World Breastfeeding Week बच्चे के लिए भोजन, मां के लिए दवा का काम करता है स्तनपान

Special story on World Breastfeeding week 2020 and Its Main Intention - Sakshi Samachar

जन्म के पहले तीन दिन का पीला-गाढ़ा दूध (कोलॉस्ट्रम) पिलाना जरूरी

स्तनपान के दौरान मां के संपर्क में आते हैं शिशु की त्वचा में व्याप्त जीवाणु

स्तनपान पर पले बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता

विश्वभर में WHO द्वारा हर वर्ष 1 अगस्त से विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है और इसका मुख्य उद्देशय विश्वभर में महिलाओं को स्तनपान के महत्व से अवगत कराना और उसे बढ़ावा देना है। दरअसल, महिलाएं निरंतर बदलती जीवनशैली के साथ कामकाज में व्यस्त होने के कारण अपने बच्चों को स्तनपान करवाने के लिए वक्त नहीं निकल पा रही है।

महिलाओं को यह समझाने की आवश्यकता है कि एक शिशु के लिए मां का दूध अमृत होता है, जो बच्चों की पूरी जिन्दगी में कुपोषण, अतिसार जैसे रोगों से रक्षा प्रदान करता है। World breastfeeding week या विश्व स्तनपान दिवस को बढावा देकर दुनियभर में बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।

स्तनपान से शिशु और मां को होने वाले लाभ
1. एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 0-6 महीने की आयु में सिर्फ 38 फीसदी शिशु ही स्तनपान कर पाते हैं और जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने से नवजात शिशु मृत्युदर में करीब 20 फीसदी कमी लाई जा सकती है।

2. मुख्य रूप से जन्म के पहले तीन दिन का पीला-गाढ़ा दूध (कोलॉस्ट्रम) पिलाने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है, जिससे बच्चों में डायरिया/दस्त से मरने की संभावना करीब 11 बार कम होती है और निमोनिया से मरने की संभावना करीब 15 गुना कम हो जाती है। इसके अलावा एंटीबॉडी की मदद से बच्चा भविष्य में संक्रामक रोगों से सुरक्षित रहता है।

3. शिशु को स्तनपान कराने से मां का प्रसव के बाद होने वाले रक्त स्राव रुक जाता है, जिससे मां में खून की कमी होने का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, मां को माटापे की शिकायत भी नहीं होती।

4.एक स्टडी में यह भी खुलासा हुआ है कि  स्तनपान के दौरान शिशु की त्वचा में व्याप्त जीवाणु मां के संपर्क में आते हैं। इन हानिकारक जीवाणुओं के विरोध में विशेष एंटीबॉडी मां के शरीर में बनती है, जिन्हें मां दूध के माध्यम से शिशु को प्रदान करती है। 

5.ऊपरी दूध पिलाने से बच्चे को सही मात्रा में प्रोटीन, फैट्स, विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते, जिसकी वजह से बच्चे को एलर्जी जैसी समस्याओं का खतरा बना रहता है। मां के दूध पर पलने वाले शिशु इनसे सुरक्षित रहते हैं। 

6. बोतल व चम्मच से दूध पिलाने के विपरीत स्तनपान एक एक्टिव प्रोसेस है, जिसमें बच्चा अपने जोर से दूध खींचता है। इससे उसके जबड़े बेहतर विकसित होते हैं।

7. विभिन्न शोधों द्वारा सिद्ध हुआ है कि स्तनपान पर पले बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है। मां के दूध से उसे आवश्यक अमीनो एसिड्स, फैटी एसिड्स व पोषक तत्व मिलते हैं जिससे मानसिक विकास बेहतर होता है। याद रहे मनुष्य के मस्तिष्क का 90 प्रतिशत विकास पहले दो वर्ष में ही होता है। अत: इस महत्वपूर्ण समय को व्यर्थ न जाने दें।

8. ऊपरी दूध पर पले बच्चों में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व फूड एलर्जी की संभावना अधिक है। स्तनपान द्वारा इन रोगों से बच्चे को बचाया जा सकता है।

ऊपरी दूध पिलाने से होने वाले नुकसान
1. बच्चे को ऊपरी या बोतल का दूध पिलाने से जीवनभर संक्रामक रोगों की आशंका बनी रहती है।
2. ऊपरी दूध पिलाने से बच्चे को सही मात्रा में प्रोटीन, फैट, विटामिन व मिनरल नहीं मिल पाता। साथ ही बच्चे को जीवनभर एलर्जी का खतरा बना रहता है।
3.ऊपरी दूध पिलाने से बच्चे की मेंटल एबिलिटी के विकास में समस्या होती है।

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