पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करेंगे पूजा तो होगी संतान सुख की प्राप्ति, जानें महत्व, पूजा-विधि व मुहूर्त

significance of putrada ekadashi vrat puja method muhurat - Sakshi Samachar

सावन पुत्रदा एकादशी का महत्व

पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें पूजा

पुत्रदा एकादशी के व्रत से होती है संतान प्राप्ति 

सावन का महीना चल रहा है और इस महीने का बड़ा महत्व है। इस महीने किए गए सभी पूजा-पाठ का विशेष फल मिलता है और इस माह की एकादशी भी पुण्य फल प्रदान करती है। वैसे तो पूरे वर्ष में 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं पर सावन माह की एकादशी का खास महत्व होता है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। सावन माह के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी को सावन पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। 

माना जाता है कि सच्चे मन से यह व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। जिन लोगों को किसी भी प्रकार की संतान संबंधी समस्या हो उन्हें यह व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस बार सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 जुलाई गुरुवार को पड़ रहा है। साल में दोबार पुत्रदा एकादशी आती है, दूसरी पुत्रदा एकादशी का व्रत पौष माह में पड़ता है। 

ये है सावन पुत्रदा एकादशी का महत्व 

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत करने से वाजपेयी यज्ञ के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की संतान नहीं है उन लोगों के लिए यह व्रत बहुत शुभफलदायी होता है, भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर संतान को किसी प्रकार का कष्ट है तो भी यह व्रत रखने से सारे कष्ट दूर होते हैं। संतान दीर्घायु होती है। 
 पुत्रदा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की ही कृपा प्राप्त होती है। जो लोग श्रद्धा के साथ पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व और कथा को पढ़ता या श्रवण करता है उसे कई गायों के दान के बराबर फल की प्राप्ति होती है। समस्त पापों का नाश हो जाता है। 

पुत्रदा एकादशी का मुहूर्त 

एकादशी तिथि का आरंभ 30 जुलाई को 01:16 मिनट पर होगा।

एकादशी समाप्ति 30 जुलाई को 11:49 मिनट पर होगी।

व्रत के पारण का समय 
31 जुलाई की सुबह को 05:42 बजे से 08:24 बजे तक रहेगा।  

पारण के दिन द्वादशी तिथि 10:42 पर समाप्त हो जाएगी।

ऐसे करें सावन पुत्रदा एकादशी पर पूजा 

- एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें। 
- इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर लें। फिर हाथ में जल लेकर पुत्रदा एकादशी व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- अब भगवान विष्णु या बाल गोपाल श्रीकृष्ण की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें। 
- फिर उनको पंचामृत से स्नान कराएं। चंदन तिलक कर वस्त्र पहनाएं। पीले पुष्प, धूप, दीप, गंध, तुलसी, पान, सुपारी आदि अर्पित करें। फल, नारियल, बेर, आंवला, लौंग भी अर्पित करें। 
- इसके पश्चात विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। फिर भगवान विष्णु की आरती करें। ईश्वर से अपनी इच्छा व्यक्त करें।
- विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है इसलिए उनकी पूजा में तुलसी का प्रयोग अवश्य करें।
- दिनभर व्रत के नियमों का पालन करें और भगवत वंदना में समय व्यतीत करें। 
- शाम के समय पुत्रदा एकादशी व्रत कथा सुनें और फलाहार करें। अगले दिन पारण करके व्रत को पूर्ण करें।
 

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