदिश समुदाय के नेताओं से बातचीत की। 2004 में श्री श्री पाकिस्तान के उन नेताओं से भी मिले, जो विश्व शांति स्थापना के पक्षधर थे। संसार ने जब सुनामी को देखा तो इस संस्था के लोग मदद के लिए वहां भी खड़े थे। दुनिया भर के कैदियों के उत्थान के लिए भी संस्था निरंतर कार्य करती रहती है। बता दें कि 'आर्ट ऑफ लिविंग' कोर्स का आधार ही है, सुदर्शन- क्रिया।​

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सम्मान एवं पुरस्कार
श्री श्री रविशंकर की सेवाओं को देखते हुए पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। साल 2016 में भारत सरकार ने श्री श्री रविशंकर को पद्मविभूषण से सम्मानित किया। 2006 में मंगोलिया का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार आर्डर पोल स्टार उनके नाम किया गया। वहीं, साल 2007 में अमेरिका ने श्री श्री को नेशनल वेटरैन्स फाउंडेशन अवार्ड से भी नवाजा।

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