वरलक्ष्मी व्रत पर ऐसे करेंगे मां लक्ष्मी की पूजा तो धन-धान्य से भर जाएंगे भंडार, जानें महत्व व मुहूर्त

Significance of varalaxmi vrat muhurat puja method  - Sakshi Samachar

सावन के अंतिम सोमवार को रखा जाता है वरलक्ष्मी व्रत 

इस दिन माता लक्ष्मी के साथ होती है गणेशजी की पूजा 

वरलक्ष्मी व्रत पूजा से प्रसन्न होती है मां लक्ष्मी 

सावन के पावन महीने के कुछ ही दिन बचे हैं और इस महीने के अंतिम शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है और माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों के सभी संकट हरके मां लक्ष्मी उनके दामन को खुशियों से भर देती है। 

इस बार वरलक्ष्मी व्रत 31 जुलाई 2020 को है। माता वरलक्ष्मी मां महालक्ष्मी का ही एक स्वरूप हैं। माता वरलक्ष्मी समस्त कामनाओं की पूर्ति करती हैं और अपने भक्तों को मालामाल कर देती है। माना जाता है कि इस  दिन माता वरलक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति पर उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

ये है वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वरलक्ष्मी व्रत का महत्व दीपावली की पूजा के समान ही होता है। इस दिन माता वरलक्ष्मी और विघ्नहर्ता श्री गणेश की आराधना से कल्याण होता है। माता वरलक्ष्मी दरिद्रता का नाश करती हैं और गणपति कार्यों को सफल बनाते हैं।

ये है वरलक्ष्मी व्रत का शुभ मुहूर्त

वरलक्ष्मी पूजा के लिए यहां आपको चार लग्न की पूजा मुहूर्त बता रहे हैं ....

सिंह लग्न पूजा का समय: सुबह 06 बजकर 59 मिनट से दिन में 09 बजकर 17 मिनट तक।

वृश्चिक लग्न पूजा का समय: दोपहर के समय 01 बजकर 53 मिनट से दिन में 04 बजकर 11 मिनट तक।

कुम्भ लग्न पूजा का समय: शाम के समय 07 बजकर 57 मिनट से रात में 09 बजकर 25 मिनट तक।

वृषभ लग्न पूजा का समय: देर रात 12 बजकर 25 मिनट से 01 अगस्त के तड़के 02 बजकर 21 मिनट तक।


ऐसे करें वरलक्ष्मी व्रत पर मां लक्ष्मी की पूजा 

- वरलक्ष्मी व्रत की पूजा करने वाले साधक को सुबह प्रात: काल जल्दी उठकर घर की अच्छी तरह से सफाई करनी चाहिए। 
- इसके बाद स्नान आदि करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करना चाहिए। 
- पूजा स्थल को पवित्र करने के बाद एक चौकी पर गंगाजल डालकर उसे भी पवित्र कर लें और भगवान गणेश के साथ माता लक्ष्मी की मूर्ति पूर्व दिशा में स्थापित करें। - इसके बाद माता लक्ष्मी को नए वस्त्र और गहने और कुमकुम आदि से सजाएं और इसके बाद एक कलश की स्थापना करें। 
- कलश के अंदर पान, सुपारी, एक सिक्का रखें और उसके ऊपर आम के पत्ते रखकर एक नारियल पर चंदन, हल्दी और कुमकुम लगाकर उस पर स्थापित करें। 
- इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करके उनकी विधिवत पूजा करें और माता लक्ष्मी को लाल वस्त्र अर्पित करें।
- माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करने के बाद अक्षत, फल, फूल, धूप व दीप से उनकी विधिवत पूजा करें।
- इसके बाद वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा पढ़ने के बाद माता लक्ष्मी से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना अवश्य करें। 
- पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं के बीच प्रसाद का वितरण करें।

 

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