ऐसे करेंगे बुध प्रदोष व्रत पर शिव-शंकर की पूजा तो मिलेगा शुभ फल, जानें महत्व व पूजा-विधि

significance of budh pradosh vrat shiv puja method  - Sakshi Samachar

बुध प्रदोष का महत्व 

बुध प्रदोष पर ऐसे करें पूजा 

हर महीने दो प्रदोष व्रत आते हैं और प्रदोष भोलेनाथ को प्रिय है। इस दिन भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है, व्रत रखा जाता है जिससे शिव-शंकर भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं और उनके संकट दूर करते हैं। इस बार 28 अक्टूबर, बुधवार को प्रदोष व्रत है तो यह बुध प्रदोष व्रत कहलाता है। जिस दिन प्रदोष व्रत होता है उस दिन के हिसाब से ही उसका नाम होता है और महत्व भी। 

वहीं यह भी माना जाता है प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है श्राप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। 

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले साधक पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसका दु:ख दारिद्रता दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं। 

प्रदोष व्रत पर ऐसे करें पूजा

प्रदोष व्रत करने के लिए जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें और भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं। 

अलग-अलग कामनाओं से रखा जाता है प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति के साथ किया जाता है। अगर किसी को सुख सौभाग्य और धन लाभ चाहिए तो हर माह की त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार के दिन व्रत रखना शुभ होता है। लंबी आयु की कामना के लिए रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत रखना चाहिए।

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वहीं अगर आपके मन में संतान प्राप्ति की इच्छा है तो शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष के दिन उपवास रखना शुभ फलदायक रहता है। कर्जों से मुक्ति के लिए सोमवार प्रदोष व्रत रखना श्रेष्ठ होता है।

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