Independence Day 2020 : देश का सबसे बड़ा सैन्य अवॉर्ड है परमवीर चक्र, जानिए कौन थे पहले विजेता

 Independence Day 2020 Know About Param Vir Chakra - Sakshi Samachar

सेना में मिलने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार

यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया

पेंशन देने का भी प्रावधान

हैदराबाद : परमवीर चक्र सेना में मिलने वाला सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है । एक ऐसा अलंकरण जिसका नाम सुनकर ही रगों में जोश और बलिदान की लहर दौड़ जाती है। यह अलंकरण दुश्मनों के समक्ष उच्च कोटि की शूरवीरता एवं त्याग के लिए हमारे रणबांकुरों को प्रदान किया जाता है। अब तक अधिकांश स्थितियों में यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। बहुत ही कम ऐसे अवसर आए हैं जिनमें यह सम्मान जीवित रहते हुए किसी नायक ने ग्रहण किया है। आइए स्वतंत्रता दिवस से पूर्व अपनी इस सीरीज में जानते हैं परमवीर चक्र से जुड़ी खास बातें..... 

अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को इस पुरस्कार की स्थापना की। भारतीय सेना के किसी भी अंग के अधिकारी या कर्मचारी इस पुरस्कार के पात्र होते हैं एवं इसे देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न के बाद सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समझा जाता है। 3 नवंबर 1947 को कश्मीर के बडगाम में तैनात कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन के शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा को इस सम्मान के लिए चुना गया था। 

परमवीर चक्र से जुड़ी खास बातें 

परमवीर चक्र आज तक सिर्फ 21 जवानों को ही यह सम्मान दिया गया है। इसमें थल सेना के 20 सैनिकों और वायुसेना के एक जवान को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है। परमवीर चक्र से पहले सैन्य अलंकरण की स्थापना की गई थी। इसे अमेरिका के मेडल ऑफ ऑनर तथा यूनाइटेड किंगडम के विक्टोरिया क्रॉस के बराबर का दर्जा हासिल है। 
 
 मेडल का आकार
 

परमवीर चक्र गोलाकार और कांस्य निर्मित, 1.38 इंच का व्यास होता है। मेडल के ऊपर केंद्र में उभरी हुए राज्य के प्रतीक के साथ 'इन्द्र के वज्र' की चार प्रतिकृतियां।  वहीं पिछले भाग पर हिंदी और अंग्रेजी के बीच में दो कमल के फूलों के साथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों में परम वीर चक्र उभरा हुआ होता है। इसका फीता सादा बैंगनी रंग का होता है। 

किसको मिलता है परमवीर चक्र 

सेना, नौसेना, वायुसेना अथवा रिज़र्व बल, टेरिटोरियल सेना, अथवा विधि दवारा सथापित किसी भी सशस्त्र बल के पुरुष अथवा महिला सैनिक व अधिकारी को मिलता मिलता है।

पेंशन देने का भी प्रावधान

लेफ्टिनेंट या उससे कमतर पदों के सैन्य कर्मचारी को यह पुरस्कार मिलने पर उन्हें (या उनके आश्रितों को) नकद राशि या पेंशन देने का भी प्रावधान है। हालांकि पेंशन की न्यूनतम राशि जो सैन्य विधवाओं को उनके पुनर्विवाह या मरने से पहले तक दी जाती है अभी तक विवादास्पद रही है। मार्च 1999 में यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दी गयी थी। जबकि कई प्रांतीय सरकारों ने परमवीर चक्र से सम्मानित सैन्य अधिकारी के आश्रितों को इससे कहीं अधिक राशि की पेंशन मुहैय्या करवाती है।

- परमवीर चक्र हासिल करने वाले शूरवीरों में सूबेदार मेजर बन्ना सिंह (बाना सिंह) ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो कारगिल युद्ध तक जीवित थे। सूबेदार मेजर बाना सिंह जम्मू कश्मीर लाइट इनफेन्ट्री की आठवीं रेजीमेंट में कार्यरत थे।  

- फ्लाईंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखो यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वालों में से एक हैं। उन्हें 1971 में मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे भारतीय वायु सेना के एकमात्र ऐसे ऑफिसर है जिन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। 

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