जन्मदिन विशेष : अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय, जिन्हें 'टाइम मैगजीन' में मिली जगह

Famous English writer and Social worker Arundhati Roy biography  - Sakshi Samachar

'मैसी' फिल्म से की अपने करियर की शुरुआत

'गॉड ऑफ स्माल थिंग्स' नामक उपन्यास लिखा 

2010 में दर्ज किया गया था देशद्रोह का मुकदमा 

नई दिल्ली : अंग्रेजी की सुप्रसिद्ध लेखिका (Writer) और समाजसेवी (Social Worker) अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) का जन्म 24 नवम्बर 1961 को शिलौंग में हुआ था। अरुंधति रॉय का पूरा नाम सुजाना की अरुंधति रॉय है। उनकी माता का नाम मैरी रॉय और पिता का नाम रंजीत रॉय है। अरुंधति ने नई दिल्ली (New Delhi) के प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर स्कूल में वास्तुकला (आर्किटेक्चर) का अध्ययन किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अभिनय से की थी। उन्होंने फिल्म 'मैसी' (Macy) में एक गांव की लड़की का रोल अदा किया था। 

पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात आर्किटेक्ट जोरार्ड से हुई और दोनों में प्यार हो गया। बाद में अरुंधति ने जोरार्ड से लव मैरिज कर ली। यह विवाह करीब चार साल तक चला। वर्ष 1984 में अरुंधति की मुलाकात प्रदीप कृष्णन से हुई थी, जिन्होंने अरुंधति को अपनी फिल्म 'मैसी साहब' में एक जनजातीय लड़की का रोल दिया था। इस फिल्म को कई अवॉर्ड मिले थे। इसके बाद अरुंधति ने प्रदीप कृष्णन से विवाह कर लिया। 'In Which Annie Gives It Those Ones' के लिए उन्हें बेस्ट स्क्रीनप्ले का नेशनल अवॉर्ड मिला। 

पटकथाओं का लेखन
फिल्मों में रोल अदा करने के अलावा उन्होंने कई फिल्मों के लिये पटकथायें भी लिखीं, जिनमें In Which Annie Gives It Those Ones (1989), Electric Moon (1992) को खूब सराहा गया। साल 1996 में प्रकाशित हुई अपनी किताब 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' से अरुंधति रॉय रातों रात एक सेलिब्रिटी बन गईं। उपन्यास 'गॉड ऑफ स्माल थिंग्स' के लिये 1997 में उन्हें बुकर पुरस्कार मिला, जिसके बाद उनका ध्यान साहित्य जगत की ओर गया। इस पुस्तक की सफलता के बाद रॉय के कई निबंध प्रकाशित हुए और उन्होंने सामाजिक मामलों के लिए भी काम किया।

लान्नान सांस्कृतिक स्वतंत्रता पुरस्कार से सम्मानित
साल 2002 में 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' पुस्तक के लिए अरुंधति रॉय को लान्नान सांस्कृतिक स्वतंत्रता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अरुंधति रॉय ने 'द इंड ऑफ इमेजिनेशन' (1998) नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने भारत सरकार की परमाणु नीतियों की आलोचना की है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका की नई-साम्राज्यवादी नीतियों की एक मुखर आलोचक रही हैं। अरुंधति रॉय नर्मदा बांध परियोजना का विरोध करने के कारण खबरों के जरिए चर्चा में आईं थीं, उनका कहना था कि इससे केवल गुजरात के जमींदारों को ही मदद मिलेगी। जो लोग यह तर्क करते हैं कि इस बांध परियोजना से सभी को लाभ होगा, वह झूठ बोलते हैं। 

सुर्खियों में रहीं अरुंधति
1994 में अरुंधति राय खूब सुर्खियों में रहीं, क्योंकि इस दौरान उन्होंने फूलन देवी पर आधारित शेखर कपूर की फिल्म 'बैंडिट क्वीन' की आलोचना की थी। उन्होंने फूलन देवी के जीवन को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और बहुत आंशिक तस्वीर स्केच करने के लिए कपूर पर आरोप लगाया। अपने प्रसिद्ध उपन्यास के बाद, रॉय ने फिर से एक पटकथा लेखक के रूप में काम करना शुरू किया और "The Banyan Tree" और वृत्तचित्र "DAM / AGE: A Film with Arundhati Roy" (2002) जैसे टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए लिखा। 

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अरुंधति रॉय ने 2007 की शुरुआत में घोषणा की कि वह अपने दूसरे उपन्यास पर काम करना शुरू कर देगी। इसके बाद उन्होंने टीवी और फिल्म छोड़ किताबें लिखना शुरू कर दिया। साल 2010 में रॉय पर कश्मीर-माओवादियों के पक्ष में बयान देने की वजह से देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर भारत विरोधी भाषण देने और कश्मीरी अलगाववाद का समर्थन करने का आरोप लगते रहते हैं। साल 2014 में अरुंधति रॉय को टाइम मैग्जीन की दुनिया की 100 प्रभावशाली हस्तियों की सूची में जगह मिल चुकी है।

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