कोरोना का शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा घातक असर, खुद को ऐसे संभालें

Corona is having a fatal effect not only on the physical but also mental health - Sakshi Samachar

देश में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं

कोरोना का शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर 

कोरोना के इस दौर में मानसिक संतुलन बनाए रखें 

कोरोना वायरस वह नाम या फिर ऐसी बीमारी है जिसने हमारे जीवन को पूरी तरह से प्रभावित किया है। हम और हमारी जीवनशैली को इसने पूरी तरह बदलकर रख दिया है। वैसे पहले तो इसे 'अदृश्य दुश्मन' कहा जा रहा था जिसे हम देख नहीं सकते पर इससे हमें सावधान रहना है पर अब तो 
इस 'अदृश्य दुश्मन' के असर को हम साफ़-साफ़ देख और महसूस कर पा रहे हैं। लग तो यही रहा है जैसे हम पूरी तरह इसकी चपेट में हैं। 

हमारी भागती-दौड़ती ज़िंदगी में जैसे कोरोना ने अचानक ब्रेक लगा दिया है और इसके डर ने तो लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालना भी शुरू कर दिया है। हर कोई आज कोरोना से परेशान है चाहे वह शारीरिक हो या फिर मानसिक। 

लॉकडाउन का हुआ कुछ ऐसा असर 

कोरोना की शुरुआत के साथ ही मार्च में लॉकडाउन लगा था। हम सबके लिए लॉकडाउन का अनुभव नया था, लोग घरों में बंद हुए और फिर सब कुछ जैसे रुक गया। पहले-पहले तो सबको अच्छा लगा। कुछ दिन तो सबने एंजॉय किया, भागती-दौड़ती जिंदगी में जैसे सबको बिन मांगे साथ रहने का सुनहरा मौका मिल गया। बच्चों को छुट्टियां मिल गई, आफिस बंद हो गए। 

घर में घरवालों के साथ हर कोई खुशी-खुशी रहने लगा पर जब ये लॉकडाउन का समय बढ़ने लगा तो फिर धीरे-धीरे शुरु होने लगी इससे जुड़ी परेशानियां और समस्याएं। पहले जिस लॉकडाउन को छुट्टियों के तौर पर लिया जा रहा था बाद में वही बोझ लगने लगी, शारीरिक और मानसिक रूप से भी। 

फिर शुरू हुआ चिंता का दौर 

लॉकडाउन जब बढ़ा दिया गया तो नौकरी, रोजगार, व्यापार बंद हो गए, सब कुछ ठप्प पड़ गया तो इससे जुड़ी परेशानियों ने लोगों को घेर लिया। इस बीच चिंता, डर, अकेलेपन और अनिश्चितता का माहौल बन गया है और लोग दिन-रात इससे जूझने लगे। क्या छोटा और क्या बड़ा सब पर इसका असर पड़ा। हर कोई इससे परेशान हो गया। क्या करें क्या नहीं किसी की समझ में नहीं आ रहा था। 

नौकरी-व्यापार ठप्प होने का हुआ असर 

लॉकडाउन ने हर इंसान पर असर डाला और हर किसीका व्यापार या फिर नौकरी, सब पर इसका असर हुआ। हर किसी के हाथ में पैसे आने बंद हो गए पर घर का खर्च नहीं रुका, जिसका दिमाग पर असर तो होना ही था। जो छुट्टियां पहले अच्छी लग रही थी, वही कुछ दिनों बाद बोझ लगने लगी। एक समय ऐसा भी आया जब लगने लगा कि काम शुरू हो तो शायद समस्या दूर हो जाए। पर समस्याओं पर ब्रेक नहीं लगा बल्कि समय के साथ ये तो बढ़ने लगी। 

