Eid Al Adha 2020 : कोरोना काल में कुछ इस तरह बकरीद मनाएंगे मुस्लिम

How Will Muslims Celebrate Eid Ul Adha In Coronavirus Pandemic - Sakshi Samachar

क्या हैं कुर्बानी का मकसद

कुर्बानी किसके लिए जरूरी 

कुर्बानी के पीछे का सच

कुर्बानी का प्रतीक ईद उल अजहा ज्यों ज्यों करीब आ रहा है लोगों के मन में भी बेचैनी बढ़ती जा रही है। क्योंकि कोरोना वायरस पूरे देश में कोहराम मचाया हुआ है। हर रोज कोरोना के केस बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे हालात में मुसलमान किस तरह ईद का त्योहार मनाएंगे और कैसे कुर्बानी देंगे। यह मुसलमानों के लिए बड़ा सवाल है। 
ईद उल अजहा मुसलमानों के मुख्य त्योहारों में से एक है। और इस साल ईद उल अजहा का त्योहार 31 जुलाई या एक अगस्त को मनाई जाएगी।  

आप को बता दें कि इस्लाम धर्म के तहत दो ईद मनाई जाती हैं। हिंदुस्तान के साथ दुनिया के तमाम देशों में मुसलमान ईद मनाते हैं। रमजान के बाद ईद-उल फितर मनाई जाती है और उसके 70 दिन बाद ईद-उल अजहा का मौका आता है, जिसे बकरीद भी कहते हैं। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं। साथ ही जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। जानवरों की कुर्बानी को लेकर मुसलमानों के कई संगठन केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अपील कर रहे है कि कोरोना को देखते हुए बाजारों में जानवरों की बिक्री के लिए एक नियम बना दें, जिससे लोग जानवर खरीद कर कुर्बानी दे सकें। 

कुर्बानी के पीछे का सच

इस्लामिक इतिहास के अनुसार एक बार खुदा के हुक्म में हज़रत इब्राहिम की ईमान को परखने के लिए उनके बेटे की कुर्बानी मांगी थी। उस समय उन्होंने अपने बेटे की बिना सोचे समझे कुर्बानी दे दी थी। उस वक़्त अचानक से अल्लाह ने उनके बेटे को जीवनदान दे दिया। इस की ही याद में इस पर्व को मनाया जाता हैं। लेकिन इस पर्व में कही भी बकरे का ज़िकर नहीं किया गया। असल में अरबी भाषा में बकर शब्द का मतलब बड़ा जानवर होता है। जिससे भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान में बकरा ईद बोलने लग गए।

क्या हैं कुर्बानी का मकसद 

बेशक अल्लाह दिलों के हाल जानता है और वह खूब समझता है कि बंदा जो कुर्बानी दे रहा है, उसके पीछे उसकी क्या नीयत है। जब बंदा अल्लाह का हुक्म मानकर महज अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करेगा तो यकीनन वह अल्लाह की रजा हासिल करेगा, लेकिन अगर कुर्बानी करने में दिखावा या तकब्बुर आ गया तो उसका सवाब जाता रहेगा। कुर्बानी इज्जत के लिए नहीं की जाए, बल्कि इसे अल्लाह की इबादत समझकर किया जाए। कहा यह भी जाता है कि अपनी सबसे प्यारी चीज रब की राह में खर्च करो। उसका अर्थ नेकी और भलाई के कामो में जुड़ जाता हैं। कुर्बानी के वक़्त ही गोश्त को तीन भागो में बाट दिया जाता है। जिसमें एक हिस्सा खुद के लिए होता हैं, एक जरूतमंद के लिए और आखिरी गरीबों में दिया जाता हैं। 

कुर्बानी किसके लिए जरूरी 

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बकरा ईद के मौके पर कुर्बानी देना किसके लिए जरूरी होता है। कुर्बानी एक जरिया है जिससे बंदा अल्लाह की रजा हासिल करता है। बेशक अल्लाह को कुर्बानी का गोश्त नहीं पहुंचता है, बल्कि वह तो केवल कुर्बानी के पीछे बंदों की नीयत को देखता है। अल्लाह को पसंद है कि बंदा उसकी राह में अपना हलाल तरीके से कमाया हुआ धन खर्च करे। शरीयत के मुताबिक कुर्बानी हर उस औरत और मर्द के लिए वाजिब है, जिसके पास साढ़े 52 तोला चांदी या सात तोला सोना है या फिर उसके बराबर पैसा है तो उसके लिए कुर्बानी वाजिब है। 

अगर कुर्बानी नहीं दी तो... 

