लॉकडाउन में कुछ ऐसी है इन घरों की कहानी, कुछ कहा न जाए और रहा भी न जाए

During lockdown how husband and wives are fighting - Sakshi Samachar

पति की शिकायत ले पहुंच रही हैं थाने

बीवियों की 'चेंचें-पेंपें' कौन सुने

'महिला ब्रिगेड' के कंधों पर आया भार

सदर थाना : 3
लालपुर थाना: 2
बरियातू थाना: तीन
पुंदाग ओपी: 1
बीआईटी ओपी: 2
कोतवाली थाना: 9
लोअर बाजार थाना: 4
डोरंडा थाना: 2
पंडरा थाना: 1

क्या सोच रहे हैं आप? ये थानों की लिस्ट मैं यहां क्यों चस्पा कर रही हूं! यकीनन कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की फेहरिस्त लगाने के बजाय मैं इन थानों के साथ ये नंबर लिख रही हूं, कुछ अजीब तो जरूर लग रहा होगा। मुझे भी लग रहा है, लेकिन बात है ही कुछ ऐसी। आप भी सुनेंगे तो दांतों तले अंगुलियां दबा लेंगे।

पति की शिकायत ले पहुंच रही हैं थाने
दरअसल, इस 'लॉकडाउन' ने केवल मौलादा साद और कनिका कपूर जैसे लोगों की ही नहीं बल्कि जन्म-जन्म का साथ निभाने की कसमें खाने वालों की भी कलई खोलकर रख दी है। जी हां, जीवन भर साथ जीने-मरने की कसमें खाने वाले, अक्सर एक-दूसरे के लिए वक्त न निकालने की शिकायत करते रहने वाले पति-पत्नी 'लॉकडाउन' के कुछ दिन भी खुशी-खुशी साथ नहीं बिता पा रहे हैं। हालत यह है कि बीवियां 'घरेलू हिंसा' कानून का सहारा लेकर पति की शिकायत लेकर थाने पहुंचने लगी हैं।

बीवियों की 'चेंचें-पेंपें' कौन सुने
मुश्किल यह है कि 'कोरोना' और 'लॉकडाउन' से पहले ही आजिज आ चुकी पुलिस के लिए अब ऐसी बीवियों के मसले सुलझाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पुलिस वाले यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर वे 'कोरोना' और 'लॉकडाउन' के प्रभाव वाले गंभीर मुद्दों पर ध्यान दें या इन बीवियों की 'चेंचें-पेंपें' सुनें।

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'महिला ब्रिगेड' के कंधों पर आया भार
थक-हारकर पुलिस ने महिलाओं के इन शिकायतों को सुनने का भार अपनी 'महिला ब्रिगेड' के कंधों पर डाल दिया। शायद उन्हें लगा होगा कि महिलाओं की समस्या महिलाएं ही बेहतर सुलझा सकती हैं या फिर यह कि महिलाएं खुलकर महिला थाना प्रभारी से अपनी शिकायत बता पाएंगी। पर एक बात कहूं... मेरे खुरापाती दिमाग में कुछ और ही पक रहा है। इस दिमाग को ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कि महिलाओं की 'चिल्लमचिल्ली' और 'चेंचें-पोंपों' से बचने के लिए ही पुलिस ने यह युक्ति निकाली होगी। बहरहाल, आप क्या कहते हैं? क्या वजह रही होगी। सोचिए... सोचिए। और हो सके तो हमसे अपने विचार शेयर भी कीजिए।

                                                                 कांसेप्ट फोटो (साभार: सोशल मीडिया)

हम महिलाएं क्यों न उठाएं फायदा!
खैर, अब मैं आपको बता दूं कि खासकर झारखंड के रांची जिले की ये बीवियां किस तरह की शिकायतें लेकर थाने पहुंच रही हैं? एक बीवी 'लॉकडाउन' के दौरान पति का दिन-रात घर बैठकर टीवी देखना बर्दाश्त नहीं कर पाई और उससे घर के काम में हाथ बंटाने को कहा। बदले में पति ने उसे कुछ अपशब्द कह दिया और गालियां भी दीं। नतीजा... नतीजा तो आप समझ ही गए होंगे। केस। जी हां, पति के खिलाफ। आखिर महिलाओं को हमारे देश में अधिकार ही इतने हैं, फिर हम महिलाएं उनका फायदा क्यों न उठाएं भला!

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बॉन्ड भरवाकर भेज दिया घर
चलिए, आपके साथ एक और वाकया शेयर करती हूं। इसमें 'लॉकडाउन' के दौरान पति एक दोस्त के साथ दूसरे दोस्त के घर पहुंचा। वहां उन्होंने जमकर शराब पी। नशे में धुत पति जब घर लौटा तो बीवी ने सवाल पूछना शुरू कर दिया। बेहोश पति को यह बर्दाश्त न हुआ और उसने दो-चार लगा दी। फिर क्या? पत्नी सीधे पहुंच गई थाने। मारपीट का आरोप लगाकर पति के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने मामले को रफा-दफा कराया और पति से बॉन्ड भरवाकर उसे वापस घर भेज दिया।

पति-पत्नी की हो रही है काउंसिलिंग 
ऐसे मामले यहीं खत्म नहीं हो रहे। जैसे-जैसे 'लॉकडाउन' के दिन एक-एक कर बीत रहे हैं, बीवियों का ऐसी शिकायतें लेकर थाने पहुंचने का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है। मामलों की बढ़ती संख्या और गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने ऐसे मामलों के निपटारे के लिए महिला थानों को जिम्मेदारी सौंप दी, जहां आए दिन ऐसी महिलाओं और उनके पतियों की काउंसिलिंग की जा रही है। ताकि बेकार के मामले न दर्ज हों और वे एक बार फिर से साथ जीने-मरने की कसमें खाकर डकार लें और गहरी नींद में चले जाएं। कम से कम बेचारे पुलिसवालों को तो कुछ शांति मिले!

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- सुषमाश्री (वरिष्ठ उप संपादक)

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