सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली रूस के गुप्त ठिकानों की पोल, पुतिन ने यहां छिपाया तबाही का जखीरा, पर क्यों?

Satellite photos reveal the secret of Russia, Putin hidden Flood of destruction but why? - Sakshi Samachar

उत्‍तरी रूस का सबसे बड़ा हथियार ठिकाना

अत्‍याधुनिक सबमैरिन में लादी जाती हैं मिसाइलें

'पेंटागन' की तरह से दिखता है रूसी ठिकाना

नई दिल्ली : रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने मई 2012 में तीसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद आर्कटिक महासागर में नौसेना के विकास के लिए एक अहम आदेश पर हस्ताक्षर किया था। पुतिन के फैसले का नतीजा यह हुआ कि आठ साल बाद कोला प्रायद्वीप की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। उपग्रह से मिली तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है। 

उत्‍तरी रूस का सबसे बड़ा हथियार ठिकाना
गौरतलब है कि सेना का आधुनिकीकरण हमेशा से ही पुतिन के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा है। उन्होंने 2020 तक देश के 70 फीसदी हथियारों को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा था। पुतिन के उस आदेश को इस सप्ताह आठ साल पूरे होने जा रहे हैं। राष्ट्रपति की ओर से तय समय-सीमा भी बहुत करीब है। गूगल अर्थ सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि पुतिन के हुक्म की तामील हुई है। तस्वीरों से पता चलता है कि ओकोलनाया बे में न्यूक्लियर मिसाइलों की लोडिंग के लिए नई फैसिलिटी विकसित की गई है। यह जगह रूसी नौसेना के उत्तरी बेड़े के मुख्यालय और मुख्य अड्डे सेवरोमॉर्स्क के उस पार है। 

बता दें कि ओकोलनाया बे उत्तरी रूस का सबसे बड़ा हथियारों का डिपो है और यह 15 वर्ग किमी में फैला हुआ है। मई 2012 में पुतिन ने परमाणु पनडुब्बियों के बेड़े के लिए बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण का आदेश दिया था।

अत्‍याधुनिक सबमैरिन में लादी जाती हैं मिसाइलें

वर्ष 2012 में उपग्रह से ली गई गई तस्वीरों और पिछले साल गर्मियों में ली गई तस्वीरों में जमीन आसमान का फर्क है। आठ साल बाद वहां दुनिया से सबसे खतरनाक हथियारों की लोडिंग के लिए बन रहे ठिकाने का काम पूरा होने के करीब है। नए ठिकाने में बैलिस्टिक मिसाइलों को सीधे पनडुब्बी में चढ़ाने और उतारने के लिए एक बड़ी क्रेन लगाई गई है। यहां बोरेई श्रेणी की पनडुब्बियों में बुलावा मिसाइलों को रखा जा सकता है। साथ ही डेल्टा-चार श्रेणी की पनडुब्बियों को सिनेवा मिसाइलों से लैस किया जा सकता है। 

ज्ञात हो कि रूस के पास विमान, मिसाइल और समुद्र से परमाणु हथियार दागने की क्षमता है। दुनिया के कम ही देशों के पास यह क्षमता है। उत्तरी बेड़े के पास छह डेल्टा-4 और दो बोरेई एसएसबीएन पनडुब्बियां हैं, जो रूस की सामुद्रिक परमाणु क्षमता के लिए बेहद अहम है।

'पेंटागन' की तरह से दिखता है रूसी ठिकाना

रूस बोरेई श्रेणी की चार और पनडुब्बियां बना रहा है। इन्हें सेवरोदविंस्क के सेवमाश यार्ड में तैयार किया जा रहा है और माना जा रहा है कि इन्हें उत्तरी बेड़े में शामिल किया जाएगा। रूस ने ओकोलनाया बे में अपने हथियारों के जखीरे को रखने के लिए 50 बंकर बनाए हैं। इनमें क्रूज और बैलिस्टिक दोनों तरह की मिसाइलों को रखा जा सकता है। साथ ही वहां परमाणु हथियारों के लिए भी एक परिसर बनाया गया है। 

2013 में इसे बनाने का काम शुरू हुआ था जबकि पिछले साल ली गई तस्वीरों में यह बनकर तैयार हो चुका है। इस परिसर के पास मिसाइलों के लिए 80 मीटर लंबे चार स्टोरेज बंकर बनाए गए हैं। स्टोरेज एरिया करीब 13 वर्ग किमी में फैला है और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन की तरह दिखता है। रूस ने इस नौसैनिक ठिकाने पर भारी निवेश भी किया है।

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पुतिन ने बदल दी रूसी नौसेना की सूरत
रूस ने सोवियत संघ की गलतियों से काफी कुछ सीखा है। शीत युद्ध के दौरान उत्तरी बेड़े को 150 परमाणु पनडुब्बियां मिली थीं। यार्ड से निकलने के बाद उन्हें सीधे ड्यूटी पर भेज दिया जाता था। तब रूस के पास इन अत्याधुनिक पनडुब्बियों के रखरखाव की सुविधा नहीं थी। देश में मिसाइलों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए भी बुनियादी ढांचे की कमी थी।

लेकिन 2012 में पुतिन के आदेश के बाद नौसेना और रक्षा मंत्रालय ने चौथी पीढ़ी की पनडुब्बियों के लिए व्यापक पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विकास पर सहमति जताई। उत्तरी बेड़े के लिए बोरेई श्रेणी की पनडुब्बियां गादझियेवो में यासन श्रेणी की पनडुब्बियां जपडनाया लित्सा में रहेंगी।

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