World UFO Day 2020 : आज भी बरकरार है दुनिया में उड़न तश्तरी का रहस्य, जानिए क्या है यूएफओ

World UFO Day 2020 What is UFO How Celebrate This Day - Sakshi Samachar

दो जुलाई को हर साल मनाया जाता है वर्ल्ड यूएफओ डे

लोगों में यूएफओ या उड़न तश्तरी से जुड़े तथ्य पहुंचाना है लक्ष्य

भारत सहित दुनिया में कई बार आकाश में यूएफओ को देखे जाने का किया गया है दावा

आकाश में चमकती एक चीज जो वैज्ञानिकों से लेकर आम आदमी का ध्यान अचानक अपनी ओर खींच लेती है। उसके रहस्य आज भी इतने गहरे हैं कि दुनियाभर के साइंटिस्ट उस पर रिसर्च कर रहे हैं। वैज्ञानिक उसे अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट यानी यूएफओ कहते हैं और आम आदमी उड़न तश्तरी के नाम से जानते हैं। आखिर क्या है यूएफओ का रहस्य जिस पर आज भी रिसर्च जारी है। 2 जुलाई को दुनियाभर में वर्ल्ड यूएफओ डे मनाया जाता है। आइए जानते हैं उससे जुड़ी बेहद दिलचस्प जानकारी।

इतिहास को ध्यान में रखा जाए तो उड़न तश्तरी का उल्लेख जरूर मिलता है, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों की बात करें तो पिछले 50-60 सालों में यह ज्यादा नजर आए हैं। यूएफओ के अध्ययन को यूफोलॉजी कहा जाता है। इसका अध्ययन करने वाले दिन-रात एक करके आज भी उस रहस्य को पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उड़न तश्तरी की वास्तविकता क्या है। कई बार उल्का पिंड या चमकदार बादल को भी लोग यूएफओ का नाम दे देते हैं।

जानिए यूएफओ का इतिहास

इतिहासकारों का मानना है कि सबसे पहले जर्मनी में साल 1561 के आसपास उड़न तश्तरी देखी गई थी। जर्मनी के नूरेमबर्ग में यह घटना देखी गई थी। लोगों ने आसमान में एक बड़ी सी और अजीबो-गरीब प्लेट देखे जाने का दावा किया था। उस वक्त के प्राप्त चित्रों के आधार पर इस तथ्य की पुष्टि की जाती है। इसके बाद 1897 में टेक्सस में भी ऐसी ही एक चमकदार वस्तु आकाश में नजर आई थी, जिसमें बाद में विस्फोट हो गया था।

अमेरिका में 1947 में देखे गए यूएफओ !

अमेरिका में साल 1947 में लोगों ने दावा किया कि एक अजीब सा प्लेन जैसी किसी चीज का मलबा मिला है, जो दूसरे ग्रह का लग रहा है। लोगों ने दावा किया कि मलबे से जो शव निकाले गए वो एलियन के लग रहे थे। हालांकि अमेरिकी एयरफोर्स ने इस घटना का खंडन किया था।एक रिपोर्ट में कहा कि मलबा प्रयोग में लाए जा रहे सर्विलांस बैलूंस का था। जो ऐलियन के शव बताए जा रहे थे, वे वास्तव में डमीज थे। एयरफोर्स के इस बयान पर लोगों ने कहा कि सरकार यूएफओ और एलियन जैसे दूसरे ग्रह के राज छुपाना चाहती है।

भारत में भी उड़नतश्तरी देखे जाने का दावा

दिल्ली में एक फ्लाइिंग क्लब के 25 सदस्यों ने साल 1951 में दावा किया था कि आकाश में करीब 100 फुट लंबी एक आकृति देखी गई, जो सिगार के जैसे नजर आ रही थी। वह बेहद चमकदार थी, जो पलक झपकते ही आंखों के सामने से गायब हो गई। इसी तरह 29 अक्टूबर 2008 को पूर्वी कोलकाता में आसमान में तेजी से एक बड़ी चीज जाती दिखी। इसे एक हैंडीकैम से फिल्माया गया। अजीबोगरीब चीज से कई रंग निकलते दिखाई दिए। कई लोगों ने इसे देखा था।   

क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड यूएफओ डे

संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली बार व्यापक रूप से अज्ञात उड़नतश्तरी जैसी चीजें आसमान में मंडराती देखी गई। 2 जुलाई को 'यूएफओ डे मनाए जाने का फैसला किया गया। यूएफओ से जुड़ी तमाम जानकारी और इससे जुड़े तथ्यों को लोगों तक पहुंचाया जाए। साथ ही जागरुक भी किया जाए, यही इस दिन का लक्ष्य है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को जागरूक करके यह बताना है कि वे आसमान में दिखने वाली अनजान चीजों के बारे में जानकारी दें।

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