अब हैदराबाद की रहने वाली लतिका को ही देखते हैं जो एक बिजनेसवुमेन हैं। वे हर दिन कोरोना वायरस, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था की ख़बरें पढ़ती रहती हैं। लतिका का अपना रेस्टोरेंट है जो लॉकडाउन में बंद था और फिर अनलॉक में चालू हुआ। पर अब भी पहले जैसा बिजनेस नहीं चल रहा। 

लतिका कहती हैं, “हमारा बिजनेस तो लॉकडाउन के कारण बंद हो गया था और अब अनलॉक में शुरू तो हुआ है लेकिन 
पहले जैसा तो अब भी नहीं चल रहा। एक बिजनेसवुमन होने के नाते मुझे अपने कर्मचारियों को तनख्वाह भी देनी पड़ती है जो इसी पर आधारित है। हमारे ख़र्चे बांटने वाला कोई नहीं है और जब बिजनेस ही सही तरीके से नहीं चलेगा तो मैं कैसे सारे खर्चे निकालूंगी, ये सब सोचकर चिंता बढ़ जाती है। अब भी कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं और लोग बाहर का खाने में परहेज कर रहे हैं तो कैसे चलेगा। समझ नहीं पा रही हूं।”

अकेलापन भी सता रहा है 

भोपाल की रहने वाली संजना जनता कर्फ़्यू के बाद से ही अपने पति और बच्चों के साथ घर में रह रही थी। वह कहती हैं, “शुरू में तो अच्छा लगा कि पूरे परिवार के साथ रह पाएंगे और उस वक़्त कोरोना वायरस का डर भी ज्यादा नहीं था लेकिन अब रोज़-रोज़ ख़बरें देखकर डर लगता है कि हमारा क्या होगा। मुझे बार-बार लगता है कि कहीं परिवार में किसी को कोरोना वायरस हो गया तो। अब तो लॉकडाउन खुल गया है तो बाहर भी जाते हैं सामान लाने के लिए। पर बाहर जाकर आने पर लगता है जैसे कोरोना हमारे साथ ही आ गया है घर में। कोरोना जैसे मेरे दिमाग पर ही छाया रहता है।”

पूरी तरह चरमरा गया है मानसिक स्वास्थ्य 

कोरोना का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस बारे में मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ,लोगों के लिए पूरा माहौल बदल गया है। अचानक से स्कूल, ऑफिस, बिजेनस का बंद होना, बाहर नहीं जाना और दिनभर कोरोना वायरस की ही ख़बरें देखना। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ना स्वाभाविक है।

वहीं कई लोग तो कोरोना के चलते अपने घरों और दोस्तों से भी दूर रह रहे हैं। अकेले ही हालात से निपट रहे हैं। एक कमरे में बंद अनिश्चित भविष्य के बारे में सोचकर लोगों की मानसिक दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं।

लोगों को परेशान कर रही ये वजह 

कोरोना के इस दौर में लोग बेहद परेशान हैं। खास तौर पर 
लोगों को ये तीन वजहें परेशान कर रही हैं। एक तो कोरोना वायरस से संक्रमित होने का डर, दूसरा नौकरी और कारोबार को लेकर अनिश्चितता और तीसरा अकेलापन। पहले लोग अपनी परेशानी दोस्तों और रिश्तेदारों से शेयर करते थे पर अब तो किसी के यहां जाने या मिलने से भी डर लगने लगा है, ऐसे में अकेलापन बढ़ता ही जा रहा है। 

तनाव का शरीर पर हो रहा असर 

इन स्थितियों का असर ये हो रहा है कि स्ट्रेस बढ़ रहा है। सामान्य स्ट्रेस तो हमारे लिए अच्छा होता है इससे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है लेकिन ज़्यादा स्ट्रेस, डिस्ट्रेस बन जाता है। ये तब होता है जब हमें आगे कोई रास्ता नहीं दिखता। घबराहट होती है, ऊर्जाहीन महसूस होता है। फ़िलहाल महामारी को लेकर इतनी अनिश्चितता और उलझन है कि कब तक सब ठीक होगा, पता नहीं। ऐसे में सभी के तनाव में आने का ख़तरा लगातार बना हुआ है।

