जब आम तोड़ रही हीराबाई पर पड़ी औरंगजेब की तिरछी नजर, इश्क में हुआ गिरफ्तार

Intresting Facts About Aurangzeb On His Birth Anniversary - Sakshi Samachar

साहित्य से था औरंगजेब को लगाव

हीराबाई की खूबसूरती पर मर मिटे 

औरंगजेब के इस व्यवहार से सब थे हैरान  

हैदराबाद : मुग़ल बादशाहों में सिर्फ एक शख्स भारतीय जनमानस के बीच जगह बनाने में असफल रहा। वो था औरंगजेब। दरअसल, आम लोगों के बीच औरंगजेब की छवि हिंदुओं से नफरत करने वाले धार्मिक उन्माद से भरे कट्टरपंथी बादशाह की है जिसने अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अपने बड़े भाई दारा शिकोह को भी नहीं बख्शा। लेकिन यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि वो भी प्यार में बुरी तरह से एक बार ही नहीं, दो बार गिरफ्तार हुआ था। इसका जिक्र किताबों में भी मिलता है। 

आप को बताते चलें कि औरंगजेब ने 15 करोड़ लोगों पर करीब 49 सालों तक राज किया। उनके शासन के दौरान मुगल साम्राज्य इतना फैला कि पहली बार उन्होंने करीब करीब पूरे उपमहाद्वीप को अपने साम्राज्य का हिस्सा बना लिया। आज औरंगजेब का जन्मदिन है। इस अवसर पर उससे जुड़ी खास बातों को साझा करने की कोशिश करते हैं।

साहित्य से था औरंगजेब को लगाव

औरंगजेब का जन्म 3 नवंबर1618 को दोहाद में अपने दादा जहांगीर के शासनकाल में हुआ था। वो शाहजहां के तीसरे बेटे थे। उनके चार बेटे थे और इन सभी की मां मुमताज़ महल थीं। औरंगजेब ने इस्लामी धार्मिक साहित्य पढ़ने के अलावा तुर्की साहित्य भी पढ़ा और हस्तलिपि विद्या में महारत हासिल की। औरंगजेब और मुगल बादशाहों की तरह बचपन से ही धाराप्रवाह हिंदी बोलते थे। 

हीराबाई की खूबसूरती पर मर मिटे 

इतिहासकार कैथरीन ब्राउन अपने एक लेख 'डिड औरंगज़ेब बैन म्यूज़िक' में लिखती हैं कि औरंगजेब अपनी मौसी से मिलने बुरहानपुर गए थे, जहां हीराबाई जैनाबादी को देख कर उनका उन पर दिल आ गया। हीराबाई एक गायिका और नर्तकी थी, जो बेइंतिहा खूबसूरत थी। औरंगजेब ने उन्हें एक पेड़ से आम तोड़ते देखा और उनके दीवाने हो गए। उसके नाजो-अदा, अप्रतिम सुंदरता और गाने-गुनगुनाने के साथ बेतकल्लुफ अंदाज ने औरंगजेब का ध्यान उसकी ओर खींचा। औरंगजेब अनायास उस पर मोहित हो गया। 

औरंगजेब के इस व्यवहार से सब थे हैरान  

कहा जाता है कि औरंगजेब को जो भी जानते थे, वो उसके इस व्यवहार पर चकित और हैरान थे। किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि औरंगजेब अपने मिजाज के खिलाफ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। कहा जा सकता है कि जैनाबादी से मुलाकात ने उसे नया उत्साह दे दिया था। 

औरंगजेब को शराब पीने के लिए कर दिया मजबूर 

इश्क इस हद तक परवान चढ़ा कि कभी न शराब पीने की अपनी कसम तोड़ने के लिए तैयार हो गए थे। कहा जाता है कि एक दिन हीराबाई ने मदिरा का प्याला औरंगजेब के हाथों में दिया और पीने का निवेदन किया। औरंगजेब जितनी मजबूती से इसको मना करता, वो उतने ही प्यार से निवेदन करती। वह उसको अपनी अदाओं से रिझाती। कसमें खिलाती और प्यार का वास्ता देती। बाद में उसने औरंगजेब को डिगा ही दिया। और जब औरंगजेब शराब का घूंट लेने ही वाले थे तो हीराबाई ने उन्हें रोक दिया। उसने कहा मेरा उद्देश्य बस तुम्हारे प्रेम की परीक्षा लेने का था। 

एक साल बाद ही हो गई हीराबाई की मौत

कहा जाता है कि औरंगजेब उसके प्यार में डूबता ही चला गया। उसकी हर शाम और खाली वक्त  हीराबाई के साथ ही गुजरता। दुर्भाग्य से औरंगजेब को जब वो सत्ता संघर्ष के लिए मानसिक और मनोवैज्ञानिक तौर पर तैयार करती, तभी 1654 में उसकी मृत्यु हो गई। इसके साथ ही इस प्रेम कहानी का अंत हो गया। हीराबाई को औरंगाबाद में दफनाया गया। 

दिल्ली छोड़ कर दक्षिण भारत चले गए

औरंगजेब 1679 में दिल्ली छोड़ कर दक्षिण भारत चले गए और अपनी मृत्यु तक दोबारा कभी उत्तर भारत नहीं लौटे। उनके साथ हजारों लोगों का काफिला भी दक्षिण गया जिसमें शहज़ादा अकबर को छोड़ कर उनके सभी बेटे और उनकी पूरा हरेम भी शामिल था। कहा जाता है कि उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली एक भुतहा शहर जैसा दिखाई देने लगा और लाल किले के कमरों में इतनी धूल चढ़ गई कि विदेशी मेहमानों को उसे दिखाने से बचा जाने लगा। 

आमों की कमी होती थी महसूस 

औरंगजेब अपनी किताब 'रुकात-ए-आलमगीरी', जिसका अनुवाद जमशीद बिलिमोरिया ने किया है, में लिखते हैं कि दक्षिण में उन्हें सबसे ज़्यादा कमी महसूस होती थी आमों की। बाबर से लेकर सभी मुगल बादशाह आमों के बहुत शौकीन थे। औरंगजेब अपने दरबारियों से अक्सर फरमाइश करते थे कि उन्हें उत्तर भारत के आम भेजे जांए। उन्होंने कुछ आमों के सुधारस और रसनाबिलास जैसे हिंदी नाम भी रखे। 

अपने आखिरी दिनों में औरंगजेब अपने सबसे छोटे बेटे कामबख़्श की मां उदयपुरी के साथ रहे जो कि एक गानेवाली थी। अपनी मृत्युशय्या से कामबख़्श को एक पत्र में औरंगज़ेब ने लिखा कि उनकी बीमारी में उदयपुरी उनके साथ रह रही हैं और उनकी मौत में भी उनके साथ होंगीं। औरंगजेब की मौत के कुछ महीनों बाद ही 1707 की गर्मियों में उदयपुरी का भी निधन हो गया।

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