नये अंदाज़ और मस्ती के साथ कट रहा है 'लॉकडाउन', ये है अपना स्टाइल

 Enjoying 'Lockdown' with new style and fun, this is our style - Sakshi Samachar

भरती हूं देशप्रेम की भावना

अभाव में बेहतर जीवन जीना सिखा रहा है 'लाॅकडाउन'

क्या है 'लाॅकडाउन' के दिनों का डेली रूटीन

काॅलोनी में ही जमकर हो रही है मस्ती

पोस्टर चिपकाकर बताए कोरोना से बचाव के तरीके

रूटीन से हटकर क्या कर रहे हैं नया

कितनी बेहतर है सरकारी स्कूलों की नई शिक्षा प्रणाली

हैदराबाद : बड़े पैमाने पर 'लाॅकडाउन' का उल्लंघन कर कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी करने वाले लोग अगर देश में हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस 'लाॅकडाउन' का न केवल सख्ती से पालन किया हुआ है बल्कि गरीब और जरूरतमंदों की मदद का जिम्मा भी लगातार उठाया हुआ है। ऐसी ही एक 'कोरोना कमांडो' हैं, उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय, राजापुर में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को पढ़ाने वाली शिक्षिका अनुरागिनी सिंह। एक शिक्षक होने के साथ-साथ अनुरागिनी और भी बहुत कुछ हैं। वह 'भारत विकास परिषद', 'लायंस क्लब', 'एरा वेलफेयर एडुकेशनल सोसायटी' सहित स्कूल में ही संचालित एक स्वयंसेवी संस्था से भी जुड़ी हुई हैं। यही नहीं, इलाहाबाद या कहें कि प्रयागराज स्थित सिविल लाइंस के 'वृंदा विहार काॅलोनी' में रहने वाली अनुरागिनी 'नगर गाइड कैप्टन स्काउट गाइड एवं गार्ड' भी हैं। साथ ही साथ वह घर भी संभालती हैं।

भरती हूं देशप्रेम की भावना
इतना सब एक साथ कैसे मैनेज कर पाती हैं?, पूछने पर वह कहती हैं, "हो जाता है। अगर जज्बा हो और मन में उसे पूरा करने की चाह भी, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। सामान्य दिनों में घर के काम निपटाकर स्कूल और स्कूल के बाद 'नगर गाइड कैप्टन' के तौर पर पूरा ब्लाॅक संभालती हूं। लोगों में देशप्रेम की भावना भरती हूं। उनको विषम परिस्थितियों में भी कैसे कूकिंग या कोई भी काम किया जा सकता है, सिखाती हूं। अभाव में भी जिंदगी कैसे बेहतर अंदाज में जी सकते हैं, समझाती हूं। यूं समझ लीजिए कि लोगों के बीच पहुंचकर उनका सर्वांगीण विकास करने की कोशिश करती हूं। अच्छा लगता है। दिल को सुकून मिलता है कि इस तरह लोगों के दुख-सुख में भागीदार बनने का मौका मिल जाता है मुझे।"

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अभाव में बेहतर जीवन जीना सिखा रहा है 'लाॅकडाउन'
अनुरागिनी के लिए 'लाॅकडाउन' कुछ ऐसा ही समय है। वह कहती हैं, "लाॅकडाउन के दौरान अभाव में भी हमें खुश कैसे रहना है, यही सीखने की जरूरत है।" वह कहती हैं, "बेशक कोरोना के बढ़ते मामले हम सभी के लिए मुसीबत बन चुके हों, लेकिन अगर हमने 'लाॅकडाउन' और सोशल डिस्टेंसिंग का अच्छे से पालन किया होता तो ये मामले इस कदर नहीं बढ़ रहे होते। बहरहाल, अभी भी देर नहीं हुई। कहावत तो सुनी होगी, "जब जागो तभी सवेरा"। बेहतर होगा कि आप इस वक्त खुद को पूरी तरह से 'लाॅकडाउन' कर लें। परिवार के साथ वक़्त बिताएं। अनजान लोगों के बीच न तो जाएं और न ही उन्हें अपने पास आने दें। इसी में हम सभी की भलाई है।"

क्या है 'लाॅकडाउन' के दिनों का डेली रूटीन
'लाॅकडाउन' के इन दिनों को वह कैसे एंज्वाॅय कर रही हैं? पूछने पर अनुरागिनी कहती हैं, "इन दिनों नवरात्रि चल रहे हैं इसलिए ज्यादा समय तो पूजा-अर्चना में ही निकल जाता है। सुबह और शाम दो टाइम पूजा और आरती करने में दो-दो यानि चार घंटे का समय बीत जाता है। इसके अलावा बच्चों के साथ तीन घंटे खेल, व्यायाम और योग को देती हूं। डेढ़ घंटे बैडमिंटन खेलती हूं और बाकी के डेढ़ घंटे योग, एक्सरसाइज या कोई और गेम खेलने को। शाम की पूजा और आरती के बाद डिनर की तैयारी करते हैं। फिर पूरा ग्रुप मिलकर रामायण देखते हैं, अंताक्षरी खेलते हैं, डिनर एंज्वाॅय करते हैं। पिकनिक के दिनों की तरह रात कब बीत जाती है, पता ही नहीं लगता।"

