रक्षाबंधन : जब एक मुस्लिम शासक ने रखी थी राखी की लाज, हिन्दू रानी की मदद कर इतिहास के पन्नों में हो गया अमर

raksha bandhan historical event humayun and karnavati  - Sakshi Samachar

रक्षा बंधन का पर्व होता है खास

मुस्लिम शासक ने रखी थी राखी की लाज

रक्षाबंधन : भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं। इसी दिन भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। ये एक ऐसा पर्व है जो हमें रिश्तों की अहमियत को समझाता है। यह पर्व बताता है कि, हमारी संस्कृति कितनी प्राचीन रही है तो वहीं यह खास पर्व सांस्कृतिक परंपराओं का संवाहक भी बना हुआ है।

देश में कितनी ही सदियों से इस पर्व की अहमियत को समझा गया, और राखी की लाज को निभाने के लिए जान की आहुति देने तक के किस्से आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। इस पर्व के जरिए आपसी सौहार्द कि मिसालें भी कम नहीं है। आज बात करते हैं एक मुस्लिम शासक की जिसने एक हिन्दू रानी की राखी की लाज रखी थी। क्या था पूरा मामला आइए जानते हैं। 

जब मुस्लिम शासक ने पिता के दुश्मन की पत्नी को माना था बहन

मेवाड़ साम्राज्य के राजा राणा सांगा और देश में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाले सम्राट बाबर की दुश्मनी के किस्से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। सन 1527 में खानवा के युद्ध में राणा सांगा के शरीर पर 80 घाव आए थे और उन्होने अपना बलिदान देश के लिए दे दिया था।  बाबर के बाद उनके बेटे हुमायूँ ने जब सत्ता की डोर संभाली थी तब उन्होने राणा सांगा की पत्नी को अपनी बहन मान कर पूरे भारत  में हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की थी। 

रानी कर्णावती ने हुमायूं को भेजी थी राखी

राणा सांगा की धर्मपत्नी रानी कर्णवती चित्तोाड़गढ़ में अपने अल्पवयस्क पुत्र विक्रमादित्य के संरक्षक की भूमिका निभा रही थीं। इसी वक्त गुजरात के शासक बहादुर शाह ने  मेवाड़ पर हमला किया था। परिस्थितियों को देखते हुए रानी कर्णावती ने तत्कालीन मुग़ल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी।

रानी कर्णावती समेत हजारों महिलाओं ने किया था जौहर

लेकिन हुमायूं जब तक मेवाड़ पहुंच पाता बहादुर शाह ने चित्तोड़ को घेर लिया था, रानी कर्णावती ने पूरी बहादुरी के साथ उसका सामना किया। लेकिन युद्ध में कमजोर पड़ने पर केसरिया वस्त्र पहन कर पुरुष जहां युद्ध में उतरे थे तो वहीं राजपूत औरतों ने जौहर कर लिया। 8 मार्च, 1535 को रानी कर्णावती ने 13000 महिलाओं के साथ आग में कूद कर जौहर कर लिया। 

हुमायूं ने निभाई थी राखी की लाज

बहादुर शाह ने चित्तौड़ को कब्जे में ले लिया था, हुमायूं जब अपनी सेना लेकर जब वहां पहुंचा तो बहादुरशाह ने उनका मुकाबला करने का दुस्साहस किया। जिसके बाद दोनों की सेनाओं के बीच भयानक संग्राम हुआ था। इस युद्ध में बहादुरशाह की पराजय हुई और हुमायूँ ने पूरा राज्य कर्णावती के बेटे विक्रमजीत सिंह को दे दिया था । हुमायूं भले ही परिस्थितियों के चलते समय पर नहीं पहुंच पाया हो, लेकिन उसने बहन की राखी की लाज रखी और अपने फर्ज को निभाया था। यही वजह है कि हुमायूं का ये किस्सा इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 

भले ही आज हम रिश्तों की अहमियत को भूलते जा रहे हों लेकिन समाज में रिश्तों का मान और मर्यादा रखने की परंपरा हमारे देश में सदियों से चली आ रही है। रक्षा बंधन के इस पर्व पर आप भी रिश्तों का मान रखिए। खुशियां बांटिए और हमेशा खुश रहिए। 

- विमल श्रीवास्तव, वरिष्ठ सब एडिटर, साक्षी समाचार 
 

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