श्रावण 2020: सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर ऐसे करें मां पार्वती की पूजा, मिलेगा सौभाग्य का वरदान

shravan 2020 last mangala gauri vrat puja method  - Sakshi Samachar

सावन के हर मंगलवार को किया जाता है मंगला गौरी व्रत

28 जुलाई को है अंतिम मंगला गौरी व्रत 

मंगला गौरी व्रत पर ऐसे करें पूजा 

भोलेनाथ का प्रिय मास सावन चल रहा है जिसके अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। सावन सोमवार को जहां भगवान शिव की पूजा होती है वहीं सावन के हर मंगलवार को मां पार्वती के लिए मंगला गौरी व्रत रखा जाता है और उनकी विशेष पूजा होती है। 

माना जाता है कि मंगला गौरी व्रत रखने से सुख-सौभाग्य का वरदान मिलता है। वहीं यह भी कहते हैं कि इस दिन मां मंगला गौरी का पूजन करने से विवाह, नौकरी, व्यापार और धन संबंधित सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं। खासतौर से अगर मंगल दोष समस्या हो तो इस दिन की पूजा बहुत ही फायदेमंद होती है।

28 जुलाई को इस सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत है।  इससे पहले 7,14, 21 तारीख को भी ये व्रत किया गया था। 

मंगला गौरी व्रत का महत्व

माना जाता है कि अविवाहित कन्याओं के मंगला गौरी व्रत करने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। इससे सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। युवतियों और महिलाओं की कुंडली में वैवाहिक जीवन में कमी होती है या शादी के बाद पति से अलग होने या तलाक हो जाने जैसे अशुभ योग निर्मित हो रहें हो तो उन महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से फलदायी है।

ऐसे करें मंगला गौरी व्रत व पूजा 

- सबसे पहले प्रात: काल दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
- इसके बाद मंगला गौरी व्रत एवं पूजा का संकल्प करें। - फिर पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें, इसके पश्चात मां मंगला गौरी की तस्वीर या मूर्ति को लाल वस्त्र बिछाकर एक चौकी पर स्थापित कर दें।
- अब माता रानी का पुष्प, अक्षत, गंध, धूप, दीप आदि से षोडशोपचार पूजन करें।
- यह व्रत अखंड सौभाग्य के लिए किया जा रहा है तो माता को 16 श्रृंगार के सामान अर्पित करें।
- अब देवों के देव महादेव को भी पुष्प, अक्षत, भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि अर्पित कर पूजन करें।
- अब मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करें।

मंगला गौरी व्रत-कथा

लोक कथा के अनुसार धर्मपाल नाम के सेठ के पास बहुत सारी धन-संपत्ति थी। पत्नी भी अच्छी थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए वह दुखी रहता था। 
लंबे समय बाद भगवान की कृपा से उसे एक पुत्र हुआ। पुत्र के लिए ज्योतिषियों की भविष्यवाणी थी कि बच्चे की उम्र कम रहेगी और उम्र के सोलहवें साल में सांप के डसने से मृत्यु होगी।जब पुत्र थोड़ा बड़ा हुआ तो उसकी शादी ऐसी लड़की से हुई जिसकी माता मंगला गौरी व्रत करती थीं। इस व्रत को करने वाली महिला की बेटी को आजीवन पति का सुख मिलता है और वह हमेशा सुखी रहती है। इसलिए इस व्रत के शुभ प्रभाव से धर्मपाल के पुत्र को भी लंबी उम्र मिली।

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