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काॅलोनी में ही जमकर हो रही है मस्ती
'लाॅकडाउन' में तो घर से निकलना मना है। फिर आपका ग्रुप साथ मिलकर डिनर कैसे एंज्वाॅय कर पाता है? पूछने पर वह कहती हैं, "काॅलोनी में हम 12 लोगों का ग्रुप है। हमेशा से हम एक परिवार की तरह साथ मिलकर रहते हैं। सुख-दुख बांटते हैं। इस दौर में हमने काॅलोनी से बाहर निकलना बिल्कुल बंद कर दिया है। बाहर वालों के लिए हमारी काॅलोनी के दरवाजे भी बंद हैं। यानि अपनी काॅलोनी के अंदर हम सभी ने खुद को 'लाॅकडाउन' किया हुआ है। दरअसल, काॅलोनी में हम सभी एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं और 'लाॅकडाउन' के दौरान हम अपनी काॅलोनी के अंदर ही जमकर मस्ती कर रहे हैं।"

पोस्टर चिपकाकर बताए कोरोना से बचाव के तरीके
अनुरागिनी बताती हैं, "जैसे ही कोरोना ने हमारे देश में एंट्री की, मैंने काॅलोनी के बाहर की दीवार पर एक पोस्टर चिपकवा दिया, जिसमें लिखा था कि किस तरह से हमें सफाई का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही कोरोना से बचाव के तरीके भी उसमें बताए। इसके अलावा इन दिनों हर रोज हम कम से कम 100 लोगों का खाना तैयार कर रहे हैं और पुलिस के हाथों उसे जरूरतमंदों तक पहुंचा दिया जाता है। मेरे पति शिव शंकर सिंह (कंप्यूटर और केबल डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनेस करते हैं) हमेशा से ही जरूरतमंदों के लिए खाना पहुंचाने और बांटने का काम करते रहे हैं। हालांकि कोरोना लॉकडाउन की वजह से फिलहाल हम पुलिस तक इसे पहुंचा देते हैं। इसके अलावा गली-मोहल्ले में घूमने वाले जानवर, खासकर कुत्ते भूखे न रहें, इसके लिए हम रोटी और बिस्किट का इंतजाम करना भी नहीं भूलते।"

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रूटीन से हटकर क्या कर रहे हैं नया
रूटीन से अलग इन दिनों क्या कर रहे हैं? पूछने पर वह कहती हैं, "इन दिनों हम पुरानी अलबम्स से सारी तस्वीरें निकालकर उन्हें एक-एक करके स्कैन कर रहे हैं ताकि कंप्यूटर में इन्हें सुरक्षित रख सकें। (बेटी वैश्वी शंकर सिंह वकालत की पढाई कर रही है और बेटा विश्वेश आठवीं में है।) बच्चों ने इसके लिए बहुत मेहनत की है और अब हमारा काम लगभग पूरा हो चुका है। इन दिनों बच्चे भी घर पर ही हैं इसलिए हर रोज वे कोई न कोई नई डिश तैयार करना जरूर सीखते हैं। अब तक उन्होंने बर्गर, पिज्जा, पास्ता सहित कई भारतीय व्यंजन पकाना सीख लिया है।

कितनी बेहतर है सरकारी स्कूलों की नई शिक्षा प्रणाली
सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षित करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? सवाल के जवाब में विगत 14 वर्षों से बच्चों को विद्या का दान देने में जुटीं अनुरागिनी कहती हैं, "बहुत कुछ बदल गया है। अच्छा लगता है यह बदलाव देखकर। आज हर शिक्षक पूरे प्रशिक्षण और अनुभव के बाद ही बच्चों के बीच पहुंचता है। 'निष्ठा' ट्रेनिंग के जरिये हमें हर तरह से प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही, 'प्रेरणा' ऐप की सहायता से प्रोजेक्टर का इस्तेमाल करके बच्चों को कार्टून कैरेक्टर के माध्यम से पढ़ाने का अनुभव अलग ही है। न केवल बच्चे, बल्कि हम भी इस तरीके को एंज्वाॅय कर रहे हैं। खुशी होती है कि बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ाने की कला में हम माहिर हो रहे हैं।"

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- सुषमाश्री (वरिष्ठ उप-संपादक)

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