इस तनाव का असर शरीर, दिमाग़, भावनाओं और व्यवहार पर भी पड़ रहा है। हर किसी पर इसका अलग-अलग असर हो रहा है।

शरीर पर असर - बार-बार सिरदर्द, रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, थकान, और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव।

भावनात्मक असर – चिंता, ग़ुस्सा, डर, चिड़चिड़ापन, उदासी और उलझन हो सकती है.।

दिमाग़ पर असर – बार-बार बुरे ख़्याल आना। जैसे मेरी नौकरी चली गई तो क्या होगा, परिवार कैसा चलेगा, मुझे कोरोना वायरस हो गया तो क्या करेंगे। सही और ग़लत समझ ना आना, ध्यान नहीं लगा पाना।

व्यवहार पर असर – ऐसे में लोग शराब, तंबाकू, सिगरेट का सेवन ज़्यादा करने लगते हैं। कोई ज़्यादा टीवी देखने लगता है, कोई चीखने-चिल्लाने ज़्यादा लगता है, तो कोई चुप्पी साध लेता है।

ऐसे दूर करें स्ट्रेस 

मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। इस विषय पर मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि आप कुछ तरीक़ों से ख़ुद को शांत रख सकते हैं ताकि स्वस्थ रहें-

- सबसे पहले तो ख़ुद को मानसिक रूप से मज़बूत करना ज़रूरी है। आपको ध्यान रखना है कि सब कुछ फिर से ठीक होगा और पूरी दुनिया इस कोशिश में जुटी हुई है। बस धैर्य के साथ इंतज़ार करें।

- अपने रिश्तों को मज़बूत करें। छोटी-छोटी बातों का बुरा ना मानें। एक-दूसरे से बातें करें और घर केसदस्यों का ख़्याल रखें। निगेटिव बातों पर चर्चा कम करें।

-अपनी दिनचर्या को बनाए रखें। इससे हमें एक उद्देश्य मिलता है और सामान्य महसूस होता है। हमेशा की तरह समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें।

-अपनी भावनाओं को ज़ाहिर करें। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों के साथ शेयर करें। जिस बात का बुरा लगता है, उसे पहचानें और ज़ाहिर करें, लेकिन वो ग़ुस्सा कहीं और ना निकालें। दोस्तों से समय-समय पर फोन पर बात करते रहें। 

-भले ही आप परिवार के साथ घर पर रह रहें फिर भी अपने लिए कुछ समय ज़रूर निकालें। आप जो सोच रहे हैं उस पर विचार करें। अपने आपसे भी सवाल पूछें। जितना हो पॉजिटिव नतीजे पर पहुंचने की कोशिश करें।

-सबसे बड़ी बात बुरे वक़्त में भी अच्छे पक्षों पर ग़ौर करना होता है। जैसे अभी महामारी है लेकिन इस बीच आपके पास अपने परिवार के साथ बिताने के लिए, अपनी हॉबी पूरी करने के लिए काफ़ी वक़्त है। इस मौक़े पर भी ध्यान दें।

कोरोना की खबरों की ओवरडोज़ ना लें

आजकल टीवी और सोशल मीडिया पर चारों तरफ़ कोरोना वायरस से जुड़ी ख़बरें आ रही हैं। हर छोटी-बड़ी, सही-गलत ख़बर लोगों तक पहुंच रही है। डॉक्टर्स के मुताबिक़ इससे भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है क्योंकि वो एक ही तरह की बातें सुन, देख व पढ़ रहे हैं और फिर सोच भी वही रहे हैं।

ज़रूरी है कि लोग उतनी ही ख़बरें देखें और पढ़ें जितना ज़रूरी है। उन्हें समझना होगा कि एक ही चीज़ बार-बार देखने से उनके दिमाग़ में वही चलता रहेगा। इसलिए दिनभर का एक समय तय करें और उसी वक़्त न्यूज़ चैनल देखें।

अगर आप हैं क्वारेंटाइन या आइसोलेशन में तो .....

