अब कोरोना हुआ पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक, मास्क और सोशल डिस्टेंस से भी नहीं रुकेगा संक्रमण, जानिए क्या कहती है नई स्टडी

Now corona is more dangerous than before, mask and social distance can not stop infection: New Report - Sakshi Samachar

कोरोना वायरस म्यूटेट कर रहा है

सबसे बड़ी आनुवांशिक स्टडी

स्टडी MedRxiv जर्नल में प्रकाशित की गई

कोरोना का खौफ दिनोंदिन और भी खतरनाक होता जा रहा है। लोग जितना ही इसके वैक्सीन को लेकर अपना धैर्य खोते जा रहे हैं, कोरोना उतना ही ज्यादा भयंकर रूप लेता जा रहा है। एक बार फिर कोरोना पहले से भी ज्यादा रूद्र रूप लेकर आ गया है। इसे रोकने में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग भी कारगर नहीं रह गया है। नए शोध में इसका दावा किया गया है।

कोरोना वायरस म्यूटेट कर रहा है

एक्सपर्ट्स ने एक नई स्टडी के बाद कहा है कि कोरोना वायरस म्यूटेट कर रहा है यानी एक से दूसरे में खुद ही नया रूप और आकार तैयार करके फैल रहा है। और इसी के जरिए ज्यादातर नए केस सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि वायरस का नया रूप मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को भी मात दे सकता है।

सबसे बड़ी आनुवांशिक स्टडी

वॉशिंगटन पोस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक की सबसे बड़ी आनुवांशिक स्टडी में पता चला है कि अमेरिका के टेक्सास के ह्यूस्टन में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 99.9 फीसदी केस कोरोना के नए म्यूटेशन D614G वाले ही हैं।

यह स्टडी MedRxiv जर्नल में प्रकाशित की गई

कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन D614G को लेकर पहले भी जानकारी सामने आ चुकी है, लेकिन नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने नए म्यूटेशन के बारे में अतिरिक्त जानकारी दी है। पिछले दिनों 23 सितंबर 2020 को यह स्टडी MedRxiv जर्नल में प्रकाशित की गई है। नए म्यूटेशन को अधिक संक्रामक, लेकिन तुलनात्मक रूप से कम जानलेवा बताया गया है।

रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस ने नए माहौल में खुद को ढाल लिया है, जिससे यह सोशल डिस्टेंसिंग, हैंड वॉशिंग और मास्क को भी मात दे सकता है।

नया वायरस अधिक संक्रामक

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज के वायरोलॉजिस्ट डेविड मॉरेंस का कहना है कि नया वायरस अधिक संक्रामक हो सकता है, जिससे कोरोना को काबू करने के प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है।

स्टडी में बताया गया है कि कोरोना का नया म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन की संरचना में बदलाव करता है। रिसर्चर्स ने इस दौरान वायरस के कुल 5,085 सीक्वेंस की स्टडी की। इससे पता चला कि कोरोना की पहली लहर के दौरान मार्च में 71 फीसदी मामले नए म्यूटेशन वाले थे, लेकिन मई में दूसरी लहर के दौरान नए म्यूटेशन वाले केस की संख्या 99.9 फीसदी हो गई।

अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी और टेक्सास यूनिवर्सिटी की टीम को स्टडी के दौरान यह भी पता चला कि नए म्यूटेशन से संक्रमित लोगों में वायरल लोड अधिक होता है। इसकी वजह से ऐसे लोग अधिक संक्रमण फैला सकते हैं।

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