पाकिस्तान में पीड़ित अहमदिया मुसलमान, हर स्तर पर किया जा रहा उत्पीड़न

UK Said Ahmadi Muslims In Pakistan Facing Persecution  - Sakshi Samachar

 पाकिस्तान के गठन में अहमदिया का रोल 

कौन है अहमदी

अहमदिया को लेकर संविधान में सोशोधन 

लाहौर : पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के साथ भेदभाव बदस्तुर जारी है। वे लोग अक्सर जुल्म व सितम के शिकार होते रहते हैं। हाल ही में कोरोना काल में अहमदिया मुसलमानों ने भूखे लाचार लोगों को राशन बांटा तो कट्टरपंथी राशन वापस लौटाने के लिए दबाव बनाने लगे। पाकिस्तान में हर स्तर पर उनका उत्पीड़न हो रहा है। यह बात ब्रिटेन के सर्वदलीय सांसदों के समूह ने अपनी 168 पन्नों की रिपोर्ट में कही है।

पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमानों की दशा पर तैयार यह रिपोर्ट उनके जीवन से जुड़े हर पहलू को छूती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस शांतिप्रिय समुदाय को भारत से बंटवारे के बाद किन मुश्किल हालातों से गुजरना पड़ रहा है। साथ ही कानून से अहमदिया विरोधी प्रावधानों को हटाने और समुदाय के लोगों को मतदान का अधिकार अविलंब दिए जाने की मांग की गई है।

 पाकिस्तान के गठन में अहमदिया का रोल 

बताया जाता है कि अहमदिया मुस्लिमों का पाकिस्तान के गठन में अहम योगदान रहा है। वो इसलिए कि वे सोचते थे कि पाकिस्तान बनने के बाद उन्हें ज्यादा सहूलियतें और रोजगार के मौके मिलेंगे। और हर धर्म को बराबरी का दर्जा हासिल होगा, लेकिन हो गया इसका उलटा। अब पाकिस्तान में सबसे ज्यादा पीडि़त समुदायों में कोई है तो वोअहमदिया मुस्लिमों का समुदाय है। इन्हें मुसलमान खासतौर पर पंजाबी, मुसलमान ही नहीं मानते और न ही इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देते हैं। 

अहमदिया विरोधी अभियान

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम राष्ट्र में अहमदिया को न तो शिक्षा हासिल हो रही है और न ही सरकारी नौकरी। कारोबार और प्राइवेट नौकरी में भी इनका उत्पीड़न होता है। 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के कार्यकाल में अहमदिया विरोधी अभियान को तब और मजबूती मिली-जब सरकार ने भी समुदाय के लोगों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार शुरू कर दिया। इसके लिए सरकार ने बाकायदा संविधान में संशोधन तक कर डाला।

अहमदिया मुसलमानों की मस्जिदों पर हमला

सांसदों की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सत्ता और कानून का दुरुपयोग था। इस समय में पाकिस्तान में अहमदिया विरोधी भावना और हिंसा अब तक के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंच चुकी है। रिपोर्ट में 28 मई, 2010 की घटनाओं का खासतौर पर उल्लेख किया गया है, जब कट्टरपंथियों की भीड़ ने लाहौर में अहमदिया मुसलमानों की दो मस्जिदों पर हमला किया और उनमें भारी तोड़फोड़ की। इन घटनाओं में 86 अहमदिया और एक ईसाई समुदाय के व्यक्ति की मौत हुई थी।  

अहमदिया को मुसलमान नहीं मानते पाकिस्तान 

पाकिस्तान की नजर में कादयानी, लाहौरी और अहमदी मुसलमान नहीं हैं। पाकिस्तान की करीब 95 फीसदी आबादी इस्लाम को मानती है, वहां के मुसलमान तीन धाराओं को मानते हैं। जिसमें सुन्नी, शिया और अहमदिया शामिल हैं। पाकिस्तानी हुकूमत और वहां के लोग अहमदिया समुदाय को पूरी तरह से खारिज करते हैं।  उनपर बेहिसाब अत्याचार हो रहा है।

अहमदिया को लेकर संविधान में सोशोधन 

दरअसल, 1970 के दशक में पाकिस्तान ने अहमदिया लोगों को ग़ैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया था। इसके साथ ही करीब 40 लाख आबादी वाला पाकिस्तान की ये आबादी सबसे बड़ा गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यक बन गया। 1982 में तो पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरनल जिया उल हक ने मुल्क की संविधान में बदलाव करते हुए अहमदियों पर कई तरह की रोक लगा दी। मसलन, अहमदी खुद को मुसलमान नहीं कह सकते। पैंगंबर मुहम्मद साहब की तौहीन की सजा मौत तय कर दी गयी। अहमदी समुदाय के लिए यहां तक की कब्रिस्तान अलग कर दिए गए। यहां तक कि पहले से दफनाई गयी लाशों को निकलवा दिया गया। यहां तक कि अहमदी समुदाय के लोगों के सलाम कहने पर भी जेलों में ठूंस दिया गया। पाकिस्तान में अहमदी खून के आंसू रो रहे हैं।

कौन है अहमदी

अहमदी समुदाय स्वयं को मुसलमान कहता है लेकिन मोहम्मद को आखिरी पैगंबर नहीं मानता। आम तौर पर इस्लाम में मोहम्मद को आखिरी पैगंबर माना जाता है। इस समुदाय के संस्थापक थे मिर्जा गुलाम अहमद। इनका जन्म साल 1835 में पंजाब के कादियान में हुआ। इसलिए इन्हें मानने वाले लोगों को अहमदी या कादियानी भी कहा जाता है। 

अहमदी समुदाय दुनिया के 209 देशों में फैला है। सबसे ज्यादा अहमदी मुसलमान, दक्षिण एशिया, इंडोनेशिया, पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका समेत कैरेबियाई देशों में फैले हैं। अधिकतर देशों में यह एक अल्पसंख्यक समुदाय है। 
 

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