जयंती विशेष : काका हाथरसी ने हास्य को साहित्य में दिलाई अलग पहचान

Know About Kaka Hathrasi Best Hasya Poem On His Birth Anniversary - Sakshi Samachar

हिंदी हास्य व्यंग काव्य का परचम फहराने वाले श्रेष्ठ व्यंगकार व हास्य सम्राट ‘काका हाथरसी’ का आज जन्मदिन है।  हाथरस नगर के जैन गली मोहल्ले में एक अग्रवाल परिवार में 18 सितंबर 1906 को जन्मे काका हाथरसी ने हिंदी हास्य कवि के रूप तो अपनी ख्याति अर्जित की ही, साथ ही अपनी प्रतिभा से विश्व में हिंदी की पताका फहराई और अपने हाथरस का नाम भी विश्व में रोशन किया। 18 सितंबर को 1995 को उनका निधन हो गया। 

1985 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 'पद्मश्री' की उपाधि से नवाजा। काका ने फ़िल्म 'जमुना किनारे' में अभिनय भी किया था। काका हाथरसी के नाम पर ही कवियों के लिये 'काका हाथरसी पुरस्कार' और संगीत के क्षेत्र में 'काका हाथरसी संगीत' सम्मान भी आरम्भ किये गये। आइए उनके जन्मदिन पर पढ़ते हैं हास्य और व्यंग कविता..... 

प्रकृति बदलती क्षण-क्षण देखो,
बदल रहे अणु, कण-कण देखो
तुम निष्क्रिय से पड़े हुए हो 
भाग्य वाद पर अड़े हुए हो।

छोड़ो मित्र ! पुरानी डफली,
जीवन में परिवर्तन लाओ 
परंपरा से ऊंचे उठ कर,
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ।

जब तक घर मे धन संपति हो,
बने रहो प्रिय आज्ञाकारी 
पढ़ो, लिखो, शादी करवा लो,
फिर मानो यह बात हमारी।

माता पिता से काट कनेक्शन,
अपना दड़बा अलग बसाओ 
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ।

करो प्रार्थना, हे प्रभु हमको,
पैसे की है सख़्त ज़रूरत ।
अर्थ समस्या हल हो जाए, 
शीघ्र निकालो ऐसी सूरत।

हिन्दी के हिमायती बन कर,
संस्थाओं से नेह जोड़िये
किंतु आपसी बातचीत में,
अंग्रेजी की टांग तोड़िये।

इसे प्रयोगवाद कहते हैं,
समझो गहराई में जाओ 
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ।

कवि बनने की इच्छा हो तो,
यह भी कला बहुत मामूली 
नुस्खा बतलाता हूँ, लिख लो,
कविता क्या है, गाजर मूली।

कोश खोल कर रख लो आगे, 
क्लिष्ट शब्द उसमें से चुन लो
उन शब्दों का जाल बिछा कर,
चाहो जैसी कविता बुन लो।

श्रोता जिसका अर्थ समझ लें,
वह तो तुकबंदी है भाई।
जिसे स्वयं कवि समझ न पाए, 
वह कविता है सबसे हाई।

इसी युक्ति से बनो महाकवि,
उसे "नई कविता" बतलाओ
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ।

चलते चलते मेन रोड पर,
फिल्मी गाने गा सकते हो 
चौराहे पर खड़े खड़े तुम, 
चाट पकौड़ी खा सकते हो

बढ़े चलो उन्नति के पथ पर,
रोक सके किस का बल बूता?
यों प्रसिद्ध हो जाओ जैसे, 
भारत में बाटा का जूता।

नई सभ्यता, नई संस्कृति,
के नित चमत्कार दिखलाओ 
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ। 

पिकनिक का जब मूड बने तो,
ताजमहल पर जा सकते हो 
शरद-पूर्णिमा दिखलाने को,
'उन्हें' साथ ले जा सकते हो।

वे देखें जिस समय चंद्रमा,
तब तुम निरखो सुघर चाँदनी 
फिर दोनों मिल कर के गाओ, 
मधुर स्वरों में मधुर रागिनी।
( तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी
..)

आलू छोला, कोका-कोला, 
'उनका' भोग लगा कर पाओ 
कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ।

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