कालाष्टमी व्रत-पूजा से दूर होते हैं संकट, आजमाएं ये खास उपाय

significance of kalashtami puja method tips to please kaal bhairav - Sakshi Samachar

कालाष्टमी पर होती है काल भैरव की पूजा

काल भैरव की पूजा से दूर होते हैं संकट

शास्त्रों में हर महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी मनाने की बात कही गई है। उसी के अनुसार ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की कालाष्टमी 14 मई, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव जी के क्रुद्ध स्वरूप काल भैरव की उत्पत्ति हुई है।
 ऐसी मान्यता है कि जो भक्त काल भैरव देव की पूजा-उपासना करते हैं। उनके जीवन से समस्त प्रकार के दुःख और क्लेश दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में यश और कीर्ति का आगमन होता है। कालाष्टमी के दिन मां दुर्गा की भी पूजा होती है। 

 कालभैरव की पूजा का महत्व

नारद पुराण के अनुसार कालाष्टमी के दिन कालभैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इस रात देवी काली की उपासना करने वालों को अर्ध रात्रि के बाद मां की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए जिस प्रकार दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस दिन शक्ति अनुसार रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए। इस दिन व्रती को फलाहार ही करना चाहिए। इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी के व्रत से दूर होते हैं रोग

कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठ होने का विवाद उत्पन्न हुआ। विवाद के समाधान के लिए सभी देवता और मुनि शिवजी के पास पहुंचे। सभी देवताओं और मुनि की सहमति से शिवजी को श्रेष्ठ माना गया। परंतु ब्रह्माजी इससे सहमत नहीं हुए। ब्रह्माजी, शिवजी का अपमान करने लगे। अपमानजनक बातें सुनकर शिवजी को क्रोध आ गया, जिससे कालभैरव का जन्म हुआ। 
उसी दिन से कालाष्टमी का पर्व शिवजी के रुद्र अवतार कालभैरव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा। कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं और काल उससे दूर हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति रोगों से दूर रहता है। साथ ही उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

कालाष्टमी पर करें ये खास उपाय 

- शत्रु या कार्य में आ रही किसी बाधा को दूर करने के लिए कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा करें।
- यदि आप बाबा काल भैरव की कृपा चाहते हैं तो कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव के मंदिर में जाकर उनकी प्रतिमा पर सिंदूर और तेल चढ़ाएं और मूर्ति के सामने बैठकर काल भैरव मंत्र का जाप करें।
कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा से जीवन में अपार धन, यश और सफलता प्राप्त होती है। 
- शास्त्रों में कुत्ते को भगवान काल भैरव का वाहन बताया गया है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं। यदि काला कुत्ता उपलब्ध न हो तो किसी भी कुत्ते को खिलाकर यह उपाय कर सकते हैं। इस उपाय को करने से न सिर्फ भगवान भैरव बल्कि शनिदेव की भी कृपा बरसेगी। 
- काल भैरव शिव के तामसी रूप हैं इसलिए इन्हें प्रसाद स्वरूप मदिरा चढ़ाई जाती है। 

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