ये दौर मुश्किल तो होता है लेकिन ख़ुद को संभालना बहुत ज़रूरी है। जब तक टेस्ट के नतीजे नहीं आते तब तक ख़ुद किसी नतीजे पर ना पहुंचे। दिमाग़ को नियंत्रित रखें और कुछ न कुछ करने में व्यस्त रहें।

अक्सर कुछ ग़लत होने पर हम अपना ग़ुस्सा, चिढ़ ग़लती करने वाले पर निकालकर शांत कर लेते हैं। उसे बुरा-भला कहकर अपना गुबार निकाल लेते हैं लेकिन, इस महामारी से लोगों में चिढ़ और डर से पैदा हुआ ग़ुस्सा कहीं निकल नहीं पा रहा है। डर का एक रूप ग़ुस्सा और अस्वीकृति भी है।

इस महमारी में लोग किसी को ज़िम्मेदार भी नहीं ठहरा सकते इसलिए भी वो कोरोना वायरस के संदिग्धों और मरीज़ों पर ग़ुस्सा निकालने लगते हैं। उन्हें एक निशाना मिल जाता है। तो अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो शांत रहें। 

मानसिक रोगियों पर ज्यादा असर

लोगों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं. जिन्हें पहले से ही तनाव, निराशा, हताशा जैसी दिक्कते थीं उनमें इजाफ़ा हो गया है। मानसिक रोग के मरीज़ों में कोरोना वायरस की चिंता देखी जा रही है। 

ये ऐसा समय है जब उन्हें ठीक से दवाई और काउंसलिंग मिलनी ज़रूरी है। अगर ऐसा नहीं होता तो वो स्टेबल नहीं रह पाएंगे। इन लोगों को दवा के साथ ज्यादा देखभाल की जरूरत है। 

बढ़ रही है आत्महत्या की प्रवृत्ति 

कोविड-19 का संक्रमण पहले के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उनमें घबराहट, अवसाद और आत्महत्या जैसी प्रवृत्ति बढ़ रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक महामारी कुछ मामलों में वायरस से संक्रमित लोगों में तीव्र घबराहट पैदा करती है। यह कई बार अवसाद का रूप ले लेती है। कुछ लोगों को तो आत्महत्या के कगार पर भी ले जाती है।

बीते कई दिनों में हमने देखा भी है कि कई लोगों ने आत्महत्या कर ली। कई लोगों ने तो कोरोना से संक्रमित होने के डर से भी मौत को गले लगा लिया। 

विशेषज्ञों के मुताबिक, घबराहट, संक्रमण का भय, अत्यधिक बेचैनी, निरंतर आश्वासन की मांग करते रहने वाला व्यवहार, नींद में परेशानी, बहुत ज्यादा चिंता, बेसहारा महसूस करना और आर्थिक मंदी की आशंका लोगों में अवसाद एवं व्यग्रता के प्रमुख कारक हैं। जानकारों का कहना है कि नौकरी चले जाने का भय, आर्थिक बोझ, भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भोजन एवं अन्य जरूरी सामानों के खत्म हो जाने का डर इन चिंताओं को और बढ़ा देता है। 

इस दौर में खुद को ऐसे संभालें 

कोरोना का खतरा तो बढ़ रहा है पर ऐसे में खुद को संभालना बेहद जरूरी है। कोरोना महामारी का यह दौर भी बीत जाएगा तो आप इस पर ज्यादा न सोचें, सावधान रहें, परिवार के साथ समय बिताएं और सकारात्मक सोचें। इससे आपकी परेशानियां किसी हद तक कम हो जाएंगी। 

                          ..............मीता,  सीनियर सब-एडिटर-सीनियर रिपोर्टर,  साक्षी समाचार

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