ज्यादा काम करने की आदत आपको बनाता है WORKAHOLIC, इससे बचें वरना होंगी ये परेशानियां...

Over Working Nature Makes You Workaholic, It Will Effect Your Health - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : हर साल 5 जुलाई को मनाया जाता है NATIONAL WORKAHOLICS DAY। य​ह दिन हमें यह एहसास कराता है कि जिंदगी में काम जितना अहम है, उतनी ही अहमियत भरा है हमारा पारिवारिक जीवन। अक्सर काम में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि निजी और पारिवारिक जीवन के लिए वक्त ही नहीं निकाल पाते।

एक घंटे पहले काम पर बैठ जाते हैं!

अगर आप भी एक घंटे पहले अपने काम पर बैठ जाते हैं, कई बार काम की वजह से अपने खाने को स्किप कर देते हैं यानि छोड़ देते हैं या खाने के लिए देर से बैठते हैं या फिर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जो अक्सर ऐसा ही करता है तो उन्हें यह अवश्य समझा दें कि जीवन में काम ही सबकुछ नहीं होता। अपनी जिंदगी के लिए भी कुछ वक्त निकालना उतना ही जरूरी होता है। यह दिन ऐसे वर्कओहलिक लोगों को यही याद दिलाने के लिए है।

जिंदगी में काम ही सबकुछ नहीं होता

फिर, इस कोरोना काल के दौरान तो लोगों को निजी जिंदगी और पारिवारिक जिंदगी की अहमियत का भी बखूबी अंदाजा लग गया होगा। कोरोना काल के दौरान इन वर्कओहलिक लोगों को अवश्य ही यह बात समझ आ गई होगी कि जिंदगी में काम ही सबकुछ नहीं होता। काम से इतर हमारी अपनी जिंदगी और अपना परिवार भी उतना ही अहमियत रखता है। इसलिए जरूरी है कि हम इनके लिए भी उतना ही वक्त निकालें।

ज्यादा काम करने की आदत करती है बीमार

दरअसल, एक वर्कओहलिक व्यक्ति हर वक्त खुद को काम में व्यस्त रखना चाहता है। उसकी यही आदत उसकी जिंदगी में कई समस्याओं को जन्म दे देती है। उसे बीमार कर देती है। कई बार तो अपनी इसी आदत की वजह से ऐसे वर्कओहलिक्स ऐसे भी काम और प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुट जाते हैं, जो बहुत अ​ह​म नहीं थे ​बल्कि उसी वक्त उनके परिवार को उससे कहीं ज्यादा उनकी जरूरत थी।

फिर काम की गुणवत्ता पर होता है असर

उनकी यही आदत धीरे-धीरे उनके अंदर किसी भी काम को बेहतर ढंग से करने में ​अक्षम कर देती है। ऐसे वर्कओहलिक्स अक्सर सह-कर्मचारियों की आंखों में भी खटकने लग जाते हैं। फिर एक वक्त आता है जब उनका इसी तरह से बहुत ज्यादा काम करना संस्थान को इस बात का एहसास कराने लग जाता है कि संबंधित कर्मचारी किसी भी काम को बहुत अच्छे से नहीं कर पा रहा। असल में, बहुत ज्यादा काम करने की उसकी आदत काम की उसकी गुणवत्ता पर भी असर डालने लगती है।
 

क्षमता से ज्यादा काम का बोझ लेना इसका कारण

इसके पीछे वजह यह होती है कि धीरे-धीरे वह अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा काम का बोझ लेना शुरू कर देता है, जिसका असर उसके काम पर नजर आने लगता है। ऐसे वर्कओहलिक लोगों के लिए तब एक ही रास्ता रह जाता है कि वह खुद को इन सबसे पीछे कर ले। एक बार फिर से सबकुछ नए सिरे से शुरू करने की कोशिश करे और आहिस्ते-आहिस्ते करे।

नींद आसानी से नहीं आने लगती

ऐसे वर्कओहलिक लोग अक्सर मानसिक समस्याओं के शिकार होने लग जाते हैं, जिसका असर उनकी नींद पर भी पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते सजग हो जाएं और इसका सही इलाज कराएं। धीरे-धीरे ऐसे लोगों को माइग्रेन की समस्या होने लगती है। नींद आसानी से नहीं आने लगती। उन्हें आंखों से जुड़ी समस्या का भी सामना करना पड़ता है। इसका असर कुछ समय बाद उनके मस्तिष्क के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है।

कहीं आप भी वर्कओहलिक तो नहीं! जांचने के लिए इन बातों पर गौर करें और खुद ही यह जांच लें कि आप वर्कओहलिक हैं या नहीं...

  • वर्कओहलिक लोग अक्सर किसी न किसी वजह से चिंतित रहते हैं।
  • वर्कओहलिक लोगों के लिए उनकी जिंदगी में सबसे जरूरी यानि नंबर वन प्रायोरिटी पर होता है, उनका काम।
  • वर्कओहलिक्स की कोई सोशल लाइफ यानि सामाजिक जिंदगी नहीं होती। उनके लिए तो बस काम ही सबकुछ हो जाता है।
  • ऐसे लोग किसी भी समस्या को कभी स्वीकार नहीं करते।
  • वे कभी खुश नहीं रहते।

ऐसे इंसान का करियर इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितना अच्छा काम करता है और कितनी मजबूती से काम के नियमों का पालन करता है। ज​बकि काम और परिवार के बीच सामंजस्य बिठाकर रखने वाला व्यक्ति ही जिंदगी को सफलता के साथ जीता है। ऐसे लोग काम और घर-परिवार को अलग-अलग रखते हैं। उन्हें कभी मिलाते नहीं।

आज का दिन रिलैक्स होकर गुजारें

आज के दिन कुछ समय अपनों के साथ रिलैक्स मूड के साथ गुजार कर देखें। अपने काम को कुछ शांत या स्लो कर लें। अगर हो सके तो खुद के लिए एक छुट्टी ही प्लान कर लें। फिर परिवार और खुद के साथ अपना पूरा दिन बिताएं। तभी सही मायनों में आप इस दिन की उपयोगिता को महसूस कर पाएंगे।

— सुषमाश्री, वरिष्ठ उप-संपादक, साक्षी समाचार

(सभी तस्वीरें : साभार सोशल मीडिया)

Advertisement
Back to Top