ऐसे विश्वकर्मा पूजा करने से बिजनेस में होती है बरकत

Vishwakarma Jayanti Puja Vidi for growth in business - Sakshi Samachar

बिजनेस के लिए करें बाबा विश्वकर्मा की पूजा

देव-शिल्पी विश्वकर्मा भगवान की पूजा-विधि

हैदराबाद: भगवान विश्वकर्मा को सबसे बड़े वास्तुविद और इंजीनियरिंग में महारत माना जाता है। पलक झपकते ही भगवान विश्वकर्मा सजी धजी पूरी नगरी बसा सकते हैं। आज विश्वकर्मा जंयती को लेकर श्रद्धालु विश्वकर्मा भगवान की आराधना कर रहे हैं। अधिकांश लोगों में भ्रांति है कि विश्वकर्मा पूजा महज कल पुर्जों से जुड़ी है। वास्तव में ये पूजा आपके बिजनेस में जान फूंक सकती है। अगर आपने भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न कर लिया तो आपके बिजनेस में दिन दोगुनी रात चौगुनी बढोत्तरी होगी। हम आगे आपको पूजा विधि भी बताएंगे। 

द्वारका और सोने की लंका बनाई थी भगवान विश्वकर्मा ने

पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका बनाई थी। इसके अलावा श्रीकृष्ण के अनुरोध पर द्वारिका नगरी का भी निर्माण किया था। देवताओं और दानवों के बीच युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियार भी भगवान विश्वकर्मा ही बनाते थे। 

देव शिल्पी विश्वकर्मा के महात्म्य को लेकर पुराणों में काफी वर्णन है। अपने खास ज्ञान के कारण बाबा विश्वकर्मा भक्तों में खास लोकप्रिय और पूज्य हैं। खासकर कोई भी कल कारखाने से जुड़ा या फिर तकनीकी काम बिना बाबा विश्वकर्मा की पूजा के शुभ नहीं माना जाता है। 

हर साल आश्विन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को विश्वकर्मा जयंती मनायी जाती है। मान्यता के मुताबिक हर साल 17 सितंबर को बाबा विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। हालांकि देश के कई इलाकों में 16 सितंबर को भी विश्वकर्मा पूजा धूमधाम से मनाई जाती है। विश्वकर्मा जयंती पर खासकर कारखानों और रक्षा से जुड़े उपकरणों और हथियारों की पूजा होती है। 

पुराणों में उल्लेख किए गए सभी देवनगरी बाबा विश्वकर्मा ने ही बनाये थे। 'स्वर्ग लोक', 'लंका' और 'द्वारका' के बारे में तो सब जानते ही हैं। इसके अलावा इंद्र का दरबार, महादेव का त्रिशूल, हनुमान जी की गदा, श्रीहरि का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड, कर्ण के कुंडल और कुबेर के पुष्पक विमान भी बाबा विश्वकर्मा ने ही बनाया था। शिल्पकार के तौर पर बड़े बड़े इंजीनियर भी बाबा के आगे सिर नवाते हैं। 

बिजनेस में बरकते के लिए ऐसे करें पूजा 

विश्वकर्मा पूजा से आपके व्यवसाय में उन्नति होती है। इसके लिए जरूरी पूजा सामग्री है, अक्षत, फूल, चंदन, मिठाई, रक्षासूत्र, दही, रोली, सुपारी, धूप और अगरबस्ती। पूजा अपने व्यावसायिक स्थल पर ही करें, मसलन फैक्टरी, वर्कशॉप या आफिस में, आराधना से पहले परिसर की साफ सफाई जरूरी है। पूजा से पहले कलश स्थापना भी करें तो पूजा का पूर्ण लाभ मिल पाता है। आप किसी तरह का बिजनेस करते हों, भगवान विश्वकर्मा की पूजा से आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। साथ ही आपके कर्मचारियों में भी नये उत्साह का संचार होता है।  

 

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