कोरोना की कौन सी वैक्सीन होगी सबसे ज्यादा असरदार, कौन सी होगी सबसे सस्ती..!

Which Corona Vaccine Will Be Most Effective And Price In India - Sakshi Samachar

एस्ट्राजेनेका वैक्सीन मरीजों 90 फीसदी प्रभावी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का वैक्सीन

अमेरिका की मॉडर्ना वैक्सीन

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) कोविड-19 (Covid 10) की वर्तमान स्थिति को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे है। साथ ही कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। 

यहां आप को बता दें कि भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना के  37,975 नए मामले सामने आए हैं। जिसके साथ ही देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 91,77,841 हो गए हैं। वहीं 480 नई मौतों के साथ मरने वालों का आंकड़ा 1,34,218 हो गया है। इससे पहले सोमवार की बात करें तो 24 घंटे में 44,059 मामले सामने आए थे। पिछले 24 घंटे में 42,314 नई रिकवरी के साथ 86,04,955 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लोगों की नजरें अब सिर्फ वैक्सीन पर ही टिकी हुई हैं। कई देशों में विभिन्न कोरोना वैक्सीन्स पर ट्रायल चल रहे हैं तो कई वैक्सीन्स ने तीसरे और अंतिम चरण के ट्रायल पूरे कर लिए हैं। अब जब जल्द ही कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध होने वाली है। इसी मद्देनजर कुछ टीकों पर बात करते हैं जिसके मरीजों पर असरदार होने का दावा किया गया है। 

एस्ट्राजेनेका वैक्सीन 

दवा बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका के युनाइटेड किंगडम और ब्राजील में हुए कोरोना वैक्सीन के परीक्षणों से ये पता चला है कि उसकी बनाई वैक्सीन कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए यह काफी असरदार है। वैक्सीन लगाने वाले किसी भी प्रतिभागी में कोई भी प्रतिकूल असर नहीं देखा गया। विश्लेषण में कुल 131 कोविड-19 मरीज शामिल थे।

एजेडडी 1222 की आधा खुराक 90 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई। इसके बाद कम से कम एक महीने बाद पूरी खुराक दी गई। एक अलग ट्रायल में एक महीने के अंतराल पर दो खुराक दी गई, जो 62 फीसदी तक कारगर साबित हुई। दोनों को साथ जोड़कर विश्लेषण करने पर पता चला कि ये वैक्सीन 70 फीसदी तक प्रभावी है। एक स्वतंत्र डेटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड ने तय किया कि इस विश्लेषण से साबित हुआ कि कोविड-19 से संक्रमण के 14 दिन तक दोनों तरह के खुराक देने से इस वायरस से सुरक्षा मिली। टीका से संबंधित कोई गंभीर खतरे की पुष्टि नहीं की गई है। 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किये जा रहे कोरोना के टीके के तीसरे चरण के परीक्षण के अंतरिम परिणाम सोमवार को प्रस्तुत किये गए जिसमें यह संक्रमण की रोकथाम में 'प्रभावी' पाया गया है। एस्ट्राजेनेका कंपनी की मदद से टीके का विकास किया जा रहा है। दो बार की खुराक के सामूहिक आंकड़ों को देखें तो टीके का प्रभाव 70.4 प्रतिशत देखा गया। वहीं दो अलग-अलग खुराकों में इसका प्रभाव एक बार 90 प्रतिशत और दूसरी बार 62 प्रतिशत रहा। शुरुआती संकेतों से लगता है कि यह टीका बिना लक्षण वाले संक्रमण के मामलों में वायरस के प्रसार को कम कर सकता है।

ऑक्सफोर्ड टीका समूह के निदेशक और परीक्षण के मुख्य अध्ययनकर्ता प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड के मुताबिक ये निष्कर्ष दिखाते हैं कि हमारे पास एक प्रभावी टीका है जो कई लोगों की जान बचाएगा। अच्ची बात यह है कि टीके की एक खुराक 90 प्रतिशत तक प्रभावी हो सकती है और इसका इस्तेमाल किया गया तो योजनाबद्ध आपूर्ति के साथ अधिक से अधिक लोगों को टीका दिया जा सकता है।

अमेरिका की मॉडर्ना वैक्सीन

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना द्वारा बनाई जा रही कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर इसी महीने एक अच्छी खबर मिली थी। कंपनी ने हाल ही में दावा किया था कि उसका टीका मजबूत सुरक्षा उपलब्ध कराता है और यह कोरोना वायरस के खिलाफ तीसरे और अंतिम चरण के ट्रायल में 94.5 फीसदी प्रभावी है। मॉडर्ना की वैक्सीन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में 30 दिन तक सुरक्षित रह सकती है। अगर इसे छह महीने तक रखना हो तो माइनस 20 डिग्री तापमान करना होगा। मॉडर्ना के सीईओ स्टीफेन बैन्सेल ने एक जर्मन अखबार को बताया है कि कंपनी को इस वर्ष के अंत तक टीके की दो करोड़ खुराक का उत्पादन करने की उम्मीद है और यूरोप को इस वर्ष तक यह कम मात्रा में ही उपलब्ध हो पाएगी। 

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फाइजर की कोरोना वैक्सीन

दुनियाभर के अरबों लोगों को कोरोना वायरस की जिन वैक्सीन्स का बेसब्री से इंतजार है, उनमें फाइजर एक है। फाइजर ने अपने कोरोना टीके के तीसरे और आखिरी चरण के ट्रायल के बाद जानकारी दी है कि वह 95 फीसदी प्रभावी है। अमेरिका की दवा कंपनी फाइजर और जर्मनी की उसकी साझेदार बायोएनटेक के बनाए कोरोना टीके की अनुमति के लिए बीते शुक्रवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) में आवेदन किया गया था। इसके लिए 10 दिसंबर को बैठक होनी है। टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमुख डॉक्टर मोनसेफ स्लाउ ने कहा कि मंजूरी मिलने के 24 घंटे के अंदर टीकों को टीकाकरण कार्यक्रम स्थलों तक पहुंचा देंगे और 11 या 12 दिसंबर से टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो जाएगा।  वहीं, फाइजर कंपनी के टीकाकरण में 21 दिन के अंतर पर टीकों की दो खुराकें सुई लगाकर दी जाएंगी।

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