चाइनीज ऑक्सीमीटर से सावधान, जानिए कोरोना संक्रमण में 12 दिनों का ख़तरा

Risk of Chinese Oximeter and 12 days life threat in Coronavirus - Sakshi Samachar

जानलेवा है चाइनीज ऑक्सीमीटर

कोरोना संक्रमण के दौरान 12 दिनों का खतरा

नई दिल्ली: आजकल कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर लोग परेशान हैं। संक्रमण के 12 दिनों के भीतर ऑक्सीजन लेवल के गिरने की चिकित्सक हिदायत देते हैं। जिसको देखते हुए लोग घरों में ऑक्सीमीटर रखने लगे हैं। आजकल मेड इन चाइना वाले ऑक्सीमीटर बाजार में खूब बिक रहे हैं। जिनको लेने से पहले तस्दीक कर लें कि ये सही रीडिंग दे रहे हैं या नहीं। वरना गलत ऑक्सीजन लेवल बताए जाने की स्थिति में आपको घबराहट का सामना करना पड़ेगा और दौड़ते भागते अस्पताल पहुंचने की नौबत आ सकती है। 

कैसे चुने सही ऑक्सीमीटर?

ऑक्सीमीटर लेते समय ध्यान रहे कि ये अच्छी प्रमाणिक कंपनी वाली ही हो। ऑक्सीमीटर घर लाने से पहले अस्पताल या फिर लैब में लेकर जांच करवा लें कि ये सही रीडिंग दे रहा है या नहीं। ऑक्सीमीटर के जरिए न सिर्फ आपके शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह की जांच होती है, बल्कि आपकी धड़कनों की रीडिंग भी आ जाती है। ऐसे में आपको लैब एक्सपर्ट ही बता सकते हैं कि रीडिंग सही आ रही है या नहीं। 

कोरोना संक्रमण में 12 दिनों का समय है अहम 

कोरोना संक्रमण काल में शुरुआत के 12 दिन काफी अहम माने जाते हैं। कई एक्सपर्ट्स की राय है कि तीसरे, छठे, नौवें और बारहवें दिन ऑक्सीजन लेवल गिरने या फिर और कोई शारीरिक दिक्कत होने की आशंका बनी रहती है। लिहाजा इन दिनों खास एहतियात बरतने की दरकार है। दिनों की गणना टेस्ट नतीजों के आने वाले दिन से नहीं, बल्कि पहली बार कोरोना के लक्षण आपमें जिस दिन से दिखे थे, उसी दिन से करनी है। 

कोरोना संक्रमण में ब्लड टेस्ट और चेस्ट स्कैन जरूरी

कोरोना संक्रमितों में अधिकांश में पाया गया है कि उनकी छाति में धब्बे या फिर पैचेज आ जाते हैं। अगर ये पैचेज विस्तृत हुए तो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यहां तक कि फाइब्रोसिस जैसे खतरनाक संक्रमण की आशंका बनी रहती है। फाइब्रोसिस की स्थिति में लंग्स में फंगस विकसित होता है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। फंगस के अधिक विकसित होने पर मरीज को बचा पाना काफी मुश्किल होता है। 

कोरोना संक्रमण की स्थिति में जांच जरूर कराएं

कई लोग कोरोना संक्रमण को मामूली बुखार बताकर हल्के अंदाज में लेते हैं। जबकि ऐसा करना घातक हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव आने के बाद खून के नमूनों की जांच से पता चलता है कि आपका DDimer कितना है। अगर ये 500 के लेवल से अधिक है मतलब आपके लिए मुश्किल हो सकती है। डीडाइमर अधिक होने की स्थिति में खून में थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ती है। जिसके चलते हार्ट अटैक की पूरी गुंजाइश होती है। अगर वक्त रहते आप चिकित्सक के संपर्क में आते हैं तो दवाई के जरिए खून की इस दिक्कत को सही किया जा सकता है। इसके अलावा लंग्स के संक्रमण को कम करने के लिए भी चिकित्सक कई दवाइयां चलाते हैं। 

संक्रमण के पहले तीन दिनों में क्या होता है?

कोरोना संक्रमण के पहले तीन दिनों में मरीज को कोई खास दिक्कत नहीं होती है। शुरुआत तेज बुखार से हो सकती है। इस दौरान शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। लिहाजा मरीज हंस बोल पाता है। वहीं तीसरे दिन उसकी परेशानी बढ़ सकती है। लिहाजा संक्रमण के तीन दिनों के भीतर चिकित्सक से जरूर संपर्क करें। 

संक्रमण के तीन से छह दिनों के भीतर का खतरा?

कोरोना संक्रमण के 3 दिनों के बाद कई तरह की शारिरक परेशानियां बढ़ती है। जिसमें कमजोरी महसूस होना और भूख नहीं लगना सबसे अहम है। हालांकि इस तरह की परेशानियों से कोई गंभीर खतरा नहीं होता है। यही वो मौका होता है जब आपको मानसिक तौर से खुद को मजबूत साबित करना है। मानसिक चि़ड़चिड़ापन आपके ऊपर हावी होने लगता है। आप मोबाइल या दोस्तों के जरिए जब कोरोना के खतरे के बारे में सुनते हैं तो घबराहट बढ़ने लगती है। ऐसे में खुद को संभालना आपकी अहम जिम्मेदारी बन जाती है। ताकि परिवार के लोग संयत रह सकें। 

अहम है 6ठा से 9वां दिन

कोरोना संक्रमण के छठे दिन के बाद से आपको भूख लगनी शुरू हो जाती है। 2-2 घंटे के अंतराल पर आप कुछ न कुछ लेते रहें। खासकर प्रोटीन जनित पदार्थ लेना जरूरी है। दूध हल्दी और दाल का पानी लेते रहना सेहत के लिए बेहतर हो सकता है। 6ठे दिन के बाद से आप खुद को चुस्त तो महसूस करेंगे लेकिन कोरोना संक्रमण आपके भीतर नुकसान करने की प्रक्रिया को चालू रखता है। लिहाजा ऑक्सीजन लेवल की ताकीद से जांच करते रहें। डॉक्टरों के मुताबिक 95 से नीचे ऑक्सीजन लेवल आने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। 

9-12 दिनों के बीच सावधानियां

आम तौर पर माना जाता है कि माइल्ड कोरोना संक्रमण आपको 9वें दिन के बाद परेशान नहीं करता है। अगर आपको कोरोना के अलावा बाकी परेशानियां जैसे हाई बीपी, हार्ट की समस्या, शुगर आदि है तो इस दरम्यान आपको अधिक सावधानी बरतनी होगी। इस दौरान आप चिकित्सक के संपर्क में रहें।

-विजय कुमार

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