भारतीयों की आंखें हो रही हैं कमजोर, कम रोशनी वालों की संख्या हो गयी दोगुनी

Eyes of Indians Are Getting Weaker Number Increase Doubled - Sakshi Samachar

निकट दृष्टि दोष का इलाज

क्या है निकट दृष्टि दोष

हैदराबाद : आंखें कुदरत की अनमोल तोहफा में से एक हैं।अगर आप के पास आंखें हैं तो इस खूबसूरत दुनिया को देख सकते है और आनंद ले सकते हैं। इसी बीच एक चौंका देने वाला रिपोर्ट सामने आया है। अब लोगों की आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है। खासकर भारतीयों में आंखों की रोशनी कम होने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि रिपोर्ट कह रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में तकरीबन 7.9 करोड़ लोगों की आंखें कमजोर हैं. पिछले 30 सालों में तो ऐसे लोगों की संख्या में दुगना इजाफा हो गया है जिनके नेत्रहीन होने का खतरा है। 

 बताया जाता है कि देश में 1990 में करीब चार करोड़ लोगों में दृष्टि दोष की शिकायत थी। वहीं अब 13 करोड़ से अधिक भारतीयों में दृष्टि दोष की शिकायत हैं। इस संबंध में दो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं- विजन लॉस एक्सपर्ट ग्रुप और इंटरनेश्नल एजेंसी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस द्वारा यह आंकड़े जारी किए गए हैं।

देश में नेत्रहीनों की उम्र 50 साल से ज्यादा

नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीयों की बढ़ती आयु संभाविता ही हल्के और गंभीर दृष्टि दोष का कारण है। 1990 में जहां भारतीयों की औसत उम्र-काल 59 साल के करीब थी तो 2019 में यह 70 साल हो गया है। वहीं ताजा आकंड़ों पर गौर करें तो देश के करीब 70 फीसदी नेत्रहीनों की उम्र 50 साल से ज्यादा है। इनके अलावा मधुमेह मरीजों में भी नेत्रहीनता की शिकायतों में इजाफा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि हर 6 में से एक डायबिटिक मरीज रेटिनोपैथी से पीड़ित है।  आप को बता दें कि चीन (11.6 करोड़) के बाद भारत मे ही सबसे ज्यादा तकरीबन 7.7 करोड़ मधुमेह के मरीज हैं। 

नेत्रहीनों की संख्या के मामले में भारत अव्वल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 30 सालों में भारत में निकट दृष्टि दोष के मामले दोगुने से भी अधिक हो चुके हैं।  1990 में इस समस्यां से जहां 5.77 करोड़ लोग ही पीड़ित थे तो वहीं 2019 में 13.76 करोड़ भारतीय निकट दृष्टि दोष से ग्रसित हैं। दुनिया में नेत्रहीनों की संख्या के मामले में भी भारत अव्वल है। देश में 92 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हे दिखाई नहीं देता है वहीं चीन में नेत्रहिनों की संख्या भारत से कम 89 लाख है। 

क्या है निकट दृष्टि दोष

जब कभी चीज की इमेज रेटिना पर न बनकर, उससे पहले ही बन जाती है तो चीज धुंधला दिखाई देने लगती हैं। इस स्थिति को मायोपिया कहा जाता है। इसमें आमतौर पर दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर इस स्थिति में सुधार किया जाता है। जब विजुअल एक्युटी 6/18 या 3/60 से कम होती है। यानी अगर किसी मरीज का MSVI 3/360 है तो इसका अर्थ है कि 3 फीट की दूरी से वह चीज साफ देख पाएगा जोकि सही नजर आने वाला इंसान 60 फीट से देखने में सक्षम होता है। नेत्रहीनता वाले मामलों में विजुअल एक्युटी 3/60 से कम होती है।  

निकट दृष्टिदोष के लक्षण

जो लोग निकट दृष्टिदोष से ग्रस्त होते हैं उन्हें ड्राइविंग, खेल या कुछ फीट नीचे देखने के दौरान सिरदर्द, आंखों पर दबाव, चक्कर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बच्चों में जब यह समस्या होती है तो वो अक्सर यह शिकायत करते हैं कि उन्हें स्कूल में ब्लैकबोर्ड साफ नहीं दिखता है। 

निकट दृष्टि दोष का इलाज

मायोपिया अगर गंभीर ना हो तो चश्मा लगाकर या कांटैक्ट लेंस लगाकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा अगर स्थिति गंभीर हो तो ऐसी स्थिति में रिफ्रैक्टिव सर्जरी लैसिक ही इसका उपचार है। लासिक या कार्निया में एक पतला सा गोल फ्लैप तैयार किया जाता है। इसके बाद एक्समायर लेजर से फ्लैप को हटाकर उसके नीचे के कुछ टिश्यूज निकाले जाते हैं और पुन: उस भाग को फ्लैप से ढक दिया जाता है।

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