अंगारकी चतुर्थी पर यूं करें गणेशजी की पूजा और पाएं सुख-संपत्ति का वरदान, जानें महत्व, पूजा विधि व मुहूर्त

Significance of angaraki chaturthi vrat puja method muhurat - Sakshi Samachar

भगवान गणेश को अति प्रिय है चतुर्थी व्रत

मंगल़वार को चतुर्थी पडने पर उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं 

यह तो हम जानते ही हैं कि हर महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है। सुखृ-समृद्धि की कामना से ये व्रत रखा जाता है। इस व्रत में भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। वहीं वार के साथ चतुर्थी व्रत का संयोग अलग-अलग फल देने वाला होता है। मंगलवार को चतुर्थी होने से इसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से हर तरह की आर्थिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं।

ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 26 मई, मंगलवार को यानी आज अंगारकी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस पावन दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है। विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है।

अंगारकी चतुर्थी का महत्व

मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि होने से उसे अंगारकी चतुर्थी कहा गया है। गणेश पुराण के अनुसार इस दिन गणेशजी की पूजा के साथ व्रत करने से बीमारियां दूर हो जाती हैं। मंगलवार का संयोग होने से इस दि नकिए गए व्रत से आर्थिक परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हों उनके लिए ये व्रत महत्वपूर्ण होता है। कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से हर तरह के कष्ट दूर होते हैं। कर्ज या किसी भी तरह के लोन से परेशान लोगों को ये व्रत जरूर करना चाहिए।

अगली अंगारकी चतुर्थी अब 20 अक्टूबर को होगी

हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में एक या 2 ही बार ये संयोग बनता है। इस साल माघ मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी यानी 28 जनवरी को तिलकुंद चतुर्थी पर ये संयोग बना था। इसके बाद 26 मई यानी आज मंगलवार और चतुर्थी तिथि का संयोग बन रहा है। अब 20 अक्टूबर को अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी रहेगी।

अंगारकी चतुर्थी पर मंगल पूजा

इस चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा के साथ मंगल देव की भी पूजा की जाती है। ग्रंथों के अनुसार मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। अंगारकी चतुर्थी व्रत में मंगल पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन, लाल फूल और गुलाल चढ़ाना चाहिए। इस चतुर्थी व्रत में लाल कपड़े पहनना चाहिए। इसके साथ ही फलों के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।

अंगारकी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंगारकी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा दिन में की जाती है।

सुबह 10 बजकर 59 मिनट से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक।

अंगारकी चतुर्थी पूजा-विधि

- इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान करें।

- स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- भगवान गणेश को स्नान कराएं।
 स्नान के बाद भगवान गणेश को साफ वस्त्र पहनाएं।

- भगवान गणेश को सिंदूर का तिलक लगाएं। 
सिंदूर का तिलक अपने माथे पर भी लगाना चाहिए।

गणेश भगवान को दुर्वा अतिप्रिय होता है। भगवान गणेश को दुर्वा अर्पित करना चाहिए।

- गणेश जी की आरती करें।

- भगवान गणेश को भोग लगाएं।

- गणेश भगवान को लड्डू, मोदक पसंद होते हैं। अगर संभव हो तो गणेश जी को लड्डू, मोदक का भोग लगाएं।

- आप अपनी इच्छानुसार भी भगवान गणेश को भोग लगा सकते हैं, बस इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक भोजन का ही भोग लगाया जाता है।

चतुर्थी व्रत को ब्रह्माजी ने बताया श्रेष्ठ
  
महाराष्ट्र और तमिलनाडु में चतुर्थी व्रत का सर्वाधिक प्रचलन है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का अत्यधिक महत्व है। शिव पुराण के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन दोपहर में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। माता पार्वती और भगवान शिव ने उन्हें पुत्र रूप में प्राप्त किया था। उनके प्रकट होते ही संसार में शुभता का आभास हुआ। जिसके बाद ब्रम्हदेव ने चतुर्थी के दिन व्रत को श्रेष्ठ बताया। वहीं कर्ज एवं बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए मंगलवार को चतुर्थी व्रत और गणेश पूजा की जाती है। 

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