कोरोना वायरस: रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी इन परेशानियों को न करें नजरअंदाज

Post Covid 19 complications Coronavirus in India - Sakshi Samachar

कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी रहें सजग

पोस्ट कोरोना परेशानियों के बारे में जानकारी

नई दिल्ली: हैदराबाद के कोरोना संक्रमित शख्स से हमने बात की। संक्रमण ठीक होने के दो महीने बाद भी वे डरे हुए थे। उनका मानना था कि हो सकता है आने वाले समय में वे किसी और शारीरिक मुश्किल में न फंस जाएं। हमने ऐसा होने की वजह पूछी तो उन्होंने अमेरिकी और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का हवाला दिया। जिसमें साफ लिखा था कि एक बार कोरोना से ठीक होने के बावजूद भी निश्चिंत नहीं रहा जा सकता। 

कोरोना संक्रमण से ठीक हुए कई लोगों में सांस संबंधी परेशानी देखने को मिली है। आश्चर्यजनक तौर पर उनका ऑक्सीजन लेवल नीचे जाता है और फेंफड़ों में संक्रमण या फिर खून में थक्का जमने की प्रवृत्ति शुरू हो जाती है। अगर समय रहते इन दिक्कतों का इलाज शुरू न किया जाय़ तो आदमी की जान भी जा सकती है। 

आप सबने एसपी बालासुब्रमण्यम का आखिरी शेयर किया हुआ वीडियो सुना होगा। जिसमें मशहूर गायक ने बताया कि वो पूरी तरह ठीक हैं और एक दो दिनों में अस्पताल से उनकी छुट्टी हो जाएगी। इसके बाद क्या हुआ सबको पता है। बाला सुब्रमण्यम काफी दिनों तक वेंटीलेटर पर रहे। उन्हें सांस संबंधी परेशानी हुई और वे इस दुनिया को अलविदा कह गए। 

एसपी बालासुब्रमण्यम की मौत ने कई लोगों को गंभीर चेतावनी दी है। खासकर जो लोग इस मुगालते में हैं कि एक बार कोरोना से जंग जीत ली तो फिर कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा नहीं होगा। अब तो मेडिकल साइंस ने भी मान लिया है कि कोरोना वायरस के लिए हड इम्युनिटी डेवलप तो होती है लेकिन कारगत चंद हफ्तों तक ही रहती है। 

कोरोना सेकंड अटैक के क्या लक्षण? 

इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हुए लोगों ने थकान, कमज़ोरी, साँस फूलना और ठीक से नींद नहीं आने जैसी परेशानियां बताई। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी इन परेशानियों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना की परेशानी झेलने के बाद निगेटिव आने पर कतई निश्चिंत न हों। अपनी सेहत पर गौर करें और लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें।

बुजुर्गों में सांस फूलने की समस्या अधिक 

मुहम्मद फैयाज हैदराबाद में अकेले रहते हैं। 68 साल की उम्र में उन्हें रोज ही दो मंजिल चढ़तक फ्लैट पर जाना होता है। फौज से रिटायर होने के बाद फैयाज ने मान लिया था कि उनकी तंदुरुस्ती के आगे कोरोना वायरस टिक न पाएगा। एक दिन सीढ़ियां चढ़ते अचानक उनके दम फूलने लगा। फैयाज ने टेस्ट कराया तो वे कोरोना संक्रमित पाये गए। इतना ही नहीं उनके फेफड़े भी संक्रमित हो रहे थे। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया और फैयाज की जान बच गई। 

कोरोना ठीक होने के बाद आता है गुस्सा

एक अन्य लक्षण में कोरोना से निजात पाये लोगों में गुस्सा बहुत अधिक देखा गया है। दरअसल कोरोना वायरस संक्रमित के शरीर के भीतर कई तरह के रासायनिक परिवर्तन होते हैं। जिसके चलते उन्हें गुस्सा अधिक आता है। 

कोरोना वायरस संक्रमण के बाद कुछ लोगों के डिप्रेशन में आने का मामला भी सामने आया है। लिहाजा बीमारी से निजात पाने के बाद आप अपने में होने वाले हरेक बदलाव पर गौर करें।

पोस्ट कोविड इलाज जरूरी है

कई डॉक्टरों का मानना है कि पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट जरूरी है। थकान, साँस लेने में परेशानी, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याओं को नजरअंदाज कतई नहीं करना चाहिए। कुछ मरीजों में स्वाद नहीं आने की समस्या काफी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा गले में ख़राश भी महीनों रह सकती है। 

जिस मरीज़ में कोविड का लोड जितना अधिक होता है उसके सेकंड अटैक का खतरा उतना ही अधिक होता है। कोविड के हल्के-फुल्के संक्रमण वालों को कमजोरी और मामूली परेशानियों से दो चार होना पड़ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक ठीक हुए कोरोना मरीजों में 30 से 35 प्रतिशत लोगों को बीमारी खत्म होने के बाद भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 
 

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