देवशयनी एकादशी 2020 : जानें आखिर क्यों इस बार 4 नहीं बल्कि 5 माह शयन करेंगे श्री हरि

know why this time lord vishnu will sleep for 5 months  - Sakshi Samachar

देवशयनी एकादशी का महत्व 

चातुर्मास पांच माह का होगा 

इस बार चार नहीं बल्कि पांच माह शयन करेंगे श्री हरि 

 

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बड़ा महत्व है वहीं देवशयनी एकादशी की गिनती तो बड़ी एकादशियों में होती है और इस दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले फिर देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। यह चार माह चातुर्मास के नाम से भी जाने जाते हैं। 

इस बार देवशयनी एकादशी 1 जुलाई, बुधवार को है। देवशयनी एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी और पद्मनाभा एकादशी आदि नाम से भी जाना जाता है। देखा जाए तो देवशयनी एकादशी से जुड़ी इस बार खास बात यह है कि श्री हरि चार नहीं बल्कि पांच माह के लिए योग निद्रा में जाएंगे। भगवान विष्णु के इस निद्राकाल को चातुर्मास भी कहा जाता है और इन दिनों में शादी, सगाई जैसे मांगलिक कार्यक्रमों पर भी ब्रेक लग जाता है। 

माना जाता है कि भगवान विष्णु इन चार माह में क्षीरसागर में शयन करते हैं वहीं यह भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु पाताल लोक में बालि के यहां जाते हैं। 

आइये यहां जानते हैं देवशयनी एकादशी से जुड़ी कुछ खास बातें ........

- चातुर्मास देवशयनी एकादशी से ही आरंभ हो जाता है। भगवान विष्णु इस दिन से चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह बाद भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं इस तिथि को प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी कहते हैं लेकिन इस साल 4 महीने की जगह चातुर्मास लगभग 5 महीने का होने जा रहा है। यानी 1 जुलाई से शुरू होकर यह समय 25 नवंबर तक चलेगा, इसके बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 

- देवशयनी एकादशी से व्रत, साधना और पूजा आदि का समय प्रारंभ हो जाता है। देवशयनी एकादशी का व्रत करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी पापों का नाश हो जाता है। इस दिन मंदिर और मठों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।

- देवशयनी एकादशी का व्रत यदि आप रख रहे हैं तो ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर विराजमान करें। फिर भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, पीला चंदन चढ़ाएं। फिर पान और सुपारी अर्पित करने के बाद धूप, दीप और पुष्प चढ़ाकर आरती उतारें।

-भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद फलाहार ग्रहण करें। फिर रात्रि में स्वयं के सोने से पहले भजनादि के साथ भगवान को शयन कराना चाहिए।

देवशयनी एकादशी व्रत का फल 

शास्त्रों के अनुसार देवशयनी एकादशी पर व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण का कहना है कि इस व्रत से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं भागवत महापुराण के अनुसार इस दिन शंखासुर राक्षस को मारने के बाद भगवान विष्णु क्षीर सागर में 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले गए थे। इसलिए इस दिन भगवान को शयन करवाने की परंपरा है।

देवशयनी एकादशी से शुरू होते हैं पूजा-पाठ 

चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, कथा, अनुष्ठान से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। चातुर्मास में भजन, कीर्तन, सत्संग, कथा, भागवत के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

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