ईद उल अजहा पर कुर्बानी देना वाजिब है। वाजिब का मुकाम फर्ज से ठीक नीचे है। अगर साहिबे हैसियत होते हुए भी किसी शख्स ने कुर्बानी नहीं दी तो वह गुनाहगार होगा। अगर किसी शख्स ने साहिबे हैसियत होते हुए कई सालों से कुर्बानी नहीं दी है तो वह साल के बीच में सदका करके इसे अदा कर सकता है। सदका एक बार में न करके थोड़ा-थोड़ा भी दिया जा सकता है। सदके के जरिये से ही मरहूमों की रूह को सवाब पहुंचाया जा सकता है।

- मौलाना जावेद निजामी, हैदराबाद 

अगर कुर्बानी के लिए जानवर न मिले तो.... 

देश में कोरोना वायरस के कारण केंद्र सराकर या राज्य सरकार ने अभी बाजारों में जानवरों की बिक्री के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है। इसको लेकर लोग चिंतीत है और दूसरे विकल्प को तलाश रहे हैं। ऐसे में मौलान नोमान रिजवी का कहना है कि अगर आप के पास कुर्बानी के लिए कोई जानवर नहीं है और आप कुर्बानी देना चाहते हैं ऐसे हालात में आप कुर्बानी के पैसों को गरीबों में बांट सकते हैं। अगर आप के घर में पाला हुआ बकरा है तो उसकी कुर्बानी किया जा सकता है।  

- मुफ्ती निजामुद्दीन, जहाजकित्ता, गोड्डा

सदका  करना भी एक विकल्प

अगर बाजार में कुर्बानी के जानवर दस्तयाब नहीं होता है तो ऐसे हालात में सदका करना एक विकल्प है। सदका उतने ही रकम का करें जितना कुर्बानी के लिए रखे गए थे। सदका गरीबों और जरूरतमंद लोगों के बीच करें। इससे कुर्बानी का सवाब तो मिल जाएगा, लेकिन इसको कुर्बानी नहीं कहा जा सकता है। 

- मुफ्ती जाकिर नुरी, हैदराबाद  

अबू आजमी की बकरीद को लेकर सरकार से अपील

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अबू आजमी ने ट्वीट के द़वारा महाराष्ट्र सरकार से अपील की है कि ईद उल अज़हा के त्योहार को देखते हुए “मेरा महाराष्ट्र सरकार से निवेदन है की ईद उल अज़हा के मौके पर कुर्बानी के जानवरों के बाज़ारों के लिए नियम बनाए ताकि कुर्बानी का इंतज़ाम शारिरिक दुराव का पालन करते हुए किया जा सके। इन मुद्दों  पर राज्‍य सरकार जल्‍द फैसला ले ताकि लोग अच्छी तरह से बकरीद का पर्व मना सकें।

वहीं दूसरी तरफ, लोग मुफ्ती-ए-कराम और बड़े ओलामा और सरकार के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं, कि उनका क्या निर्देश आता है। कुछ लोगों का कहना है कि जिस तरह हमलोगों ने ईद की त्योहार मनाई उसी तरह बकरीद का त्योहार भी मनाएंगे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अभी बकरीद आने में समय है और इस दौरान कुछ समस्या का हल निकल आएगा। ज्यादातर लोगों का ध्यान सिर्फ सरकार और बड़े ओलामा पर है कि वे क्या निर्देश देते हैं।  
 

मुO. जहांगीर आलम, उप संपादक 

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