अक्षय तृतीया पर यूं शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजा तो मिलेगा मनोवांछित फल, जानें पूजा विधि, मंत्र व महत्व

Significance of akshay tritiya muhurat puja method  - Sakshi Samachar

अक्षय तृतीया पर पूरे विधि-विधान से करें पूजा

अक्षय तृतीया का महत्व व शुभ मुहूर्त 

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे आखा तीज भी कहते हैं।  हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया को बहुत ही शुभ और पवित्र तिथि माना जाता है। इस बार यह 26 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। यह एक ऐसी तिथि है जिसमें किसी शुभ कार्य को बिना पंचांग देखे भी किया जा सकता है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस बार 26 तारीख़ को दिन में 11 बजकर 12 मिनट तक तृतीया रहेगी। रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग की अक्षय तृतीया सर्वोत्तम मानी गई है। 

कहते हैं कि अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु की पूजा करने से धन संपदा में अक्षय वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया के दिन हरीहर अर्थात् भगवान विष्णु एवं शिव की संयुक्त पूजा करना भी फलप्रद है। इसका विधान यह है कि सर्वदेव स्वरूप श्री शालिग्राम जी का रुद्राष्टध्यायी के द्वितीय एवं पंचम अध्याय का पाठ करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें। ऐसे आराधक इस लोक में सुख प्राप्त कर हरीहर अर्थात् विष्णु-शिव लोक प्राप्त करते हैं।

अक्षय तृतीया का महत्व

- अक्षय तृतीया पर दान और पूजा करने से इसका फल कई गुना होने के साथ अक्षय भी रहता  है।

- अक्षय तृतीया पर इस वर्ष सूर्य, चंद्रमा और मंगल अपनी उच्च राशि में रहेंगे जबकि शुक्र और शनि स्वयं की राशि में रहने से शुभ संयोग बनेगा।

- अक्षय तृतीया पर सोने और चांदी से बने हुए आभूषण की खरीदारी को शुभ माना जाता है।

- अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

- इस दिन दान करने का महत्व काफी होता है। अक्षय तृतीया पर 14 तरह के दान करने से सभी तरह के सुख और संपन्नता की प्राप्ति होती है।

अक्षय तृतीया मुहूर्त 

साल 2020 में अक्षय तृतीया की तिथि 25 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 26 अप्रैल के दिन दोपहर 1 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। पंचांग के अनुसार 26 अप्रैल को सूर्योदय व्यापिनी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से मनाई जाएगी।

ऐसे करें अक्षय तृतीया पर पूजा 

- प्रातःकाल गंगा-स्नान करके भगवान विष्णु देव का चन्दन युक्त जल से स्नान कराएं। फिर उनको इत्र का लेपन कर चन्दन लगाएं। 
- इसके बाद “शुक्लाम्बर धरम देवम शशिवर्णम चतुर्भुजम, प्रसन्नवदनम ध्यायेत सर्व विघ्नोपशांतये।।” इस मन्त्र से तुलसी दल चढाएं। 
-संभव हो तो बेला का फूल चढ़ाते हुए “माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मया ह्रितानि पुष्पाणि पूजार्थम प्रतिगृह्यताम।।” मन्त्र का उच्चारण करें।
- पूजन के पश्चात गुड़, चने के सत्तू और मिश्री का भोग लगाएं। यदि सम्भव हो तो दूध, दही, शुद्ध घी, शहद एवं चीनी से युक्त पंचामृत का स्नान कराएं। इस दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें। “पंचामृतम मयानीतम पयो दधि घृतम मधु शर्करा च समायुक्तम स्नानार्थम प्रति गृह्यताम।।” 
- भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। 
-तुलसी को दीप जलाकर उनकी भी पूजा करें। पूजा में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की आरती और मंत्रो का उच्चारण कर दान का संकल्प करना चाहिए।

इस प्रकार अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करने से घर में धन-धान्य की अक्षय वृद्धि होती है।

अक्षय तृतीया पर करें इन चीजों का दान

ग्रीष्मऋतु से सम्बन्धित सत्तू, गुड़, जल, पंखा, फल आदि का दान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। पूजनोपरान्त इस मन्त्र से प्रार्थना करते हुए पुष्प चढ़ाएं-

“अन्यथा शरणम नास्ति त्वमेव शरणम मम।

तस्मात कारुण्य भावेन रक्ष माम चतुर्भुजम।।”

अक्षय तृतीया की कथा

अक्षय तृतीया की पौराणिक मान्यता है कि महाभारत-काल में जब पाण्डवों को 13 वर्ष का वनवास हो गया तो एक बार ऋषि दुर्वासा पाण्डवों की कुटिया में पधारे। उनका यथोचित सत्कार द्रौपदी ने किया, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने उन्हें अक्षय-पात्र प्रदान किया और कहा कि आज अक्षय तृतीया है, अतः आज के दिन पृथ्वी पर जो भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कर चने का सत्तू, गुड़, ऋतुफल, वस्त्र, जलयुक्त घड़ा तथा दक्षिणा के साथ श्री हरी विष्णु के निमित्त दान करेगा, उसका भण्डार सदैव भरा रहेगा।

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