जानिए क्यों पंडित रवि शंकर को कहा जाता था विश्व संगीत का गॉडफादर

Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary - Sakshi Samachar

महान सितार वादक पंडित रवि शंकर का आज हुआ था जन्म

18 वर्ष की उम्र में उन्होंने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू किया

भारत रत्न और पद्मविभूषण से नवाजे गये पंडित रवि शंकर को तीन बार मिथा था ग्रैमी पुरस्कार 

भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व में फैलाने का श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वह हैं पंडित रवि शंकर। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को बनारस की गलियों से निकालकर दुनिया के पटल तक पहुंचाया और भारत की इस महान विरासत से परिचित कराया। महान सितार वादक पंडित रवि शंकर का जन्म सात अप्रैल 1920 को वाराणसी में हुआ था। आइए जानते हैं उस महान विभूति की जिंदगी से जुड़ी अहम बातें।

पंडित रवि शंकर का असली नाम रबिन्द्र शंकर चौधरी था। पिताजी श्याम शंकर चौधरी एक मशहूर वकील और राजनीतिज्ञ थे। माताजी का नाम हेमांगिनी देवी था। इनकी आरंभिक संगीत शिक्षा घर पर ही हुई। उस समय के प्रसिद्ध संगीतकार और गुरु उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां को इन्होंने अपना गुरु बनाया। 

बेहद कम ही लोग जानते हैं कि पंडित रवि शंकर को शुरुआती दिनों में नृत्य में दिलचस्पी थी, लेकिन 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू किया। उनके इस कौशल को निखारने में उनके बड़े भाई उदयशंकर ने अहम भूमिका निभाई थी। 

भारत में पंडित रवि शंकर ने पहला कार्यक्रम 1939 में दिया। इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ वह दशकों तक जारी रहा। हालांकि कुछ लोग उनके संगीत शुद्ध क्लासिकल संगीत नहीं मानते हैं।

पंडित रवि शंकर ने सत्यजीत रे की फिल्म "पाथेर पांचाली' से लेकर गुलजार से लेकर गुलजार की ‘मीरा’ और रिचर्ड एटनबरो की ऑल टाइम ग्रेट फिल्म ‘गांधी’ के अलावा कई विदेशी फिल्मों में भी संगीत दिया।

1949 से 1956 तक उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में बतौर संगीत निर्देशक काम किया। 1960 के बाद उन्होंने यूरोप के दौरे शुरु किये और येहूदी मेन्यूहिन व बिटल्स ग्रूप के जॉर्ज हैरिशन जैसे लोगों के साथ काम करके अपनी खास पहचान बनाई।

वीटल्स के जॉर्ज हैरीसन ने उन्हें 'विश्व संगीत का गॉडफादर' बताया। पंडित रवि शंकर को विदेशों  में ज्यादा ख्याति मिली थी। उन्होंने दुनिया के हर कोने में कंसर्ट किए हैं।  जाता है कि उन्होंने इंडियन क्लासिकल संगीत को वेस्टर्न क्लासिकल संगीत में मिक्स कर दिया था।

वह राज्य सभा के सदस्य भी थे। भारतीय संगीत को दुनिया भर में सम्मान दिलाने वाले भारत रत्न और पद्मविभूषण से नवाजे गये पंडित रवि शंकर को तीन बार ग्रैमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

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