जानिए कोरोना वायरस आखिर क्यों है इतना जानलेवा ?

Covid-19 : Coronavirus is More Dangerous than Others - Sakshi Samachar

ऐसे करता है शरीर में प्रवेश

खत्म हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

क्यों होती है सांस लेने में परेशानी

जल्द नहीं दिखते हैं कोरोना के लक्षण  

पिछले कुछ महीनों से दुनियाभर के देशों में जानलेवा कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। नंगी आंखों से नहीं दिखने वाले इस जीवाणु की मार से विश्व के विकसित देशों से लेकर सभी परेशान हैं। इस महामारी की रोकथाम की दिशा में हर संभव एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। चिंता की बात यह भी है कि अभी तक इस जानलेवा वायरस की वैक्सिन नहीं बन पाई है। टीका तैयार करने के लिए शोध का काम जारी है, लेकिन यह कब तक बनकर तैयार होगी यह बताना मुश्किल है।

लाइफ सांइस के विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना की लाइफसाइकिल और उसके मनुष्य के शरीर में प्रवेश करने के बाद वह किस तरह अपना असर दिखाता है, इसकी पुष्टि होने के बाद ही उसकी सटीक वैक्सिन बन पाएगी। ऐसे में बाकी वायरस और कोरोना वायरस के फैलाव में अंतर के बारे में  और यह महामारी मुख्य रूप से वृद्धों पर ही अधिक असर दिखाने के कारणों पर एक नजर डालते हैं।

कैसे फैलता है यह वायरस

कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर मुंह से निकले वाली थूक से यह वायरस फैलता है, लेकिन उसके लक्षण उतनी जल्दी दिखाई नहीं देते। इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के करीब 14 दिन के बाद गले में दर्द, सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं। वास्तव में सभी प्रकार के वायरस पैरासाइट्स (दूसरों पर निर्भर) जीवाणु होते हैं। मनुष्य या जानवरों के शरीर में प्रवेश करने के बाद जानवारों की कोशिकाओं को खत्म कर उनके स्थान पर अपने कण विकसित कर लेते हैं और धीरे-धीरे कोशिकाओं की संख्या बढ़ती जाती है।

ऐसे करता है शरीर में प्रवेश

अब तक के शोध से पता चला है कि कोरोना आंगिटेनिस कन्वर्टिंग एंजाइम 2 (एस 2) नामक हर्मोन के चारों तरफ प्रोटीन की तरह बारीक परत बना लेता है और उसी के जरिए वह शरीर में प्रवेश कर जाता है। एस-2 नाडी व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। रक्तवाहिनी सिकुड़ कर रक्तचाप बढ़ा देता है।  आमतौर पर वायरस या बैक्टीरिया के  शरीर में प्रवेश करने के तुरंत बाद रोग प्रतिरोधिक व्यवस्था इसका पता लगाकर एंटी बॉडिज तैयार कर लेती है। लेकिन कोरोना वायरस का पता लगाने में इस व्यवस्था के विफल होने के कारणों का अभी तक पता लग पाया है।

खत्म हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो शरीर मे प्रवेश करने के तुरंत बाद ये वायरस सभी कोशिकाओं को खत्म कर अपने प्रजनन की व्यवस्था बेहतर बना लेता है और बड़ी संख्या में उसके डुप्लीकेट तैयार कर लेता है। इससे सभी कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति धीरे धीरे खत्म होती जाती है।  कोरोना वायरस मुख्य रूप से एस 2 की दवाइयां इस्तेमाल करने वाले यानि डायाबेटीज और बीपी के मरीजों पर अपना असर दिखाता है। उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों के साथ कोरोना के असर बढ़ जाने से खून की नलियों के सिकुड़ जाने की संभावना अधिक हो जाती है। ऐसे में ये पेशेंट्स के बहुत जल्द बीमार होने की पूरी संभावना है। 

क्यों होती है सांस लेने में परेशानी

जॉन्स होस्किन्स बे व्यू मेडिकल सेंटर के पल्मनॉलोजिस्ट पनागिस गालियसोट्रॉस का कहना है कि एस 2 एंजाइम्स हमारे शरीर के अधिकाशं हिस्सों में होते हैं। जुबान, गुर्दे, हॉर्ट, ईसोफेगस, इस तरह सभी में फैले होते हैं। इनका अधिक असर होने पर पेट दर्द, दस्त जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। चिंता की बात यह है कि अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील फेफडों की कोशिकाओं पर भी एस-2 एंजाइम बड़े फैमाने पर फैले होते हैं। सांस लेने और छोड़ने में उनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऐसे में कोरोना के कारण सांस लेने में परेशानी होती है। अधिक खांसी आना और फेफड़ों में इनफेक्शन (संक्रमण) जैसी समस्याएं आती हैं।

जल्द नहीं दिखते हैं कोरोना के लक्षण

अगर हम सार्स, मेर्स, कोरोना के फैलने में अंतर की बात करें, तो ' सार्स और मेर्सके लक्षण बहुत जल्द दिखाई देते हैं। इसलिए आसानी से उनका पता लगाकर उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। परंतु कोरोना के मामले में ऐसा नहीं है। इसके लक्षण दिखाई देने से पहले ही वह पूरे शरीर में तेजी से फैल जाता है। मशहूर माइक्रो बायोलॉजिस्ट एरिन सोर्सेल की मानें तो आमतौर पर युवाओं में रोग प्रतिरोधक शक्ति अधिक होने के मद्देनजर उनका इस महामारी की चपेट में आने की संभावना वृद्दों की तुलमा में कम होती है। कोरोना के लक्षणों का पता चलने तक उसका प्रभाव अधिक हो जाता है।

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कम समय में कोरोना के लक्षणों का पता लगाने की सुविधा नहीं होने के कारण ही दक्षिण कोरिया के एक मरीज ने मौत से पहले करीब 1100 लोगों में उसे फैला दिय। इसी लिए एक आदमी से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलने वाले इस वायरस के प्रति सभी को सावधानी बरतनी होगी। सोशल डिस्टेन्स बनाए रखते हुए खुद के साथ दूसरों को भी बचाना चाहिए।  इसी वजह से लॉक डाउन और इमरेज्न्सी जैसे फैसले जरूरी हैं।

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