जानिए क्या है भारत की 'वर्चुअल डिप्लोमेसी', जिसने आपदा को अवसर में बदला

Indian Virtual Diplomacy During Coronavirus Pandemic - Sakshi Samachar

भारत ने अपनाई वर्चुअल डिप्लोमेसी

पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने का तरीका

भारत 'पड़ोसी प्रथम' और 'एक्ट ईस्ट' की नीति' पर

नई दिल्ली : कोरोना संकट के दौर में जब दुनिया ठहर गई थी, लोग घरों में बंद थे और सरकारें तबाही रोकने की कोशिश कर रही थीं, उस वक्त भारत ने आपदा को अवसर में बदलने का संदेश दिया। भारत कोविड-19 के साथ-साथ उन देशों के खिलाफ भी मजबूती से लड़ रहा था, जो इस संकट की घड़ी में देश को अस्थिर करना चाहते थे। इसके अलावा भारत अपने मित्र देशों से रिश्ते मजबूत भी कर रहा था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के पिछले कई महीने के कामकाज को देखें तो, इस बात की पुष्टि होती है कि भारत 'पड़ोसी प्रथम' और 'एक्ट ईस्ट' की नीति' पर चलते हुए सार्क देशों और म्यांमार से अपने संबंधों को और प्रगाढ़ कर रहा है। जिसमें भारत की तरफ से अपनाई जा रही 'वर्चुअल डिप्लोमेसी' सामने आई है। जो भारत और उसके मित्र देशों के संबंधों को कोरोना काल में एक नए मंच के रूप में आगे ले जाने का काम कर रही है।

पड़ोसी देशों में स्थित भारतीय राजनयिक मिशन 'आपदा को अवसर' बदलते हुए अपने पड़ोसियों से संबंधों को प्रगाढ़ करने में लगे हुए हैं। जिसका नतीजा है कि संयुक्त परामर्श आयोग (जेसीससी), दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के मंत्रियों की परिषद की अनौपचारिक बैठक और भारत-श्रीलंका के बीच वर्चुअल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन हो पाया। यही नहीं थलसेना प्रमुख (सीओएएस), जनरल एमएम नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने इस दौरान म्यांमार का दौरा भी किया। 

सार्क देशों के मंत्रियों की परिषद की अनौपचारिक बैठक

24 सितम्बर 2020 को आयोजित हुई इस बैठक में कोविड-19 महामारी से निपटने के क्षेत्रीय प्रयासों की समीक्षा की गई। बैठक में प्रतिभागियों ने महामारी का मुकाबला करने के लिए भारत के सहयोगात्मक रवैये के लिए और 15 मार्च 2020 को सार्क नेताओं के वीडियो सम्मेलन को आयोजित करने हेतु भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। इसमें सार्क-19 इमरजेंसी फंड का सृजन शामिल था, जिसमें सभी देशों ने स्वैच्छिक रुप से योगदान दिया है। भारत ने 10 मिलियन यूएस डॉलर का योगदान दिया।

भारत-श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने 26 सितम्बर 2020 को वर्चुअल शिखर सम्मेलन कर द्विपक्षीय संबंधों को और गति प्रदान करने के लिए सहमति व्यक्त की। श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने क्षेत्र के देशों को आपसी सहायता और समर्थन के दृष्टिकोण से कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिखाए गए मजबूत नेतृत्व की सराहना की। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि वर्तमान स्थिति ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करने का एक नया अवसर प्रस्तुत किया है। 

जेसीएससी बैठक में निरंतर संपर्क बनाए रखने के तरीके पर जताई संतुष्टि

जेसीएससी की छठी बैठक में 29 सितम्बर 2020 को बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. ए. के. अब्दुल मोमेन तथा भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की अध्यक्षता में वर्चुअल तौर आयोजित हुई। इस बैठक में कोविड-19 महामारी के दौर में दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने के तरीके पर संतुष्टि ज़ाहिर की गई। इस दौरान दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को बांग्लादेश में कोविड-19 टीके के चरण-III के परीक्षण, टीके के वितरण, सह-उत्पादन व वितरण से जुड़ी आवश्यक जानकारियों के आदान-प्रदान में तेजी लाने के निर्देश दिए। 

विदेश सचिव और सेना प्रमुख का म्यांमार दौरा

अपनी दो दिवसीय यात्रा पर 4-5 अक्टूबर 2020 को म्यांमार गए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने म्यांमार के स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच कोविड-19 महामारी से उत्पन्न हुई चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति बनी। मुलाकात के दौरान भारतीय प्रतिनिधि मंडल ने म्यांमार के स्टेट काउंसलर को 'रेमडेसिविर' दवा की 3000 से अधिक शीशियां सौंपी। इस दवा का इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज के लिए किया जाता है। कोरोना वायरस से संक्रमित अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी यही दवा दी गई थी।

संबंधों को नया आयाम दे रही यह कूटनीति

ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि चीन से जारी तनाव के बीच भारत की तरफ से अपनाई जा रही वर्चुअल डिप्लोमेसी काफी कारगार साबित हो रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय की यह कूटनीति पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों को नया आयाम दे रही है, जिसके दूरगामी परिणाम काफी बेहतर हो सकते हैं।

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