राहु-केतु ने किया राशि परिवर्तन, इनके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए करें ये खास उपाय

Rahu-Ketu transit do these special measures to avoid their ominous effects - Sakshi Samachar

राहु -केतु का राशि परिवर्तन 

अशुभ प्रभाव से बचाएंगे ये उपाय 

ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को पाप ग्रह माना गया है और इन दोनों को छाया ग्रह भी कहा जाता है। कहते हैं कि कलयुग में छाया ग्रह होने के बाद भी इन दोनों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। 

ऐसा है राहु और केतु का स्वभाव

राहु-केतु एक ही राक्षस के दो भाग हैं, जिसे समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुर्दशन चक्र से सिर और धड़ को अलग कर दिया था क्योंकि इस राक्षस ने मंथन के दौरान धोखे से अमृत पीने की कोशिश की थी, लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने भगवान विष्णु को इस बात की जानकारी दे दी थी। राहु-केतु पाप ग्रह होने के बाद भी शुभ फल प्रदान करते हैं। इसलिए ये मान लेना कि ये दोनों ग्रह हमेशा ही अशुभ फल प्रदान करते हैं, ऐसा नहीं है। जन्म के समय जन्म कुंडली में विराजमान ग्रहों की स्थिति पर राहु और केतु का फल निर्भर करता है।

राहु-केतु से बनते हैं ये दो खतरनाक योग

राहु- केतु से दो खतरनाक योगों का निर्माण होता है जिसमें एक है कालसर्प दोष और दूसरा है पितृ दोष। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में जब इन योगों का निर्माण होता है व्यक्ति का जीवन संकट और परेशानियों से भर जाता है। व्यक्ति को जॉब, व्यापार, शिक्षा और संतान से संबंधित परेशानी देने में इन दोनों ग्रहों का बहुत बड़ा योगदान होता है।

राहु-केतु ने किया राशि परिवर्तन 

राहु-केतु ने बुधवार, 23 सितंबर को क्रमश: वृषभ और वृश्चिक राशि में प्रवेश कर लिया है। राहु-केतु एक दूसरे से समसप्तक रहते हैं। ये पाप ग्रह एक साथ राशि परिवर्तन करते हैं। दोनों ग्रह अगले 18 महीने इन्हीं राशियों में रहने वाले हैं। इनका असर अलग-अलग राशियों पर अगले 18 महीनों तक बना रहेगा।

राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय ....

मेष- नियमित रूप से गणेश जी की उपासना करें। गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें। हर शनिवार कुत्तों को रोटी खिलाएं।

वृषभ- शिवलिंग पर नियमित जल अर्पित करें। नित्य प्रातः "नमः शिवाय" का जप करें। नियमित रूप से चन्दन की सुगंध लगाएं।

मिथुन- श्री हरि की उपासना करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। तुलसी की माला धारण करें।

कर्क- राहु के मंत्र का जप करें। मिश्रित धातु का छल्ला धारण करें। चन्दन का तिलक लगाएं।

सिंह- सूर्य को नित्य प्रातः जल अर्पित करें। केतु के मंत्र का जप करें। वाणी और स्वभाव पर नियंत्रण रखें।

कन्या- श्री हरि की उपासना करें। नारायण कवच का पाठ करें। नित्य प्रातः तुलसी दल ग्रहण करें।

तुला- शिव जी की उपासना करें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। मांस-मदिरा का प्रयोग बिलकुल बंद कर दें।

वृश्चिक- भगवान गणेश की पूजा करें। गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें। चन्दन की सुगंध लगाएं।

धनु- सूर्य को जल अर्पित करें। राहु मंत्र का जप करें। शनिवार को कुत्तों को रोटी खिलाएं।

मकर- चंद्र देव की पूजा करें। पूर्णिमा का उपवास रखें। स्वास्थ्य के मामले को न टालें।

कुम्भ- नित्य प्रातः शिवलिंग पर जल अर्पित करें। प्रातः और सायं शिव मंत्र का जप करें। खान पान में सात्विकता रखें।

मीन- राहु के मंत्र का जप करें। नियमित रूप से चंदन की सुगंध लगाएं। मिश्रित धातु का छल्ला धारण करें।

इसके अलावा कर सकते हैं ये उपाय 

- गाय की सेवा करें और गाय को हरा चरा खिलाएं।
- गलत संगत और गलत आदतों से दूर रहें।
- स्वच्छ रहें और घर में कूड़ा आदि जमा न रहने दें।
- अपने सहयोगियों से विनम्रता से पेश आएं, उनका ध्यान रखें।
- झूठ न बोलें और किसी को भी धोखा न दें।
-राहु-केतु के प्रभाव को कम करने के लिए नीले कपड़े में तिल बांधकर हनुमान जी को चढ़ाएं। इसके अलावा बूंदी के लड्डू पर 4 लौंग लगाकर हनुमानजी को भोग लगाएं। ऐसा करने से जीवन में राहुदोष कम होता है।

-घर के मुख्य कमरे में चांदी से बना हुआ हाथी रखें। ऐसा करने से आपके ऊपर से राहु-केतु पर प्रभाव कम होने लगता है।

 

Advertisement
Back to Top