कम हाईट वाली दर्जी की दोनों बेटियों ने क्लियर किया NEET, बनेंगी डॉक्टर

Low height tailor s daughter Zubaida and Humaira clear NEET  - Sakshi Samachar

मुंबई: दो बहनें जुबैदा (23) और हुमैरा (22) की ललक थी कि वो पढ़ लिखकर कुछ बेहतर करें। पिता दर्जी का काम करते हैं, लिहाजा परिवार की आर्थिक स्थिति खस्ता है। बड़ी बहन की हाईट 3.5 फीट और छोटी बहन की ऊंचाई महज 3.9 फीट है। कुल मिलाकर दोनों बहनों की ऊंचाई एक पांच साल के बच्चे के बराबर है। कॉलेज और पढ़ाई के सिलसिले में अक्सर लोकल ट्रेन पकड़नी होती थी, और लोग इन पर फब्तियां कसने से बाज नहीं आते थे। 

समाज के तानों से दोनों बहनों के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता था। वजह ये कि दोनों के सिर पर कुछ बनने का धुन सवार था। पैसों के अभाव में इन्हें लगा कि डॉक्टर बनने का सपना छोड़ना पड़ेगा। इसी बीच खिदमत चैरिटेबल ट्रस्ट के अशफाक मूओसा ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और आर्थिक मदद करते हुए इनके सपनों को जीवनदान दिया। पढ़ाई में ज़हीन दोनों बहनों ने कड़ी मेहनत की और NEET परीक्षा क्लियर की है। हुमैरा को मुंबई के टोपीवाला नायर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला है। जबकि जुबैदा ने जलगांव के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन लिया है। 

दोनों बहनों को कैसे मिली मदद? 

एक दिन दोनों बहनें दादी की दवाई लेने के लिए पास की डिस्पेंसरी गई थीं। वहीं उनकी समाजसेवी और खिदमत चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े अशफाक से मुलाकात हुई। अशफाक से बातचीत में लड़कियों ने बताया कि उनका सपना तो डॉक्टर बनने का है, लेकिन पैसों के अभाव में उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला ले लिया है। फिर अशफाक ने दोनों बहनों को NEET परीक्षा के लिए उत्साहित किया। दोनों बहनों ने घाटकोपर के एक कोचिंग में दाखिला लिया, इनके अभाव को देखते हुए फीस में 60 फीसदी की कटौती कर यहां इनका ऐडमिशन मिला था। 

दोनों बहनें NEET की तैयारी के दौरान रोजाना बाइकुला से घाटकोपर और वापस जाने के लिए लोकल ट्रेन से सफर करती थीं। इस बीच इन्हें घूरने वालों की भी कमी नहीं होती। कम हाईट के कारण तो कई बार अनजान भी ताना देकर निकल जाता था।

मां रुखसार को है बेटियों पर गर्व 
मां रुखसार अपनी बेटियों के संघर्ष को याद कर भावुक हो जाती हैं। वो बताती हैं कि पढ़ाई की धुन में बहनों को कई बार खाने पीने की भी सुध नहीं रहती थी। रुखसार ने बताया कि 5 साल की उम्र के बाद से ही दोनों बेटियों की हाईट बढ़नी बंद हो गई थी। डॉक्टर से दिखाने पर उन्होंने 11 लाख रुपए का खर्चा बताया। गरीबी के कारण माता-पिता इलाज करा नहीं सके थे। वहीं बेटियां इस कदर होनहार निकलीं कि उन्होंने जमाने को भी अपनी मेहनत के दम पर झुका दिया। 

Advertisement
Back to Top