नाथूराम गोडसे : जानिए रामचंद्र से नाथूराम बनने का पूरा किस्सा, कैसे रची थी बापू की हत्या की साजिश

Nathuram Godse Birthday Know About Nathuram Godse How Killed Mahatma Gandhi - Sakshi Samachar

नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था

नाक में नथ पहनने के कारण रामचंद्र से इसका नाम नाथूराम पड़ गया था

हैदराबाद : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे पर कई किताबें लिखी गई हैं। उन किताबों में नाथूराम से जुड़े अगल-अलग तथ्य सामने आए, लेकिन एक बात जो सभी में एक जैसी नजर आई वह है उसके अंदर बापू को लेकर नाराजगी। गोडसे का मानना था कि भारत विभाजन के समय महात्मा गांधी ने भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों के पक्ष का समर्थन किया था। जबकि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर अपनी आंखें मूंद ली थी। आज ही के दिन (19 मई 1910) नाथूराम का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं उससे जुड़ी कुछ खास बातें।

नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई 1910 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था। वह बचपन से ही कट्टर हिंदुत्ववादी सोच का बालक था, जो आगे चलकर पुणे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य बना। नाथूराम गोडसे के पिता विनायक वामनराव गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और माता लक्ष्मी गोडसे एक गृहणी थीं। 

कैसे नाम पड़ा नाथूराम

नाथूराम गोडसे के जन्म से पहले इसके माता-पिता के तीन पुत्र हुए थे, जिनकी कुछ ही दिन में मृत्यु हो गई। उनकी केवल एक पुत्री ही जीवित थी। इसलिये इसके माता-पिता ने बेटे के जीवन पर श्राप समझ कर ईश्वर से प्रार्थना की थी कि यदि अब कोई पुत्र हुआ तो उसका पालन-पोषण लड़की की तरह किया जायेगा। इसी मान्यता के कारण जब इसका जन्म हुआ तो इसकी नाक छिदवा दी गई। नाथूराम के बचपन का नाम रामचंद्र था, लेकिन नाक में नथ पहनने के कारण इसका नाम रामचंद्र से नाथूराम हो गया।

नाथूराम ने महात्मा गांधी को क्यों मारा

नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। गोडसे का मानना था कि भारत विभाजन के समय गांधी ने भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों के पक्ष का समर्थन किया था। जबकि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर अपनी आंखें मूंद ली थी। गोडसे ने नारायण आप्टे और 6 लोगों के साथ मिल कर इस हत्याकाण्ड की योजना बनाई थी। एक वर्ष से अधिक चले मुकद्दमे के बाद 8 नवम्बर 1949 को उसे मृत्युदण्ड दिया गया।

नाथूराम ने कैसे बनाई थी बापू को मारने की योजना

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में रोज की ही तरह चहल-पहल थी। शाम को पांच बजकर कुछ मिनट हुए थे, तभी महात्मा गांधी रोज की तरह बिड़ला हाउस के प्रार्थना स्थल पहुंचे। उनका एक हाथ आभा बेन तो दूसरा हाथ मनु बेन के कंधे पर था। उस दिन गांधीजी को वहां आने में थोड़ी देर हो गई थी। गांधीजी जब बिड़ला हाउस पहुंचे, तब उन्हें गुरबचन सिंह लेने आए। गांधीजी अंदर प्रार्थना स्थल की तरफ चले गए। गांधीजी ने फिर अपने दोनों हाथ जोड़े और भीड़ का अभिवादन किया। 

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तभी भीड़ में से एक व्यक्ति निकलकर गांधीजी के सामने आया। उसका नाम नाथूराम गोडसे था। नाथूराम ने दोनों हाथ जोड़ रखे थे और हाथों के बीच में रिवॉल्वर छिपा रखी थी। कुछ ही सेकंड में नाथूराम ने रिवॉल्वर तानी और एक के बाद एक तीन गोलियां गांधीजी पर चला दीं। गांधीजी के मुंह से 'हे राम...' निकला और वे जमीन पर गिर पड़े। 

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