'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे के साथ देश में हर साल मनाया जाता है National Girl Child Day

India celebrates National Girl Child Day on 24 January per year - Sakshi Samachar

हैदराबादः National Girl Child Day 2021: देश में प्रतिवर्ष 24 जनवरी को 'नेशनल गर्ल चाइल्ड डे' (National Girl Child Day)  मनाया जाता है। महिला व बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development)  ने साल 2008 में इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। इस दिन को मनाने के पीछे उद्देश्य यह था कि देश में बालिका शिक्षा और उनके स्वास्थ्य व पोषण को महत्व दिया जा सके। साथ ही इस मामले में लोगों में जागरुकता भी फैलाई जा सके।
 
कन्या भ्रूण हत्या (female infanticide) से शुरू करके लिंग असमानता और यौन शोषण तक मुद्दों की कोई कमी नहीं है। इनके पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि कन्याओं को अक्सर जिस लैंगिक असमानता का सामना करना पड़ता है, आगे से उन्हें पूरी जिंदगी उसका सामना न करना पड़े।

क्या है इसका इतिहास

महिला व बाल विकास मंत्रालय ने कन्या जागरुकता के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए साल 2008 से इस दिन को 'नेशनल गर्ल चाइल्ड डे' के तौर पर मनाना शुरू किया। इसे लेकर मंत्रालय ने काफी काम भी किया। कई कैंपेन और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया ताकि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देकर देशभर में लोगों को 'गर्ल एडुकेशन और सेव गर्ल चाइल्ड' का नारा दिया।

इतना ही नहीं, अपने इस अभियान को और धार देने के लिए स्कूल और काॅलेज में महिलाओं के लिए आरक्षण भी शुरू किया गया। साथ ही, उनके साथ होने वाले भेदभाव पर रोक लगाने संबंधी काम भी किए।

अनाथ और तस्करी की शिकार बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा

इसी क्रम में तेलंगाना महिला विकास और बाल कल्याण (Telangana Women Development and Child Welfare Department) विभाग (WD&CW) ने इस साल एक अनूठी पहल की शुरुआत भी की है। उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों से 168 अनाथ और तस्करी की शिकार बालिकाओं को तकनीकी शिक्षा (Technical Education) देने के लिए पाॅलिटेक्निक काॅलेज (Polytechnic College) में इस साल मुफ्त एडमिशन (Free admission) दिलाया है।

विभाग ने मदद की इस पहल के जरिये स्टेट होम (State Home) में उनके रहने और खाने-पीने के इंतजाम भी कर दिए हैं।

WD&CW कमिश्नर डी. दिव्या को इस मदद के लिए धन्यवाद देते हुए वेंगल राव नगर स्थित WD&CW विभाग की देखरेख में चलाए जा रहे इस स्टेट होम में ऑनलाइन क्लासेस भी चलाई जाने लगी हैं, जिसमें अनाथ, गरीब आर्थिक बैकग्राउंड वाले सिंगल पैरेंट के सेमी ऑर्फन बच्चे, तस्करी की शिकार और गरीबी रेखा से नीचे के परिवार की बालिकाएं शामिल हैं।

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