'बाबर के नाम पर अयोध्या में मस्जिद न बने तो बेहतर', मुगल वंशज तुसी का अहम बयान

Prince Yakub Tusi against Babri Mosque construction in Ayodhya  - Sakshi Samachar

 'बाबर के नाम पर अयोध्या में मस्जिद बनाना सही नहीं'

मुगल वंशज प्रिंस याकूब तुसी का अहम बयान

हैदराबाद: अज़ीमो शान मुगलिया खानदान की विरासत अपने आप में बड़ी बात है। जिसे आगे बढ़ाने की मुकम्मल कोशिश में हैदराबाद के प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी लगे हुए हैं। 'साक्षी समाचार' ने तुसी से खास तौर पर अयोध्या मंदिर निर्माण को लेकर बात की। पहला सवाल ये पूछा, "कहीं आपको बुरा तो नहीं लगा राम मंदिर भूमि पूजन के लिए न्यौता नहीं भेजा गया? जबकि आप शुरुआत से ही राम मंदिर निर्माण के हिमायती रहे हैं।" 

जवाब में प्रिंस तुसी ने खुले मन से कहा कि हिंदू हो या मुसलमान दोनों ही वर्गों में एक तबका होता है, जो विवादों को हवा देने में माहिर होता है। वो कतई ऐसे तबके को मौका नहीं देना चाहते थे कि उनके नाम पर विवाद शुरू करें। लिहाजा उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं कि उन्हें राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। तुसी ने विश्वास के साथ कहा कि आने वाले समय में वे व्यक्तिगत तौर पर मंदिर निर्माण के दौरान अयोध्या जाएंगे। फिलहाल कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए ऐसा करना ठीक भी नहीं।  

दूसरी अहम बात कि प्रिंस तुसी ने वादा किया था कि मंदिर के लिए सोने की ईंट वो दान देंगे। उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय में उन्होंने प्रस्ताव दिया है। वहां से सकारात्मक जवाब मिलते ही वे पीएम मोदी को व्यक्तिगत तौर पर सोने की ईंट सौंप देंगे। प्रिंस तुसी ने पीएम मोदी के राम मंदिर को लेकर किये प्रयासों की सराहना की। साथ ही उम्मीद जाहिर की कि उन्हें प्रधानमंत्री मिलने का मौका जरूर देंगे। 

बाबर के नाम से मस्जिद न बने तो अच्छा

मंदिर पक्ष के बाद हमने प्रिंस तुसी से बाबरी मस्जिद का जिक्र छेड़ा। मसलन मस्जिद का काम कब शुरू होगा और उसमें उनकी क्या सहभागिता होगी? तुसी का बेबाक अंदाज बरकरार रहा। उन्होंने कहा कि अव्वल वे चाहते नहीं कि उनके पुरखे बाबर के नाम पर कोई मस्जिद बने। वास्तव में मस्जिद तो अल्लाह ताला की होनी है, इसमें बाबर का नाम न जोड़कर भविष्य में विवादों की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देना बेहतर है। मुगल वंशज प्रिंस तुसी ने जोर देकर कहा कि अयोध्या में मंदिर विध्वंस में खुद बाबर की कोई भूमिका नहीं थी। बल्कि ये बादशाह के प्रमुख कमांडर मीर बाकी की करतूत थी, जिसने स्याह इतिहास की लंबी फेरिस्त पैदा की और आज उसका पटाक्षेप हुआ है। 

तुसी की दलीलों को कई इतिहासकार भी सही मानते हैं। धार्मिक जानकार और पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल के मुताबिक वास्तव में मुगल बादशाह बाबर धर्म निरपेक्ष शासक थे। हिंदुओं के प्रति उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं थी। हिंदुओं के प्रति अगर बाबर के मन में कोई दुराव होता तो शायद वे अपनी सल्तनत हिंदुस्तान में नहीं खड़ी कर पाते।  

कौन था मीर बाकी?

मीर बाकी मुगल बादशाह बाबर का अहम कमांडर था जो मूल रूप से ताशकंद (मौजूदा समय में उज्बेकिस्तान) का रहने वाला था। ऐसे ऐतिहासिक तथ्य मिले हैं कि अयोध्या और उत्तर भारत के कई मंदिरों को ध्वस्त करने में मीर बाकी का ही हाथ था, जिसमें बाबर की सहमति नहीं थी। बाक़ी ने बादशाह बाबर को खुश करने के लिए ही राम मंदिर को ध्वस्त कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। अवध प्रदेश का शासक रहते हुए मीर बाकी ने कई मंदिरों को नेस्तनाबूद किया था। मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था, जो आधुनिक इतिहास में बड़े विवाद का कारण बनी। मुगल वंशज प्रिंस याकूब तुसी इसी विवाद को पूरी तरह खत्म करने के ख्वाहिशमंद हैं। उनका मानना है कि अगर अयोध्या में बाबर के नाम से मस्जिद बनाई गई तो आने वाले समय में नए तरह के विवाद का जन्म होगा। लिहाजा इस पूरे विवाद का ही पूर्ण पटाक्षेप किया जाना चाहिए।

तुसी का सोने की ईंट देने के पीछे मकसद 

अपने पुरखे बाबर को हालांकि मंदिर विध्वंस का दोषी प्रिंस तुसी नहीं मानते हैं। बावजूद इस बहुचर्चित कलंक की कालिख वो ईंट देकर कुछ हद तक पोंछने की कोशिश की बात करते हैं। कोरोना काल की मुश्किलों के चलते फिलहाल तुसी अयोध्या तो नहीं जा रहे हैं, लेकिन जल्दी ही वे कार्यक्रम बनाने की बात करते हैं। 

प्रिंस याकूब तुसी का फिलहाल कहां है ठिकाना 

हैदाराबाद के शम्शाबाद इलाके में फिलहाल प्रिंस तुसी रहते हैं। इससे पहले ओल्ड सिटी से सटे मकान में ही वर्षों से रहते आ रहे थे। हाल के दिनों में असामाजिक तत्वों की धमकियों के चलते भी वे सुर्खियों में रहे। तुसी खुद को मुगल वंश के संस्थापक बाबर और अंतिम शासक बहादुर शाह जफर की छठी पीढी के वंशज होने का दावा करते हैं। इस बारे में तुसी के पास कई दस्तावेज भी मौजूद है। प्रिंस तुसी हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति से भी खफा हैं। उनका मानना है कि अब कई मुद्दे सुलझे हैं और नफरत की बुनियाद पर राजनीति बंद होनी चाहिए। 

- विजय कुमार

Advertisement
Back to Top