राहुल से माफी मांग कांग्रेस की खुशबू ने नई शिक्षा नीति की तारीफ की, पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने इसे कहा 'भ्रामक'

Congress leader Khushboo praised New Education system with Apologies - Sakshi Samachar

पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा को प्रमोट करना अच्छा कदम

स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक किए कई बड़े बदलाव

10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम

नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को एचआरडी विभाग का नाम बदलकर शिक्षा विभाग कर दिया। साथ ही, 34 साल बाद उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था और नीतियों में कई बदलाव भी किए। इन बदलावों को लेकर लोग अपनी अपनी राय रख रहे हैं। किसी को इसमें खामियां ज्यादा नजर आ रही हैं तो किसी को खूबियां। बहरहाल, यहां हम जानेंगे कि विपक्षी दलों में से मुख्य कांग्रेस पार्टी की नेता व अभिनेत्री खुशबू सुंदर और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शिक्षा नीति को लेकर क्या कहा...

खुशबू सुंदर ​ने किया स्वागत

फिल्म अभिनेत्री और कांग्रेस नेता खुशबू सुंदर ने इस शिक्षा नीति का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पार्टी लाइन के इतर जाने पर माफी भी मांगी है। खुशबू सुंदर ने ट्वीट कर कहा, 'नई शिक्षा नीति 2020 पर मेरा स्टैंड मेरी पार्टी से अलग है और मैं इसके लिए राहुल गांधी से माफी मांगती हूं। लेकिन मैं कठपुतली या रोबोट की तरह सिर हिलाने के बजाय तथ्यों पर बात करती हूं। अपने नेता से हम हर चीज पर सहमत नहीं हो सकते, लेकिन बतौर नागरिक बहादुरी से अपनी राय या विचार रख सकते हैं।'

खुशबू ने राहुल से माफी भी मांगी

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा कि राजनीति महज शोर मचाने के लिए नहीं है, इसके बारे में मिलकर साथ काम करना है और भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री कार्यालय को इसे समझना होगा। बतौर विपक्ष, हम इस पर विस्तार से देखेंगे और खामियों को इंगित करेंगे। भारत सरकार को नई शिक्षा नीति से जुड़ी खामियों को लेकर हर किसी को विश्वास में लेना चाहिए।

समस्याओं का समाधान जरूरी

नई शिक्षा नीति के बारे में अपने एक अन्य ट्वीट में खुशबू सुंदर ने कहा, 'मैं सकारात्मक पहलुओं को देखना पसंद करती हूं और नकारात्मक चीजों पर काम करती हूं। हमें समस्याओं के समाधान की पेशकश करनी है न कि केवल आवाज बुलंद करना है। विपक्ष का मतलब देश के भविष्य के लिए काम करना भी है।

बीजेपी में शामिल नहीं होने जा रही

खुशबु सुंदर ने यह भी कहा कि संघ से जुड़े लोग रिलेक्स हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आनन्दित नहीं होना चाहिए। मैं बीजेपी में नहीं जा रही हूं। मेरी राय मेरी पार्टी से अलग हो सकती है, लेकिन मैं खुद की सोच के साथ एक व्यक्ति हूं। हां, नई शिक्षा नीति में कुछ जगहों पर खामियां हैं, लेकिन मुझे अभी भी लगता है कि हम सकारात्मकता के साथ बदलाव को देख सकते हैं।

सिसोदिया ने इसे भ्रमित करने वाला बताया

वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) एक अत्यधिक विनियमित और कमजोर वित्त पोषित शैक्षिक मॉडल की सिफारिश करती है। उन्होंने कहा कि यह नीति या तो भ्रमित करती है या इसमें यह नहीं बताया गया है कि इसमें उल्लिखित सुधार कैसे किए जाएंगे। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने नई शिक्षा नीति को ‘‘प्रगतिशील दस्तावेज'' बताते हुए कहा कि इसमें मौजूदा शिक्षा प्रणाली की खामियों की पहचान की गई है, लेकिन यह पुरानी परंपराओं के दबाव से मुक्त नहीं हो पा रहा है। सिसोदिया ने कहा, ‘‘एनईपी एक प्रगतिशील दस्तावेज है लेकिन इसके कार्यान्वयन के लिए कोई रूपरेखा नहीं है।''

पुरानी परंपराओं से बाहर नहीं आ पाया

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र 34 वर्षों से एक नई शिक्षा नीति की प्रतीक्षा कर रहा था, जो अब आ चुकी है। यह एक दूरदर्शी दस्तावेज है, जो आज की शिक्षा प्रणाली की खामियों को स्वीकार करता है, लेकिन इसके साथ दो मुद्दे हैं- यह शिक्षा की पुरानी परंपराओं के दबाव से मुक्त होने में असमर्थ है और इसमें यह नहीं बताया गया है कि इन सुधारों को कैसे लागू किया जाएगा। नीति या तो इन मुद्दों पर चुप है या भ्रमित है।''

पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा को प्रमोट करना अच्छा कदम

उन्होंने कहा, ‘‘नीति एक अत्यधिक विनियमित और कमजोर वित्त पोषित शिक्षा मॉडल की सिफारिश करती है। यह नीति सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के सरकार के दायित्व से बचने का प्रयास है।'' उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पांचवी कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषाओं में मौलिक शिक्षण प्रदान करना एक प्रगतिशील कदम है। हम बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर ध्यान देने की बात का भी स्वागत करते हैं।'' दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने कहा, ‘‘अगर विश्वविद्यालयों में संयुक्त प्रवेश परीक्षाएं होने जा रही हैं, तो हमें बोर्ड परीक्षाओं की आवश्यकता क्यों है? पिछली चीजों को दोहराने की आवश्यकता क्या है? एक नीति, जो अब अगले कुछ दशकों तक लागू होने जा रही है, वह खेल-कूद की गतिविधियों पर पूरी तरह से मौन है।''

स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक किए कई बड़े बदलाव

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नयी शिक्षा नीति(एनईपी) को मंजूरी दे दी, जिसमें स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में खर्च को सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत करने तथा उच्च शिक्षा में साल 2035 तक सकल नामांकन दर 50 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम

नई नीति में बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर देते कहा गया है कि स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 की नई पाठयक्रम संरचना लागू की जाएगी, जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 साल की उम्र के बच्चों के लिए होगी। इसमें 3-6 साल के बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम के तहत लाने का प्रावधान है, जिसे विश्व स्तर पर बच्चे के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण चरण के रूप में मान्यता दी गई है। नीति में कम से कम ग्रेड 5 तक और उससे आगे भी मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा को ही शिक्षा का माध्यम रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

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