सोलह दिनों के महालक्ष्मी व्रत का हो रहा समापन, पूजा से होगी सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति

Sixteen days of Mahalakshmi fast being concluded worship will bring  prosperity  - Sakshi Samachar

सोलह दिनों के महालक्ष्मी व्रत का होगा समापन

सुख-समृद्धि पाने के लिए यूं करें लक्ष्मी पूजा 

सोलह दिनों के महालक्ष्मी के सोरहिया व्रत का प्रारंभ भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होता है जिसका समापन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। श्राद्ध पक्ष में पड़ने वाले इस व्रत का धार्मिक रूप से बड़ा महत्व माना जाता है। 

इस वर्ष 16 दिनों के महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ 25 अगस्त से हुआ था जो 10 सितंबर को पूर्ण होगा। इस दिन महालक्ष्मी का व्रत करने तथा विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति सुख, समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है। वैसे जो लोग 16 दिन लगातार व्रत नहीं रख पाते हैं, वे पहले और अंतिम दिन व्रत रखते हैं।

महालक्ष्मी व्रत पूजा मुहूर्त

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर की रात्रि में 09 बजकर 45 मिनट पर लगेगी, जो गुरुवार की रात्रि 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महालक्ष्मी व्रत गुरुवार को रखा जाएगा।

ये है महालक्ष्मी व्रत का महत्व

महालक्ष्मी के इस व्रत को 16 दिनों तक रखना संभव न हो तो व्यक्ति को पहले दिन, आठवें दिन और अंतिम दिन का व्रत रखना चाहिए। इस व्रत को करने से धन-संपदा, समृद्धि, ऐश्वर्य, संतान आदि की प्राप्ति होती है। नौकरी या बिजनेस में भी तरक्की मिलती है।

इन महालक्ष्मी मंत्रों का जाप करें 

श्री लक्ष्मी बीज मन्त्र: “ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।” 

श्री लक्ष्मी महामंत्र: “ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।”

पूजा के समय आप महालक्ष्मी के इन दो मंत्रों में से किसी एक का जाप कर सकते हैं।

ऐसे करें महालक्ष्मी की पूजा 

- अष्टमी के दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर महालक्ष्मी व्रत का विधि-पूर्वक उद्यापन करें। 
- पहले दिन हाथ में बांधे गए 16 गांठ वाले रक्षासूत्र को खोलकर नदी या सरोवर में विसर्जित कर दें। 
- पूजा मुहूर्त में महालक्ष्मी की प्रतिमा की स्थापना करें और उनकी अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, चन्दन, पत्र, माला, सफ़ेद कमल या कोई भी कमल का फूल और कमलगट्टा अर्पित कर पूजा करें। 
-महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को मां लक्ष्मी के सामने स्थापित करें और इसकी पूजा करें। यह चमत्कारी यंत्र धन वृद्धि के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इस यंत्र की पूजा से परेशानियां और दरिद्रता दूर होती है। 


-महालक्ष्मी व्रत में दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल और दूध डालकर देवी लक्ष्मी की मूर्ति से अभिषेक करना चाहिए इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। 
- फिर लक्ष्मी जी को सफेद बर्फी या किशमिश का भोग लगाएं। 
- महालक्ष्मी व्रत की कथा सुनें। 
- महालक्ष्मी को पूजा में कौड़ी अर्पित करें। पूजा के बाद इन दोनों चीजों को अपने तिजोरी या लॉकर में रखें।
- मंत्र जाप के बाद महालक्ष्मी की आरती करें। ​उसके बाद अपनी मनोकामना प्रकट करें। फिर प्रसाद परिजनों में वितरित कर दें। 
अंत में विधिपूर्वक माता महालक्ष्मी की प्रतिमा का विसर्जन कर व्रत को पूर्ण करें।

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