Independence Day 2020 : 15 अगस्त नहीं इस दिन स्वतंत्र होता भारत, जानिए वजह

 Independence Day 2020 Know Why 15 August Chosen As Independence Day - Sakshi Samachar

15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरित करने के कारण 

भारत का विभाजन अंग्रेजों की साजिश 

माउंटबेटन को भी मिली ऐसी सजा

हैदराबाद : भारत इस साल 15 अगस्त को अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। लेकिन इस साल कोरोना ने हर त्योहार और हर काम पर ब्रेक लगा दिया है। ऐसे में इस साल स्‍वतंत्रता दिवस का जश्न भी कोरोना की वजह से फीका रहने वाला है। हर साल लाल किले पर जो जश्न और जोश दिखता था वो इस बार बेहद कम नजर आएगा। कोरोना से बचने के लिए इस साल स्‍वतंत्रता दिवस बेहद अलग तरीके से मनाया जाएगा। खैर 15 अगस्त भारतीयों के जेहन में बसा एक ऐसी तारीख है जिसकी तुलना 26 जनवरी को छोड़कर शायद ही किसी और दिन से की जा सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत को आजादी मिलने के लिए किसी और तारीख पर सहमति बनी थी लेकिन अंग्रेजों ने अपनी चाल को सफल बनाने के लिए इसे बदलवा दिया। अगर नहीं जानते हैं तो हम आप को उस तारीख के बारे में बताने जा रहे हैं। 

दरअसल, कांग्रेस साल 1930 से ही स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए 26 जनवरी के दिन का चयन कर चुकी थी। लेकिन इंडिया इंडिपेंडेंस बिल के मुताबिक ब्रिटिश प्रशासन ने सत्ता हस्तांतरण के लिए 3 जून 1948 की तारीख तय की गई थी। फरवरी 1947 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट रिचर्ड एटली ने घोषणा की थी कि सरकार 3 जून 1948 से भारत को पूर्ण आत्म प्रशासन का अधिकार प्रदान कर देगी। लेकिन माउंटबेटन सब कुछ बदल गया। 

माउंटबेटन ने क्या किया

फरवरी 1947 में ही लुई माउंटबेटन को भारत का आखिरी वायसराय नियुक्त किया गया था। माउंटबेटन को ही व्यवस्थित तरीके से भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि माउंटबेटन ब्रिटेन के लिए 15 अगस्त की तारीख को शुभ मान

ता था। क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के वक्त जब 15 अगस्त 1945 को जापानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था, तब माउंटबेटन अलाइड फोर्सेज का कमांडर हुआ करता था। इसलिए माउंटबेटन ने ब्रिटिश प्रशासन से बात करके भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की तिथि 3 जून 1948 से 15 अगस्त 1947 कर दी। 

15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरित करने के कारण 

दूसरे इतिहासकार के मुताबिक, भारत को 3 जून 1948 के बजाय 15 अगस्त 1947 को ही सत्ता हस्तांतरित करने को लेकर एक और कारण यह भी बताया जाता है कि ब्रिटिशों को इस बात की भनक लग गयी थी कि मोहम्मद अली जिन्ना जिनको कैंसर था और वो ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजों को चिंता थी कि अगर जिन्ना नहीं रहे तो महात्मा गांधी अलग देश न बनाने के प्रस्ताव पर मुसलमानों को मना लेंगे।

भारत का विभाजन अंग्रेजों की साजिश 

मोहम्मद अली जिन्ना ही वह चेहरा थे जिनको आगे रखकर ब्रिटिशों ने भारत को दो टुकड़ों में बांटने की साजिश रची और कामयाब भी हो गए। दरअसल, देश में ब्रिटिशों ने ऐसा हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण किया जिसकी आग सदियों तक मिटने वाली नहीं है। जानकारों के अनुसार, अगर मोहम्मद अली जिन्ना की मृत्यु ब्रिटिशों के योजना के पूरा होने से पहले हो जाती तो उन्हें मुश्किलें आ सकती थी। 

आजादी के बाद मोहम्मद अली जिन्ना की मौत 

आप को बता दें कि 15 अगस्त ब्रिटिशों के लिए शुभ दिन था क्योंकि इसी दिन ब्रिटेन और मित्र राष्ट्रों ने जापान को आत्म समर्पण करवाकर द्वतीय विश्वयुद्ध जीता था। इसलिए इस दिन भारत को भी सत्ता हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। और आखिरकार 15 अगस्त 1947 को ब्रिटेन ने भारत को सत्ता हस्तांतरित कर दिया। भारत विभाजन के कुछ ही महीने बाद मोहम्मद अली जिन्ना की मौत हो गई। इसका अंदेशा अंग्रेजों को पहले से था। 

माउंटबेटन को भी मिली ऐसी सजा

माउंटबेटन के नेतृत्व में भारत का विभाजन हो गया और पाकिस्तान एक अलग देश बन गया। इस दौरान जो कत्लेआम हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस कत्लेाम की सजा माउंटबेटन को बाद में ही सही लेकिन भुगतनी जरूर पड़ी।  27 अगस्त 1979 को माउंटबेटन को उसके परिवार के कुछ सदस्यों के साथ बम से उड़ा दिया गया। माउंटबेटन की हत्या का आरोप आयरलैंड की आयरिश रिपब्लिकन आर्मी पर लगा जो कि वर्षों से स्वाधीनता के लिए संघर्षरत थी। खैर जो जैसा करता है उसको फल भी वैसा ही मिलता है। 

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