स्थापना दिवस विशेष : आज भी सबके मन मस्तिष्क में हलचल पैदा करते हैं संघर्ष व खुशी के पल

Telangana Formation Day Special By K Rajanna - Sakshi Samachar

तेलंगाना में स्थापना दिवस का जश्न

जय तेलंगाना, जय जय तेलंगाना

आज तेलंगाना का स्थापना दिवस है। तेलंगाना गठन के छह साल पूरे हो गए हैं। जब दशकों तक चले तेलंगाना आंदोलन का सपना 2 जून 2014 को साकार हुआ और तेलंगाना गठन की घोषणा होते ही छोटे से बच्चे से लेकर वयोवद्ध तक झूम उठे थे। प्रदेश ही नहीं, देश और विदेशों में बसे तेलंगाना के लोगों में एक नया उत्साह भर गया था कि अब उनको एक नयी पहचान मिली है। इसीलिए 2 जून तो जब राज्य की स्थापना दिवस की याद आती है तो लोगों का संघर्ष और राज्य बनने के बाद मिलने वाली खुशी  ताजा हो जाती है। 

पृथक तेलंगाना राज्य का गठन यहां के लोगों का एक सपना था। इसे साकार करने में अनेक लोगों के बलिदान हुए।  मुख्य रूप से छात्रों ने इसके लिए जो कुछ भी किया उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है। कहा जाता है कि तेलंगाना आज विकास के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में तेलंगाना हर क्षेत्र में विकास कर रहा है। तेलंगाना अनेक राज्यों और देश के लिए आदर्श बन गया है। ऐसे समय में तेलंगाना के लिए शहीद हुए अनेक युवक और केसीआर के अनशन के दृश्य आज भी सबके मन मस्तिष्क में हलचल पैदा करते हैं, जिनके जरिए राज्य को यह गौरव हासिल हो सका।

तेलंगाना के भीष्म पितामह
 
तेलंगाना आंदोलन को जीवित रखने में भीष्म पितामह प्रोफेसर जय शंकर अहम भूमिका रही है। ऐसा लगता यदि जय शंकर साहब नहीं होते तो तेलंगाना गठन नहीं होता। प्रोफेस जय शंकर जी ने तेलंगाना ते साथ हो रहे अन्याय के बारे में विस्तार से प्रचार प्रसार किया। उन्होंने तेलंगाना गठन की आवश्यकता बारे में गांव-गांव घूम कर प्रचार किया। जय शंकर के प्रचार से ही तेलंगाना की मांग जिंदा रह पाई। 

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केसीआर का इस्तीफा

इसी क्रम में 21 अप्रैल को तत्कालीन डिप्टी स्पीकर केसीआर ने अपने पद से इस्तीफा देकर तेलंगाना आंदोलन में कूद पड़े। इसके बाद केसीआर ने 27 अप्रैल को तेलंगाना स्थापना के लक्ष्य को लेकर तेलंगाना राष्ट्र समिति की स्थापना की।  17 मई को करीमनगर में आयोजित 'सिंह गर्जन' सभा में केसीआर ने अहिंसा पद्धति से तेलंगाना हासिल करने की घोषणा की। इसी क्रम में सितंबर में हुए सिद्दिपेट विधानसभा चुनाव में केसीआर की ऐतिहसिक जीत दर्ज हुई। इसके बाद तेलंगाना जो भी चुनाव हुए टीआरसी सबसे अधिक सीटों पर जीत दर्ज करते गई। इस तरह केसीआर अपनी व्यूह रचना में सफल होते हुए आगे बढ़ते गये।

तेलंगाना बना एजेंडा

साल 2004 में कांग्रेस पार्टी ने टीआरएस के साथ समझौता किया। तेलंगाना मुद्दा राष्ट्रीय एजेंडा बन गया। संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति के मुंह से तेलंगाना गठन की बात निकली। यह सुनकर पूरा तेलंगाना झूम उठा। तब से अनेक उतार-चढ़ाव के साथ तेलंगाना आंदोलन जारी रहा। 29 सितंबर 2009 को केसीआर ने आमरण अनशन शुरू किया। अनशन से तेलंगाना आंदोलन ने और उग्र रूप धारण किया। आखिर 9 दिसंबर को गृहमंत्री चिदंबरम ने रात 11 बजे तेलंगाना गठन की प्रक्रिया आरंभ करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने समैक्य आंध्रा आंदोलन तेज किया। आंदोलन को तेज होते हुए देख कांग्रेस ने तेलंगाना गठन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया। 

आंदोलन ही आंदोलन
 
यह देख तेलंगाना एक बार फिर तेलंगाना आंदोलन तेज हुआ। इस आंदोलन की कड़ी में- क्रमिक अनशन, वंटा वार्पु, मिलियन मार्च, तेलंगाना बंद, रास्ता रोको, रेल रोको जैसे आंदोलनों से तेलंगाना दहल उठा। आखिर चिदंबरम ने 9 दिसंबर को एक बार फिर तेलंगाना घोषणा के मुद्दे में पर परिवर्तन करते हुए विस्तार से चर्चा करने का ऐलान किया। 

श्रीकृष्ण कमेटी

इसी घोषणा के अंतर्गत 2 फरवरी 2010 में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज श्रीकृष्ण कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 30 दिसंबर 2010 को केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसी बीच अनेक उतार चढ़ाव आये। तेलंगाना गठन को लेकर कभी हां तो कभी ना जैसे अफवाहों से तेलंगाना के लोगों की नींद हराम हो गई थी। 

सार्वजनिक आंदोलन

इसी क्रम में 13 मार्च 2011 से तेलंगाना गठन की मांग के समर्थन में 'सकल जनुल सम्मे' (सार्वजनिक आंदोलन) आरंभ हुआ। यह आंदोलन 42 दिन तक चला। सार्वजनिक आंदोलन ने केंद्र को तेलंगाना गठन करने के लिए मजबूर किया। केंद्र सरकार की ओर से तैयार किये गये  तेलंगाना गठन संबंधित बिल की प्रति को राष्ट्रपति ने 12 दिसंबर 2013 को  विधानसभा के पास भेज दिया। मगर मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने 30 जनवरी 2014 को बिल का विरोध करते हुए प्रस्ताव को पारित कर केंद्र के पास भेज दिया। किरण कुमार रेड्डी के फैसले का तेलंगाना आंदोलन फिर तेज हुआ।

तेलंगाना बिल
 
इसके बाद 13 फरवरी 2014 को लोकसभा में तेलंगाना गठन बिल पेश किया। लोकसभा ने 18 फरवरी को तेलंगाना गठन के बिल को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने भी 20 फरवरी को इसकी मंजूरी दी। 1 मार्च को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तेलंगाना गठन के बिल पर मुहर लगा दी। 4 मार्च को तेलंगाना गठन के बिल का गजेट जारी हुआ। इस तरह एक लंबे संघर्ष और अनेक लोगों के त्याग से 2 जून को तेलंगाना गठन हुआ।

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