भारत-चीन सीमा विवाद: 45 साल बाद एलएसी पर चली गोली, फिर एक बार दोहराई गई 15 जून की रात वाली घटना

Indo-China border dispute: Fired after 45 years on LAC, repeated the June 15th night scene - Sakshi Samachar

पैंगोग झील के दक्षिणी तट पर भारत मजबूत

भारतीय सेना ने मंगलवार को आरोपों को किया खारिज

दोहराई गई 15 जून वाली घटना

नई दिल्ली: अपनी आदत से बाज न आने वाला चीन किस हद तक गिर सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। बीते 15 जून की रात लद्दाख में इंडो-चाइना बॉर्डर पर जो हुआ, वह पूरा देश जानता है। इस घटना के बाद पहली बार रूस में जब रक्षा मं​त्री राजनाथ सिंह और उनके काउंटरपार्ट की बैठक हुई तभी से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या इसका असर दोनों देशों के बीच के तनाव को कुछ कम करने में हो सकेगा?

साक्षी समाचार ने तो इस पर पोल आयोजित करके पाठकों की राय भी मांगी थी। पोल से साफ हो गया था कि भारतीय जनता को चीन पर कतई भी भरोसा नहीं है। और हुआ भी वही। सोमवार 7 सितंबर की रात बॉर्डर पर एक बार फिर से 15 जून 2020 वाली घटना दोहराई गई। चीनी सैनिक हाथों में कील, कांटे और भाले लेकर पहुंच गए। लेकिन सोमवार को एक और बड़ी बात हो गई।

45 साल बाद भारत-चीनी सीमा विवाद को लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक बार गोलीबारी की घटना हुई। यह सोमवार 7 सितंबर 2020 की रात की घटना है। इससे पहले एलएसी पर गोली चलने की घटना 1975 में हुई थी। सूत्रों ने बताया कि भारतीय सैनिकों ने किसी आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल नहीं किया।

सूत्रों ने कहा कि चीन के सैनिकों का प्रयास भारतीय सेना को मुखपारी और रेजांग-ला क्षेत्रों में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों से हटाना था। सूत्रों ने कहा कि पीएलए की नजर पिछले तीन-चार दिनों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जे की है।

पैंगोग झील के दक्षिणी तट पर भारत मजबूत

सूत्रों ने बताया कि चीन के सैनिकों ने सोमवार शाम में एक लोहे की बाड़ को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसे भारतीय सैनिकों ने क्षेत्र में लगाया था। मोल्डो क्षेत्र स्थित प्रमुख चीनी संरचनाओं के सामने पैंगोंग झील क्षेत्र के दक्षिणी तट के आसपास रणनीतिक चोटियों पर भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

भारतीय सेना ने मंगलवार को आरोपों को किया खारिज

पीएलए ने सोमवार रात आरोप लगाया था कि भारतीय सैनिकों ने एलएसी पार की और पैंगोंग झील के पास ‘गोलीबारी की।' जबकि भारतीय सेना ने मंगलवार को इन आरोपों को खारिज किया।

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पूर्वी लद्दाख में रेजांग-ला रिजलाइन के मुखपारी स्थित एक भारतीय चौकी की ओर सोमवार शाम को बढ़ने का प्रयास करने वाले चीनी सैनिकों ने छड़, भाले, रॉड और धारदार हथियार ले रखे थे। यह बात सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को कही।

भारतीय सेना के जवानों ने दृढ़ता से उनका सामना किया

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव बढ़ने के बीच सूत्रों ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के लगभग 50-60 सैनिक शाम छह बजे के आसपास पैंगोंग झील क्षेत्र के दक्षिणी तट स्थित भारतीय चौकी की ओर बढ़े, लेकिन वहां तैनात भारतीय सेना के जवानों ने दृढ़ता से उनका सामना किया, जिससे उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

दोहराई गई 15 जून वाली घटना

उल्लेखनीय है कि चीन के सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़पों के दौरान पत्थरों, कील लगे डंडों, लोहे की छड़ों आदि से भारतीय सैनिकों पर बर्बर हमला किया था, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम भी चीन के सैनिक छड़, भाले, रॉड और धारदार हथियार ले रखे थे। जब भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को वापस जाने के लिए मजबूर किया, तो उन्होंने भारतीय सैनिकों को भयभीत करने के लिए हवा में 10-15 गोलियां चलाईं।

—भाषा

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